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MP Cyber Security Research Centre: मध्यप्रदेश में बनेगा राज्य साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

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Published On: 15 June 2026
MP Cyber Security Research Centre: मध्यप्रदेश में बनेगा राज्य साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर, CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

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MP Cyber Security Research Centre: मध्यप्रदेश में बनेगा राज्य साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर,

राज्य में डिजिटल सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम

MP Cyber Security Research : मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि राज्य में एक State Cyber Security Research Centre स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य साइबर खतरों की पहचान, रोकथाम और निगरानी को आधुनिक तकनीक के माध्यम से और अधिक मजबूत बनाना होगा।

आज के डिजिटल युग में जहां सरकारी सेवाएं, बैंकिंग, प्रशासन और नागरिक डेटा पूरी तरह ऑनलाइन हो चुका है, ऐसे में साइबर सुरक्षा राज्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

मिलिट्री संस्थान के साथ होगा सहयोग

इस प्रस्तावित साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (MCTE) के सहयोग से की जाएगी। यह संस्थान भारतीय सेना का एक प्रमुख तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है, जहां से साइबर और टेलीकॉम तकनीक से जुड़े विशेषज्ञ तैयार किए जाते हैं।

इस सहयोग के माध्यम से राज्य को सैन्य स्तर की साइबर सुरक्षा तकनीक और विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। इससे न केवल सरकारी सिस्टम बल्कि महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

आधुनिक तकनीक से लैस होगा सेंटर

यह साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर केवल एक प्रशासनिक ढांचा नहीं होगा, बल्कि इसे आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित किया जाएगा। इसमें निम्नलिखित सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:

  • साइबर थ्रेट की रियल-टाइम मॉनिटरिंग
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खतरा पहचान प्रणाली
  • डेटा एनालिटिक्स और फॉरेंसिक जांच
  • प्रिडिक्टिव साइबर सिक्योरिटी अलर्ट सिस्टम
  • 24×7 निगरानी तंत्र

इन सुविधाओं के जरिए राज्य को साइबर हमलों से पहले ही सतर्क किया जा सकेगा और संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सकेगा।

डेटा सुरक्षा को बताया सबसे बड़ी संपत्ति

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित एक विभागीय कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आज के समय में राज्य का डेटा किसी भी अन्य संसाधन से अधिक मूल्यवान है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि डेटा सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय और प्रशासनिक सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी स्तर पर डेटा सुरक्षा में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय करते हुए वसूली तक की कार्रवाई की जाएगी।

साइबर फ्रेमवर्क को मजबूत करने की तैयारी

कार्यशाला का मुख्य विषय राज्य के साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को और अधिक मजबूत बनाना था। इसमें विशेषज्ञों, तकनीकी अधिकारियों और प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस दौरान यह चर्चा हुई कि किस तरह से सरकारी विभागों के डेटा को एकीकृत और सुरक्षित किया जाए, ताकि किसी भी साइबर हमले की स्थिति में पूरे सिस्टम को सुरक्षित रखा जा सके।

सरकार का लक्ष्य एक ऐसा डिजिटल सुरक्षा ढांचा तैयार करना है, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।

सिंहस्थ 2028 की डिजिटल सुरक्षा पर विशेष फोकस

एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एसाई मनोहर सिंह ने बताया कि आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए साइबर सुरक्षा की विशेष तैयारी की जा रही है।

सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक और डिजिटल रूप से संवेदनशील आयोजन में करोड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं, जिससे साइबर सुरक्षा की चुनौती कई गुना बढ़ जाती है।

वर्तमान में राज्य के पास केवल 6 साइबर कमांडो हैं, जबकि 38 अन्य विशेषज्ञ चयनित किए जा चुके हैं। इस प्रकार कुल 44 साइबर कमांडो तैयार किए जा रहे हैं।

3000 साइबर वॉरियर्स की बड़ी योजना

सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए सरकार ने लगभग 3000 साइबर वॉरियर्स तैयार करने की योजना बनाई है। इन वॉरियर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और इन्हें डिजिटल सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं में दक्ष बनाया जाएगा।

इनमें इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र, तकनीकी स्नातक और युवा वॉलंटियर्स शामिल होंगे, जिन्हें साइबर सुरक्षा, नेटवर्क सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इनका मुख्य कार्य बड़े डिजिटल आयोजनों के दौरान साइबर हमलों से सुरक्षा प्रदान करना होगा।

दुश्मन देशों से संभावित साइबर अटैक की तैयारी

अधिकारियों के अनुसार, सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों में केवल सामान्य साइबर अपराधी ही नहीं, बल्कि विदेशी तत्वों द्वारा भी साइबर अटैक की संभावना रहती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए यह साइबर वॉरियर्स बल तैयार किया जा रहा है, जो किसी भी प्रकार के डिजिटल हमले, डेटा चोरी या सिस्टम हैकिंग को रोकने में सक्षम होगा।

डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगा बढ़ावा

यह पहल केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप भी मानी जा रही है। राज्य में मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार होने से ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

इसके साथ ही नागरिकों का सरकारी डिजिटल सेवाओं पर भरोसा भी बढ़ेगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

इस साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर और साइबर वॉरियर्स योजना से राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण के नए अवसर भी खुलेंगे।

तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं को साइबर सुरक्षा क्षेत्र में काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे स्किल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश सरकार का यह निर्णय राज्य को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना और 3000 साइबर वॉरियर्स की तैयारी से राज्य की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

आने वाले समय में यह पहल न केवल सरकारी डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि बड़े आयोजनों और आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएगी।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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