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MP में TET अनिवार्यता के खिलाफ भोपाल में हजारों शिक्षकों का विशाल प्रदर्शन, नियमों में बदलाव की मांग तेज हुई

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Published On: 18 April 2026
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MP TET शिक्षक आंदोलन: 

MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को समाप्त करने समेत कई मांगों को लेकर राज्यभर के सरकारी शिक्षक राजधानी भोपाल में एकजुट हो गए। अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर शनिवार, 18 अप्रैल को भोपाल में एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में शिक्षक शामिल हुए। यह प्रदर्शन न केवल अपनी संख्या के कारण चर्चा में रहा, बल्कि इसमें उठाई गई मांगों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और नीति पर गंभीर बहस भी खड़ी कर दी है।

भेल स्थित दशहरा मैदान इस आंदोलन का केंद्र बना, जहां सुबह से ही शिक्षकों का पहुंचना शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा मैदान खचाखच भर गया और हालात यह हो गए कि वहां खड़े होने तक की जगह नहीं बची। पंडाल पूरी तरह भर चुके थे और आसपास का क्षेत्र भी भीड़ से पट गया।

दशहरा मैदान बना शिक्षक आंदोलन का केंद्र

भोपाल के भेल क्षेत्र स्थित दशहरा मैदान को इस विशाल प्रदर्शन के लिए चुना गया था। यहां पहले से ही मंच, पंडाल और बैठने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन शिक्षकों की अप्रत्याशित भीड़ के कारण यह व्यवस्था भी छोटी पड़ गई।

सुबह से ही अलग-अलग जिलों से शिक्षक बसों, निजी वाहनों और अन्य साधनों से भोपाल पहुंचने लगे थे। दोपहर तक स्थिति यह हो गई कि मैदान पूरी तरह भर गया और आसपास के रास्तों पर भी शिक्षक नजर आने लगे।

आयोजकों के अनुसार, यह अब तक का सबसे बड़ा शिक्षक प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसमें अनुमानित 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।

TET अनिवार्यता खत्म करने की मुख्य मांग

इस आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग TET (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता को समाप्त करना है। शिक्षकों का कहना है कि वे पहले से ही वर्षों से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं और उनके पास पर्याप्त अनुभव है, ऐसे में उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देना उचित नहीं है।

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने सवाल उठाया कि जब कोई शिक्षक 25 से 30 वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवा दे रहा है, तब उसके लिए अचानक TET जैसी परीक्षा को अनिवार्य करना उसके अनुभव और योग्यता का अपमान है।

अनुभवी शिक्षकों की नाराजगी

आंदोलन में शामिल अधिकांश शिक्षक वरिष्ठ हैं, जो लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों को पढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में लगाया है।

उनका मानना है कि सरकार को उनकी सेवा और अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि उन्हें नई परीक्षा प्रणाली के दायरे में लाना चाहिए।

कई शिक्षकों ने कहा कि इस तरह के नियम उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाते हैं और मानसिक दबाव बढ़ाते हैं।

50 हजार से अधिक शिक्षकों की भागीदारी का दावा

अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने दावा किया है कि इस प्रदर्शन में पूरे मध्यप्रदेश से लगभग 50 हजार से अधिक शिक्षक शामिल हुए हैं।

यह संख्या इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा केवल कुछ शिक्षकों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यभर के शिक्षकों की सामूहिक चिंता का विषय बन चुका है।

भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक इस आंदोलन में शामिल हुए।

आंदोलन का माहौल और नारेबाजी

दशहरा मैदान में सुबह से ही शिक्षकों का उत्साह देखने लायक था। हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लेकर शिक्षक अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते नजर आए।

“TET की अनिवार्यता खत्म करो”, “अनुभव का सम्मान करो”, और “शिक्षकों के साथ न्याय करो” जैसे नारे पूरे मैदान में गूंजते रहे।

मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा की तैयारी

शाम के समय प्रदर्शन को और आगे बढ़ाते हुए शिक्षकों ने मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा निकालने की घोषणा की। यह यात्रा दशहरा मैदान से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने का प्रयास करेगी।

इस यात्रा का उद्देश्य सरकार का ध्यान शिक्षकों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना और जल्द समाधान की मांग करना है।

शिक्षकों की भावनाएं और दर्द

प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि यह केवल नौकरी का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके आत्मसम्मान और वर्षों की मेहनत का सवाल है।

कई शिक्षकों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया, लेकिन अब उन्हें फिर से परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो उनके लिए मानसिक रूप से कठिन है।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि TET अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए और अनुभवी शिक्षकों को इससे छूट दी जाए।

उनका कहना है कि सरकार को एक संतुलित नीति बनानी चाहिए, जिसमें नए और पुराने दोनों प्रकार के शिक्षकों के हित सुरक्षित रहें।

प्रशासन की निगरानी और व्यवस्था

भोपाल प्रशासन ने इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए। पुलिस बल की तैनाती की गई ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

भीड़ अधिक होने के कारण ट्रैफिक व्यवस्था पर भी असर पड़ा, लेकिन प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखा।

शिक्षा नीति पर फिर शुरू हुई बहस

इस आंदोलन के बाद राज्य में शिक्षा नीति को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक पात्रता नियमों में संतुलन बनाना जरूरी है ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

कुछ लोग इस बात का समर्थन कर रहे हैं कि गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पात्रता परीक्षा जरूरी है, जबकि शिक्षक संगठन इसे अव्यावहारिक बता रहे हैं।

भविष्य में आंदोलन के और तेज होने के संकेत

शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र किया जाएगा।

आगामी दिनों में प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी प्रदर्शन और रैलियों की योजना बनाई जा सकती है।

निष्कर्ष

भोपाल में हुआ यह शिक्षक आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और नीति पर गहरी बहस का प्रतीक बन गया है।

TET की अनिवार्यता को लेकर उठी यह आवाज राज्य सरकार के लिए एक बड़ा संकेत है कि शिक्षक समुदाय अपनी मांगों को लेकर गंभीर है।

हजारों शिक्षकों की एकजुटता ने यह साफ कर दिया है कि यह मुद्दा अब केवल नीति का नहीं, बल्कि सम्मान, अनुभव और न्याय का भी है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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