MP TET Controversy: टीईटी अनिवार्यता पर बढ़ी सियासी हलचल, राहुल गांधी से मिला शिक्षक संगठन; विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग
जॉइंट टीचर फ्रंट ने राहुल गांधी के सामने रखा शिक्षकों का मुद्दा, संगठन का दावा- देशभर के करीब 25 लाख शिक्षक प्रभावित; नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने CM मोहन यादव को लिखा पत्र
भोपाल, 1 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश में वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता का मुद्दा अब राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। भोपाल जॉइंट टीचर फ्रंट के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप करने और शिक्षकों की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का आग्रह किया है।
शिक्षक संगठन का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता से बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल ने राहुल गांधी के सामने शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं और अपनी मांगों को रखते हुए इस मामले में समर्थन मांगा।
संगठन के सदस्यों के मुताबिक, राहुल गांधी ने उनकी बात सुनी और शिक्षकों के मुद्दे को उठाने का आश्वासन दिया। संगठन का दावा है कि यह मामला देशभर के करीब 25 लाख शिक्षकों से जुड़ा हुआ है।
2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों का मुद्दा
मध्य प्रदेश में वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों में चिंता बनी हुई है। जॉइंट टीचर फ्रंट के सदस्यों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अब पात्रता परीक्षा से जुड़ी शर्त को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
संगठन चाहता है कि सरकार शिक्षकों की सेवा अवधि और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस मामले में ऐसा निर्णय ले, जिससे पहले से नियुक्त शिक्षकों को राहत मिल सके।
शिक्षक प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी को अपनी मांगों से अवगत कराते हुए कहा कि यह केवल मध्य प्रदेश तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में शिक्षक इससे प्रभावित हो सकते हैं।
राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग
जॉइंट टीचर फ्रंट के सदस्यों ने राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान आग्रह किया कि वे शिक्षकों के पक्ष में आवाज उठाएं। संगठन ने टीईटी की अनिवार्यता से उत्पन्न परिस्थितियों और शिक्षकों की चिंताओं के बारे में उन्हें जानकारी दी।
संगठन के अनुसार, राहुल गांधी ने शिक्षकों की बात सुनने के बाद इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दिलाया। शिक्षक प्रतिनिधियों का दावा है कि राहुल गांधी ने देशभर के करीब 25 लाख शिक्षकों से जुड़े इस विषय पर उनके साथ खड़े होने की बात कही है।
इस मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश में टीईटी का मुद्दा राजनीतिक स्तर पर और चर्चा में आ गया है।
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखा पत्र
टीईटी विवाद के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस मामले में सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर शिक्षकों की मांगों पर विचार करने का आग्रह किया है।
सिंघार ने मांग की है कि राज्य सरकार टीईटी के मुद्दे पर मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए और शिक्षकों से जुड़े इस विषय पर चर्चा कर निर्णय ले।
उनकी मांग है कि मध्य प्रदेश में भी टीईटी की अनिवार्यता को खत्म करने की दिशा में कदम उठाया जाए। इसके लिए उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए मध्य प्रदेश सरकार से भी इसी तरह पहल करने की मांग की है।
विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग
नेता प्रतिपक्ष की ओर से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग ने मामले को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है। कांग्रेस चाहती है कि सरकार इस विषय को लेकर विधानसभा में चर्चा कराए और प्रभावित शिक्षकों के हित में समाधान निकाले।
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि शिक्षकों की चिंताओं को देखते हुए सरकार इस विषय पर जल्द निर्णय ले। विशेष सत्र बुलाने की मांग के साथ ही यह मुद्दा अब शिक्षक संगठनों के आंदोलन से आगे बढ़कर सत्ता और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का विषय बनता दिखाई दे रहा है।
शिक्षक संगठनों को सरकार से राहत की उम्मीद
टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठन सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं। संगठनों का तर्क है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के मामले को अलग दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए और उनकी लंबी सेवा अवधि को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाना चाहिए।
जॉइंट टीचर फ्रंट ने अपनी मांग को राष्ट्रीय राजनीतिक नेतृत्व तक पहुंचाकर दबाव बढ़ाने का प्रयास किया है। राहुल गांधी से हुई मुलाकात को भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि वे चाहते हैं कि इस विषय पर स्पष्ट नीति सामने आए, जिससे प्रभावित शिक्षकों में बनी अनिश्चितता समाप्त हो सके।
अब सरकार के रुख पर टिकी नजर
राहुल गांधी से शिक्षक संगठन की मुलाकात और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने के बाद अब सभी की नजर मध्य प्रदेश सरकार के अगले कदम पर है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने या टीईटी की अनिवार्यता में बदलाव को लेकर राज्य सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार शिक्षक संगठनों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है। वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर उठाना शुरू कर दिया है, जिससे टीईटी का मामला मध्य प्रदेश की राजनीति और शिक्षक संगठनों के बीच प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
