MP Teacher Bharti 2025: हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोबारा बनेगी मेरिट, 9693 अभ्यर्थियों की अपील खारिज
MP Teacher Bharti 2025: मध्यप्रदेश प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 से जुड़ा 5 प्रतिशत बोनस अंक विवाद अब एक बार फिर चर्चा में है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने गलत तरीके से बोनस अंक हासिल करने वाले 9,693 अभ्यर्थियों की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि गलत जानकारी के आधार पर प्राप्त बोनस अंकों को वैध लाभ के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद प्राथमिक शिक्षक भर्ती की मेरिट सूची दोबारा तैयार किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में कुल 13,089 पदों पर चयन की प्रक्रिया हुई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहले तैयार की गई मेरिट और चयन सूची की दोबारा समीक्षा की जाएगी। जिन अभ्यर्थियों ने RCI योग्यता के आधार पर 5 प्रतिशत बोनस अंक का लाभ लिया था, उनके प्रमाणपत्रों और पात्रता की जांच की जाएगी। सत्यापन में अपात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त किए जाएंगे और इसके बाद संशोधित मेरिट सूची तैयार की जाएगी।
क्या है 5 प्रतिशत बोनस अंक का पूरा मामला?
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा 2025 के नियमों के तहत RCI से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा डिप्लोमा रखने वाले पात्र अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत बोनस अंक दिए जाने का प्रावधान था। विवाद तब सामने आया जब बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन प्रक्रिया के दौरान खुद को इस योग्यता के लिए पात्र बताया और बोनस अंक प्राप्त कर लिए।
मामले में सामने आए आंकड़ों के अनुसार करीब 14,964 अभ्यर्थियों ने RCI योग्यता का दावा किया था, जबकि RCI के रिकॉर्ड के आधार पर लगभग 5,271 अभ्यर्थी ही इस योग्यता के लिए पात्र बताए गए। इसी अंतर को लेकर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे और मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
ऑनलाइन फॉर्म में ‘हां’ चुनने पर मिले बोनस अंक
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में RCI योग्यता से जुड़े विकल्प के सामने ‘हां’ चुनने पर अभ्यर्थियों को 5 प्रतिशत बोनस अंक मिल गए थे। आवेदन के उस चरण पर संबंधित प्रमाणपत्रों का तत्काल सत्यापन नहीं किया गया था।
कुछ अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि ऑनलाइन फॉर्म भरते समय RCI योग्यता के सामने गलती से ‘हां’ का विकल्प चुन लिया गया था। उनका कहना था कि यदि बोनस अंक हटा दिए जाएं तो भी उनके वास्तविक परीक्षा अंकों के आधार पर उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
हालांकि, अदालत ने इस दलील को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि अभ्यर्थियों को आवेदन में अपनी जानकारी सुधारने के लिए तीन अवसर उपलब्ध कराए गए थे। इसके बावजूद संबंधित जानकारी को ठीक नहीं किया गया।
6 मई के सिंगल बेंच के आदेश पर डबल बेंच की मुहर
मामले में सिंगल बेंच ने 6 मई 2026 को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया था। अदालत ने चयन सूची को कर्मचारी चयन मंडल के पास वापस भेजने और RCI योग्यता का दावा करने वाले अभ्यर्थियों को अपनी पात्रता साबित करने का अवसर देने के निर्देश दिए थे।
इसके तहत अभ्यर्थियों को RCI से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा संबंधी डीएलएड डिप्लोमा के दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाना था। दस्तावेजों की जांच के बाद पात्रता सही पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को प्रक्रिया में बनाए रखने और अपात्र पाए जाने वालों के आवेदन निरस्त करने के निर्देश दिए गए थे।
अब डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इससे भर्ती प्रक्रिया में संशोधित मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
9,693 अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर?
