MP Teachers Protest: 16 दिन बाद खत्म हुआ चयनित शिक्षकों का आंदोलन
MP Teachers Protest: मध्य प्रदेश में चयनित शिक्षकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर पिछले 16 दिनों से चलाया जा रहा प्रदर्शन आखिरकार शिक्षक दिवस के मौके पर समाप्त हो गया। 5 सितंबर को आंदोलनकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अपील के बाद अपना आंदोलन खत्म करने का निर्णय लिया। लंबे समय से चल रहे इस प्रदर्शन के कारण शिक्षा विभाग और सरकार के सामने शिक्षकों की मांगों को लेकर दबाव बना हुआ था।
आंदोलन कर रहे चयनित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पदों की संख्या बढ़ाने और रिक्त पदों पर नियुक्ति का अवसर देने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली हैं, ऐसे में योग्य और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति का लाभ मिलना चाहिए।
दिग्विजय सिंह की अपील के बाद आंदोलन समाप्त
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपना प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि आंदोलनकारी शांत नहीं होंगे तो वह वहां से चले जाएंगे। इसके बाद आंदोलनकारियों ने उनकी अपील को स्वीकार करते हुए अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आंदोलन समाप्त होने से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद चयनित शिक्षकों के बीच भी हलचल देखने को मिली। हालांकि, शिक्षकों की मांगों और सरकार की ओर से आगे उठाए जाने वाले कदमों को लेकर अब उनकी नजरें स्कूल शिक्षा विभाग पर टिकी हैं।
पुरानी भर्ती में नहीं बढ़ाए जा सकते नए पद
मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के मुताबिक किसी भर्ती का परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उस भर्ती के विज्ञापित पदों की संख्या में बढ़ोतरी या कमी नहीं की जा सकती।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद सामने आने वाले नए रिक्त पदों को पुरानी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना नियमों के अनुरूप नहीं है। इन रिक्त पदों को भविष्य में जारी होने वाली नई भर्ती के विज्ञापन में शामिल किया जा सकता है।
यही मुद्दा चयनित शिक्षकों के आंदोलन का एक प्रमुख कारण था। अभ्यर्थी उच्च माध्यमिक शिक्षक, माध्यमिक शिक्षक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे थे। विभाग ने वैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि पुरानी भर्ती में नए पद जोड़ना संभव नहीं है।
प्रदेश में 72,901 पद रिक्त
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश में विभिन्न श्रेणियों के कुल 72,901 पद रिक्त हैं। इनमें से बड़ी संख्या पदोन्नति से संबंधित पदों की है। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 59,073 पद पदोन्नति से जुड़े हुए हैं।
पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर भी लंबे समय से स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है। विभाग ने बताया कि पदोन्नति के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्टैंडिंग काउंसिल से राय ली गई है। इसमें TET उत्तीर्ण शिक्षकों को पदोन्नति देने का अभिमत सामने आया है।
इसके चलते पदोन्नति की प्रक्रिया फिलहाल लंबित है। विभाग का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी होने के बाद खाली होने वाले पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी।
OBC और बैकलॉग के पद भी शामिल
रिक्त पदों में आरक्षित श्रेणियों के पद भी शामिल हैं। विभाग के अनुसार करीब 3,990 पद OBC के 13 प्रतिशत होल्ड में हैं, जबकि 8,038 पद बैकलॉग के बताए गए हैं।
पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वास्तविक रूप से सीधी भर्ती के लिए उपलब्ध होने वाले पदों की स्थिति और स्पष्ट होगी। इसके बाद विभाग नई भर्ती के माध्यम से रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
चयनित शिक्षकों की मांगों पर आगे की उम्मीद
16 दिन तक चले आंदोलन के समाप्त होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि चयनित शिक्षकों की मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। विभाग ने पुरानी भर्ती में पद बढ़ाने से संबंधित नियम स्पष्ट कर दिए हैं, लेकिन भविष्य में नई भर्ती के माध्यम से रिक्त पदों को भरने का रास्ता खुला हुआ है।
शिक्षकों और अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को जल्द भरने के लिए सरकार नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी। इससे लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सकता है।
फिलहाल शिक्षक दिवस पर आंदोलन समाप्त होने के साथ प्रदर्शन का एक चरण खत्म हो गया है। अब चयनित शिक्षकों की नजर सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर रहेगी। रिक्त पदों, पदोन्नति प्रक्रिया और नई भर्ती को लेकर आने वाले निर्णय प्रदेश के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
