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MP TET: 70 हजार शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाने फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा स्कूल शिक्षा विभाग, नई याचिका की तैयारी

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Published On: 6 July 2026
MP TET: 70 हजार शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाने फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा स्कूल शिक्षा विभाग, नई याचिका की तैयारी

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MP TET: 70 हजार शिक्षकों को टीईटी से राहत दिलाने फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा स्कूल शिक्षा विभाग, नई याचिका की तैयारी

MP TET : मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से राहत दिलाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। विभाग का मानना है कि वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों ने उस समय निर्धारित शासकीय चयन प्रक्रिया और भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण कर सेवा प्राप्त की थी। ऐसे में वर्षों से सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों को दोबारा टीईटी परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न्यायोचित नहीं है।

नई कानूनी रणनीति पर काम शुरू

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग ने विधि विभाग और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी राय लेना शुरू कर दिया है। विभाग सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है ताकि एक मजबूत आधार के साथ नई याचिका दायर की जा सके।

यदि कानूनी सलाह अनुकूल रहती है तो अगले सप्ताह तक सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल की जा सकती है। विभाग का प्रयास है कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत दिलाई जा सके।

सुप्रीम कोर्ट पहले ही टीईटी को अनिवार्य ठहरा चुका है

हालांकि यह मामला पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। सितंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि संबंधित शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने अप्रैल 2026 में आदेश जारी करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के संबंधित शिक्षकों के लिए टीईटी आयोजित कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षक होंगे प्रभावित

डीपीआई के निर्देशों के अनुसार वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग के सभी शिक्षकों को जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित होने वाली टीईटी परीक्षा में शामिल होना होगा।

इस आदेश से प्रदेशभर के लगभग 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है जो वर्षों से शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं।

2005 से 2009 में नियुक्त शिक्षकों को राहत दिलाने की कोशिश

स्कूल शिक्षा विभाग विशेष रूप से वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त लगभग 70 हजार शिक्षकों को राहत दिलाने का प्रयास कर रहा है। विभाग का तर्क है कि इन शिक्षकों का चयन उस समय लागू शासकीय भर्ती प्रक्रिया के तहत हुआ था और उन्होंने निर्धारित चयन परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद नियुक्ति प्राप्त की थी।

ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना व्यावहारिक और न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

शिक्षक संगठनों का लगातार विरोध

टीईटी को अनिवार्य किए जाने के निर्णय का प्रदेशभर के विभिन्न शिक्षक संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पुनः पात्रता परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।

शिक्षक संगठनों का तर्क है कि इन शिक्षकों ने नियमानुसार भर्ती प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति प्राप्त की थी और वर्षों से विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसलिए उनके अनुभव और पूर्व चयन प्रक्रिया को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

सरकार की अगली रणनीति पर सबकी नजर

अब पूरे मामले में सभी की निगाहें स्कूल शिक्षा विभाग की अगली कानूनी रणनीति पर टिकी हैं। यदि विभाग नई याचिका दायर करता है तो सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई कर सकता है।

इस याचिका का फैसला प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। यदि विभाग को राहत मिलती है तो वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हजारों शिक्षकों को टीईटी से छूट मिल सकती है। वहीं यदि पूर्व आदेश यथावत रहता है तो संबंधित शिक्षकों को निर्धारित समय के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 70 हजार शिक्षकों को राहत दिलाने की तैयारी।
  • स्कूल शिक्षा विभाग फिर जाएगा सुप्रीम कोर्ट।
  • विधि विभाग और वरिष्ठ अधिवक्ताओं से ली जा रही कानूनी राय।
  • सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी किया था अनिवार्य।
  • अप्रैल 2026 में डीपीआई ने जारी किए थे निर्देश।
  • 1998 से 2009 के बीच नियुक्त करीब 1.5 लाख शिक्षक होंगे प्रभावित।
  • जुलाई-अगस्त 2026 में प्रस्तावित है टीईटी परीक्षा।
  • शिक्षक संगठन लगातार कर रहे हैं विरोध।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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