हाईकोर्ट में 9,693 ऐसे अभ्यर्थियों की अपील पर सुनवाई हुई, जिनके बोनस अंक की पात्रता विवादित थी। अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी है। इसका सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है, जिन्होंने गलत या अप्रमाणित RCI योग्यता के आधार पर अतिरिक्त अंक प्राप्त किए थे।
इन अभ्यर्थियों की पात्रता अब दस्तावेज सत्यापन के जरिए निर्धारित की जाएगी। यदि संबंधित अभ्यर्थी निर्धारित योग्यता साबित नहीं कर पाते हैं तो उनके बोनस अंक हटाए जा सकते हैं और नियमानुसार उनकी अभ्यर्थिता पर भी कार्रवाई हो सकती है।
दूसरी ओर, उन उम्मीदवारों के लिए नई मेरिट सूची महत्वपूर्ण होगी, जिन्हें बोनस अंक नहीं मिलने के कारण पहले चयन नहीं मिल पाया था। संशोधित अंकों और पात्रता के आधार पर उनका स्थान मेरिट सूची में बदल सकता है।
कर्मचारी चयन मंडल करेगा प्रमाणपत्रों की जांच
अब MP कर्मचारी चयन मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। मंडल RCI योग्यता का दावा करने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों और संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन करेगा। सत्यापन के दौरान पात्र पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार लाभ मिलेगा।
वहीं, जिन अभ्यर्थियों की योग्यता रिकॉर्ड में सही नहीं पाई जाएगी, उनके आवेदन निरस्त किए जा सकते हैं। इसके बाद संशोधित मेरिट सूची तैयार कर शिक्षक भर्ती की आगे की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
भर्ती नियमों में भी बोनस अंक से संबंधित जानकारी को लेकर स्पष्ट प्रावधान है कि यदि बोनस अंक के लिए प्रस्तुत जानकारी या दस्तावेज गलत पाए जाते हैं, तो अभ्यर्थिता किसी भी स्तर पर समाप्त की जा सकती है।
अभ्यर्थियों ने मांगी थी राहत
अपील करने वाले अभ्यर्थियों ने अदालत के सामने अपनी स्थिति रखते हुए कहा था कि उनके पास RCI डिप्लोमा नहीं है और आवेदन भरते समय गलती से ‘हां’ का विकल्प चुन लिया गया था। उनका आग्रह था कि गलत तरीके से मिले बोनस अंक हटा दिए जाएं, लेकिन उनके वास्तविक परीक्षा अंकों के आधार पर उन्हें चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
कुछ अभ्यर्थियों ने दिव्यांग श्रेणी से जुड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए भी राहत की मांग की। हालांकि, अदालत ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया कि रिजल्ट आने के बाद गलती का हवाला देकर बोनस अंक के कारण मिले लाभ को बरकरार रखा जाए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
डबल बेंच का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि अभ्यर्थियों को आवेदन में गलत जानकारी सुधारने के पर्याप्त अवसर मिले थे। यदि निर्धारित समय के दौरान जानकारी नहीं सुधारी गई और बाद में उसी गलत जानकारी के आधार पर बोनस अंक लेकर मेरिट में लाभ प्राप्त किया गया, तो उस लाभ को अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता।
अदालत के रुख का असर अब पूरी भर्ती प्रक्रिया पर पड़ना तय है। 13,089 प्राथमिक शिक्षक पदों से जुड़ी चयन प्रक्रिया में संशोधित मेरिट सूची तैयार होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन अभ्यर्थियों का चयन बरकरार रहता है और किनके स्थान पर दूसरे पात्र उम्मीदवारों को मौका मिल सकता है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर कर्मचारी चयन मंडल की अगली कार्रवाई पर है। RCI प्रमाणपत्रों के सत्यापन और पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों की पहचान के बाद संशोधित मेरिट सूची तैयार की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया से पहले चयनित अभ्यर्थियों में भी असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि नए उम्मीदवारों को संशोधित मेरिट में अवसर मिलने की उम्मीद है। ऐसे में MP Teacher Bharti 2025 के लिए आने वाली नई मेरिट सूची हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।
