TET परीक्षा विरोध: पूर्व विधायक और शिक्षक संगठन एकजुट, आज भोपाल में प्रदर्शन
मध्य प्रदेश में टीईटी (TET) परीक्षा को लेकर शिक्षक समाज में असंतोष गहरा गया है। पूर्व भाजपा विधायक मुरलीधर पाटीदार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को पत्र लिखकर शिक्षकों की शिकायतों को सरकार तक पहुंचाया है। पाटीदार ने पत्र में कहा कि 25 साल से अधिक समय तक प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सेवा दे रहे शिक्षक, जिन्हें लंबे अनुभव और समर्पण के बाद नियुक्ति मिली है, उन्हें सेवानिवृत्ति से पहले परीक्षा देने के आदेश के कारण असुरक्षित और हतप्रभ महसूस हो रहा है।
शिक्षक संगठनों का विरोध और ज्ञापन
प्रदेशभर में शिक्षक संगठन आज प्रदर्शन करेंगे और अपने ज्ञापन कलेक्टर कार्यालय को सौंपेंगे। मध्य प्रदेश शासकीय शिक्षक संगठन के आह्वान पर यह प्रदर्शन किया जा रहा है। संगठन ने मांग की है कि टीईटी परीक्षा से जुड़े आदेश को रद्द किया जाए और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम का पालन करते हुए उचित कदम उठाए जाएं।
राजधानी भोपाल में प्रदर्शन शाम 4 बजे कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान शिक्षक अपनी समस्याएं और मांगें अधिकारियों के सामने रखेंगे। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय के 2 मार्च 2026 के आदेश में प्रदेश के लाखों शिक्षकों को टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने का निर्देश दिया गया है, जिससे व्यापक असंतोष पैदा हुआ है।
पूर्व विधायक का पत्र और चेतावनी
सुसनेर से पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार ने पत्र में कहा कि शिक्षा क्षेत्र में वर्षों से समर्पण भाव के साथ कार्य कर रहे शिक्षक समाज के लिए यह आदेश अपमानजनक और असामयिक है। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया कि आदेश को निरस्त किया जाए और शिक्षकों को किसी प्रकार की अपमानजनक प्रक्रिया से गुजरने न दिया जाए।
पाटीदार ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो शिक्षक संगठन और वे स्वयं शिक्षक आंदोलन का समर्थन करेंगे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह कदम शिक्षक समाज की सुरक्षा और सम्मान के लिए आवश्यक है।
आदेश के प्रभाव और शिक्षक असंतोष
आदेश के कारण प्रदेश के शिक्षक समाज में व्यापक असंतोष और चिंता व्याप्त है। शिक्षक महसूस कर रहे हैं कि इतने लंबे अनुभव और सेवा के बावजूद उन्हें खुद को फिर से साबित करना होगा। इससे शिक्षक समाज के साथी असुरक्षित और परेशान महसूस कर रहे हैं, और आंदोलन की ओर अग्रसर हैं।
पूर्व विधायक और शिक्षक संगठन का मानना है कि आदेश शिक्षकों के मनोबल को कमजोर कर रहा है और शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
शासन से अपेक्षाएं
शिक्षक संगठन और पूर्व विधायक सरकार से अपेक्षा कर रहे हैं कि:
- टीईटी परीक्षा आदेश को तत्काल रद्द किया जाए।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- शिक्षक समाज को किसी भी अपमानजनक या अनावश्यक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े।
- शिक्षकों के अनुभव और सेवा को मान्यता देते हुए संवैधानिक और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए।
प्रदर्शन और आंदोलन
आज भोपाल के साथ-साथ कई जिला मुख्यालयों में शिक्षक संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपा जाएगा और सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की जाएगी।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन और व्यापक प्रदर्शन की योजना बनाई जाएगी। यह कदम शिक्षक समाज की आवाज को मजबूती से उठाने और सरकार को चेतावनी देने के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष
टीईटी परीक्षा को लेकर मध्य प्रदेश में शिक्षक समाज में असंतोष बढ़ रहा है। पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार और शिक्षक संगठन इस मामले में एकजुट होकर सरकार को अपने ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दे रहे हैं। शिक्षक चाहते हैं कि उनके वर्षों के अनुभव और समर्पण का सम्मान किया जाए और किसी भी प्रकार की अपमानजनक परीक्षा प्रक्रिया से बचाया जाए।
आज भोपाल और अन्य जिलों में आयोजित प्रदर्शन इस आंदोलन की दिशा और शिक्षक समाज की एकजुटता को दर्शाता है। सरकार अब यह तय करेगी कि शिक्षक संगठनों की मांगों पर किस प्रकार सकारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
