MP में शिक्षकों के लिए TET फिलहाल अनिवार्य नहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक स्वेच्छा से दे सकेंगे परीक्षा
MP TET News: मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर हजारों शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण राहत की खबर सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने फिलहाल TET की अनिवार्यता में शिथिलता दी है। इसके तहत संबंधित शिक्षक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक अपनी इच्छा से शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। यानी फिलहाल उनके लिए परीक्षा देना अनिवार्य नहीं रखा गया है।
मामला विशेष रूप से उन शिक्षकों से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2005 से 2009 के बीच तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल की चयन परीक्षा के माध्यम से हुई थी। ऐसे शिक्षकों की संख्या प्रदेश में 70 हजार से अधिक बताई जा रही है। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर इन शिक्षकों की नजर टिकी हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक TET में राहत
मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से करीब तीन महीने पहले जारी आदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता में शिथिलता प्रदान की गई थी। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में मामले का अंतिम निर्णय आने तक संबंधित शिक्षकों के लिए TET को स्वैच्छिक रखा गया है।
इस व्यवस्था का अर्थ यह है कि जो शिक्षक चाहें, वे परीक्षा में शामिल हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इसे सभी संबंधित शिक्षकों के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी और उसी के अनुसार विभाग की ओर से आगामी कार्रवाई की जा सकती है।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट दिलाने के लिए मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका दायर की है। राज्य सरकार का पक्ष है कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पहले से अपनी चयन प्रक्रिया लागू थी और संबंधित शिक्षकों की नियुक्ति उसी व्यवस्था के तहत हुई थी।
इसी आधार पर सरकार चाहती है कि इन शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से राहत दी जाए। मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण सरकार ने अंतिम निर्णय आने तक संबंधित शिक्षकों को परीक्षा देने के मामले में राहत प्रदान की है।
70 हजार से अधिक शिक्षकों से जुड़ा मामला
TET को लेकर चल रहे इस विवाद का असर प्रदेश के 70 हजार से अधिक शिक्षकों पर पड़ सकता है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2005 से 2009 के बीच तत्कालीन व्यावसायिक परीक्षा मंडल की चयन परीक्षा के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी।
ये शिक्षक लंबे समय से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। TET की अनिवार्यता का प्रश्न सामने आने के बाद इन शिक्षकों के बीच अपनी सेवा और पात्रता से जुड़े नियमों को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
अब राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को उठाने और अंतिम निर्णय तक परीक्षा को स्वैच्छिक रखने से इन शिक्षकों को फिलहाल राहत मिली है।
सरकार का तर्क- मध्यप्रदेश की अपनी चयन व्यवस्था थी
राज्य सरकार की दलील का प्रमुख आधार मध्यप्रदेश में उस समय लागू शिक्षक चयन व्यवस्था है। सरकार का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका चयन तत्कालीन निर्धारित प्रक्रिया और व्यावसायिक परीक्षा मंडल की परीक्षा के माध्यम से किया गया था।
ऐसे में सरकार का मानना है कि पहले से चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्त किए गए इन शिक्षकों पर बाद में TET की अनिवार्यता लागू करने के मामले में छूट दी जानी चाहिए। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग की गई है।
फैसला सरकार के पक्ष में आया तो नहीं देनी होगी परीक्षा
यदि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय मध्यप्रदेश सरकार और संबंधित शिक्षकों के पक्ष में आता है तो इन शिक्षकों को TET देने की जरूरत नहीं पड़ सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
दूसरी ओर, अगर अदालत की ओर से TET की पात्रता को आवश्यक माना जाता है तो राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को उसी के अनुरूप आगे की प्रक्रिया तय करनी होगी। इसी वजह से फिलहाल जारी राहत को स्थायी छूट के बजाय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय तक की अंतरिम व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है।
लोक शिक्षण संचालनालय ने रखा पक्ष
मामले को लेकर लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह के मुताबिक TET की अनिवार्यता से संबंधित शिक्षकों को छूट दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दोबारा याचिका लगाई गई है।
विभाग का तर्क है कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों के चयन की अपनी व्यवस्था थी। इसी व्यवस्था के आधार पर संबंधित शिक्षकों की नियुक्तियां की गई थीं। इसलिए सरकार इन शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट दिए जाने की मांग कर रही है।
फिलहाल शिक्षक स्वेच्छा से दे सकते हैं TET
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक संबंधित शिक्षकों के पास अपनी इच्छा से TET में शामिल होने का विकल्प रहेगा। जो शिक्षक परीक्षा देना चाहते हैं, वे इसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था के तहत फिलहाल इसे अनिवार्य नहीं माना गया है।
यह राहत उन हजारों शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है जो वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और TET से जुड़े नियमों को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हजारों शिक्षकों की नजर
मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़ा यह मामला अब हजारों शिक्षकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ राज्य सरकार पुराने चयन नियमों के आधार पर छूट की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर मामले का अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट को करना है।
फिलहाल लोक शिक्षण संचालनालय की व्यवस्था से संबंधित शिक्षकों को राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत अदालत का फैसला आने तक ही प्रभावी रहने की बात कही गई है। ऐसे में प्रदेश के 70 हजार से अधिक शिक्षकों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और अंतिम फैसले पर बनी हुई है।
