MP में शिक्षकों के ई-अटेंडेंस नियम में बदलाव, तकनीकी समस्या से उपस्थिति दर्ज न होने पर नहीं रुकेगा वेतन
ऑनलाइन उपस्थिति नहीं लगने को सीधे अनुपस्थिति नहीं माना जाएगा; शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों को मिली राहत
भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में ई-अटेंडेंस दर्ज करने में आ रही तकनीकी समस्याओं के बीच शिक्षकों और अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। अब केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाने के आधार पर शिक्षक को अनुपस्थित मानकर उसका वेतन या मानदेय नहीं रोका जाएगा। वास्तविक उपस्थिति की जांच करने के बाद ही वेतन से संबंधित कोई कार्रवाई की जा सकेगी।
ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के कई जिलों से मोबाइल एप्लीकेशन, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सर्वर और लोकेशन से संबंधित समस्याओं की शिकायतें सामने आ रही थीं। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने के कारण शिक्षक स्कूल पहुंचने के बाद भी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे थे। ऐसे मामलों में वेतन रुकने की आशंका से शिक्षकों में नाराजगी थी।
नए निर्देशों से स्पष्ट किया गया है कि तकनीकी कारण से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने को शिक्षक की वास्तविक अनुपस्थिति का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाएगा।
ई-अटेंडेंस नहीं लगने पर सीधे नहीं कटेगा वेतन
नए निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि किसी शिक्षक या अतिथि शिक्षक की ई-अटेंडेंस नहीं लगने पर उसका वेतन स्वतः नहीं काटा जाएगा। संबंधित अधिकारी को यह जांच करनी होगी कि कर्मचारी वास्तव में विद्यालय में उपस्थित था या नहीं।
यदि शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचा था, लेकिन नेटवर्क, सर्वर, मोबाइल एप या किसी दूसरी तकनीकी समस्या के कारण उसकी डिजिटल उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी तो उसका वेतन रोकना उचित नहीं होगा। ऐसे मामलों में विद्यालय में उपलब्ध उपस्थिति रिकॉर्ड और अन्य प्रमाणों के आधार पर स्थिति का सत्यापन किया जा सकता है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। शिक्षकों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास करना होगा। नया नियम केवल वास्तविक तकनीकी समस्या के कारण प्रभावित कर्मचारियों को अनुचित वेतन कटौती से बचाने के लिए है।
शिक्षकों ने बताई थीं कई तकनीकी परेशानियां
शिक्षकों का कहना था कि कई विद्यालय ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क बहुत कमजोर है। कुछ स्कूलों में इंटरनेट सेवा उपलब्ध नहीं रहती, जबकि कई बार एप का सर्वर काम नहीं करता। इसके अतिरिक्त चेहरे की पहचान, लोकेशन सत्यापन और मोबाइल की तकनीकी क्षमता से जुड़ी परेशानियां भी सामने आई हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पूर्व में प्रस्तुत एक याचिका में भी शिक्षकों ने ‘हमारे शिक्षक’ एप के माध्यम से ई-अटेंडेंस लगाने में नेटवर्क, सर्वर और फेस रिकग्निशन से संबंधित कठिनाइयों का उल्लेख किया था। याचिका में दावा किया गया था कि तकनीकी समस्या के बावजूद कर्मचारियों को वेतन कटौती की चेतावनी दी जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों ने यह भी कहा था कि खराब नेटवर्क के कारण उन्हें स्कूल परिसर में मौजूद रहने के बावजूद उपस्थिति दर्ज करने के लिए काफी समय तक प्रयास करना पड़ता है। कभी-कभी एप खुलने या निर्धारित लोकेशन स्वीकार करने में भी परेशानी आती है।
अतिथि शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ
इस निर्देश से नियमित शिक्षकों के साथ अतिथि शिक्षकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। अतिथि शिक्षकों का मानदेय उपस्थिति और कार्य दिवसों के आधार पर तैयार किया जाता है। ऐसे में ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर मानदेय अटकने की आशंका अधिक रहती थी।
यदि अतिथि शिक्षक ने विद्यालय में उपस्थित होकर अध्यापन कार्य किया है, लेकिन तकनीकी कारण से उसकी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हुई तो केवल इसी आधार पर उसका मानदेय नहीं रोका जाएगा। विद्यालय प्रमुख और संबंधित अधिकारी को वास्तविक उपस्थिति के रिकॉर्ड की जांच करनी होगी।
प्रदेश के कई हिस्सों में अतिथि शिक्षकों ने मानदेय भुगतान में देरी और ई-अटेंडेंस संबंधी समस्याओं की शिकायत की थी। नए निर्देश के बाद उनके लंबित मानदेय के मामलों का भी वास्तविक उपस्थिति के आधार पर समाधान होने की उम्मीद है।
ई-अटेंडेंस व्यवस्था क्यों लागू की गई?
स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू की गई है। इसके माध्यम से शिक्षक मोबाइल एप पर अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए विभाग को स्कूलों में उपस्थित कर्मचारियों की जानकारी मिलती है।
सरकार का उद्देश्य शिक्षकों की नियमितता सुनिश्चित करने के साथ विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। लेकिन तकनीकी सुविधाओं की असमान उपलब्धता के कारण इस व्यवस्था को लागू करने में व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं।
शिक्षकों का कहना है कि ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले प्रत्येक विद्यालय में मजबूत इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी सहायता और वैकल्पिक उपस्थिति व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
वास्तविक अनुपस्थिति पर हो सकेगी कार्रवाई
नई व्यवस्था तकनीकी कारण से उपस्थिति दर्ज नहीं होने वाले शिक्षकों को राहत देती है, लेकिन बिना अनुमति विद्यालय से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। यदि जांच में कोई शिक्षक वास्तव में अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इसलिए विद्यालय प्रमुखों को उपस्थित कर्मचारियों का वैकल्पिक रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखना होगा। तकनीकी खराबी होने की स्थिति में उसकी सूचना समय पर संबंधित अधिकारी को देना भी जरूरी होगा। इससे बाद में उपस्थिति और वेतन को लेकर विवाद की स्थिति से बचा जा सकेगा।
तकनीकी समस्या का स्थायी समाधान जरूरी
शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे पारदर्शी उपस्थिति व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं, लेकिन तकनीकी खामी का नुकसान कर्मचारियों को नहीं होना चाहिए। इंटरनेट और एप में सुधार करने के साथ शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी सहायता प्रणाली बनाई जानी चाहिए।
ई-अटेंडेंस से संबंधित समस्या सामने आने पर शिक्षक को स्पष्ट प्रक्रिया के माध्यम से अपनी वास्तविक उपस्थिति प्रमाणित करने का अवसर मिलना चाहिए। विभागीय निर्देश से फिलहाल शिक्षकों को राहत मिली है, लेकिन व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए तकनीकी ढांचे को मजबूत करना भी आवश्यक होगा।
