भोपाल में TET के विरोध में शिक्षकों का धरना जारी, बोले—आवेदन की तारीख बढ़ने से नहीं बदलेगा बहिष्कार का फैसला
भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET की अनिवार्यता समाप्त करने सहित तीन सूत्रीय मांगों को लेकर शिक्षकों का आंदोलन जारी है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के आह्वान पर राजधानी के नीलम पार्क में आयोजित अनिश्चितकालीन धरना 13वें दिन भी जारी रहा। भोपाल संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षकों ने क्रमिक भूख हड़ताल में भाग लेकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। आंदोलन में शामिल शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि आवेदन की तारीख बढ़ाए जाने से परीक्षा के बहिष्कार का उनका निर्णय नहीं बदलेगा।
नीलम पार्क में जुटे भोपाल संभाग के शिक्षक
राजधानी का नीलम पार्क शिक्षकों के इस आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। यहां अनिश्चितकालीन धरने के साथ क्रमिक भूख हड़ताल भी चल रही है। आंदोलन के 13वें दिन भोपाल संभाग के विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों ने इसमें सहभागिता की। उन्होंने संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा।
धरने में पहुंचे शिक्षकों का विरोध TET की अनिवार्यता को लेकर है। इसके साथ आंदोलन में तीन सूत्रीय मांगों का उल्लेख किया गया है। उपलब्ध विवरण में TET की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग स्पष्ट है, जबकि शेष दो मांगों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया है।
तारीख बढ़ाने से बहिष्कार का निर्णय नहीं बदलेगा
आंदोलन में शामिल भोपाल संभाग के शिक्षकों ने आवेदन की समय-सीमा और परीक्षा के विरोध को अलग विषय बताया है। उनका कहना है कि आवेदन करने की तारीख बढ़ने से परीक्षा के बहिष्कार का फैसला नहीं बदलेगा। उन्होंने साफ किया कि उनका विरोध केवल आवेदन के लिए उपलब्ध समय को लेकर नहीं है।
शिक्षकों के इस रुख से स्पष्ट है कि वे TET की अनिवार्यता के सवाल पर अपनी मांग रख रहे हैं। उनके अनुसार, आवेदन की समय-सीमा बढ़ाना उस मुद्दे का समाधान नहीं है, जिसके विरोध में वे धरने और क्रमिक भूख हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। इसलिए तारीख में बदलाव के बावजूद उनका घोषित निर्णय यथावत है।
TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त करना आंदोलन की प्रमुख मांग है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर जुटे शिक्षक इसी मुद्दे सहित तीन सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध जता रहे हैं। नीलम पार्क में धरने के माध्यम से वे सरकार तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।
इस आंदोलन की खबर में शिक्षकों की मांग और वर्तमान नियमों के बीच अंतर समझना जरूरी है। TET की अनिवार्यता खत्म करने की बात आंदोलनकारियों की मांग है। उपलब्ध सामग्री में ऐसा कोई सरकारी आदेश नहीं दिया गया है, जिससे अनिवार्यता समाप्त होने की पुष्टि होती हो। फिलहाल खबर का केंद्र शिक्षकों का विरोध और उनकी घोषित मांग है।
धरने के साथ क्रमिक भूख हड़ताल
शिक्षकों ने विरोध के लिए अनिश्चितकालीन धरने के साथ क्रमिक भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया है। भोपाल संभाग के विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षकों ने भूख हड़ताल में शामिल होकर आंदोलन का समर्थन किया। इस तरह धरना स्थल पर विरोध की दोनों गतिविधियां साथ चल रही हैं।
अनिश्चितकालीन धरने के 13वें दिन भी जारी रहने से यह स्पष्ट है कि आंदोलन लगातार चल रहा है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में प्रतिदिन शामिल होने वाले शिक्षकों की संख्या, भूख हड़ताल की समय-सारिणी अथवा आगामी दिनों के कार्यक्रमों की जानकारी नहीं दी गई है। किसी नए प्रदर्शन या अन्य कार्रवाई की घोषणा का भी उल्लेख नहीं है।
संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आंदोलन
इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश ने किया है। शिक्षकों ने संयुक्त मोर्चा के माध्यम से तीन सूत्रीय मांगों को लेकर अपनी आवाज उठाई है। भोपाल संभाग के जिलों से आई सहभागिता ने धरने में अलग-अलग क्षेत्रों के शिक्षकों की मौजूदगी दर्ज कराई।
आंदोलन का घोषित स्वरूप धरना और क्रमिक भूख हड़ताल है। उपलब्ध जानकारी में स्कूलों के संचालन, शिक्षण कार्य पर प्रभाव अथवा सभी शिक्षकों की सहभागिता का विवरण नहीं है। इसलिए धरने में मौजूद शिक्षकों के रुख को ही इस खबर में प्रस्तुत किया गया है।
मांग और सरकारी निर्णय पर टिकी स्थिति
आंदोलनकारियों ने आवेदन की तारीख बढ़ने के बावजूद बहिष्कार का निर्णय नहीं बदलने की बात दोहराई है। उनका मुख्य आग्रह TET की अनिवार्यता समाप्त करने से संबंधित है। इस कारण आवेदन प्रक्रिया में समय बढ़ने और उनकी मांग पर निर्णय होने को एक समान नहीं माना जा सकता।
उपलब्ध समाचार विवरण में सरकार या संबंधित विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। शिक्षकों से किसी औपचारिक वार्ता, मांगों पर सहमति या आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की जानकारी भी नहीं दी गई है। फिलहाल नीलम पार्क में धरना और क्रमिक भूख हड़ताल जारी है तथा आंदोलन में शामिल शिक्षक अपने घोषित रुख पर कायम हैं।
