अतिक्रमणकारियों और खनन माफिया से निपटने वन अमले की पुलिस के साथ होगी संयुक्त ट्रेनिंग, बुरहानपुर की घटना से लिया सबक — दैनिक स्वराज वाणी
भोपाल। मध्य प्रदेश में जंगलों की सुरक्षा और वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण तथा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों को पुलिस के साथ संयुक्त प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य वन अमले को अतिक्रमणकारियों, शिकारियों, लकड़ी चोरों और खनन व रेत माफिया से जुड़े मामलों में आने वाली मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करना है। हाल के दिनों में वन विभाग की टीमों पर हुए हमलों के बाद इस तरह के प्रशिक्षण की जरूरत महसूस की गई है।
आत्मरक्षा और दंगा नियंत्रण का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में वन विभाग के फ्रंटलाइन स्टाफ—जैसे वनरक्षक और डिप्टी रेंजर—को आत्मरक्षा, दंगा नियंत्रण और विपरीत परिस्थितियों में काम करने के तरीके सिखाए जाएंगे। वन अमले को कई बार अतिक्रमण हटाने, अवैध उत्खनन रोकने या वन क्षेत्र में कार्रवाई करने के दौरान विरोध का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में टीम के सदस्यों की सुरक्षा और कार्रवाई को कानून के दायरे में आगे बढ़ाना चुनौती बन जाता है।
पुलिस के साथ संयुक्त प्रशिक्षण से वनकर्मियों को ऐसे हालात में बेहतर तालमेल के साथ काम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे वे तनावपूर्ण स्थिति में अपनी और टीम की सुरक्षा पर ध्यान दे सकेंगे तथा जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ समन्वय कर सकेंगे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रशिक्षण की तारीख, स्थान, अवधि और इसमें शामिल होने वाले कर्मचारियों की संख्या का विस्तृत कार्यक्रम नहीं दिया गया है।
कई जिलों में टीमों पर हमलों की घटनाएं
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अतिक्रमण हटाने और अवैध उत्खनन रोकने पहुंची वन विभाग की टीमों पर पथराव और हमले की घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सागर, खंडवा, ग्वालियर और श्योपुर सहित कई जिलों में ऐसे मामले हुए। मुरैना में खनन माफिया से जुड़े हमले तथा खंडवा और बुरहानपुर में अतिक्रमणकारियों के हमलों का भी उल्लेख किया गया है। इन घटनाओं ने मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंता बढ़ाई है।
वनकर्मियों को जंगलों और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्रवाई करनी पड़ती है। वहां अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों से सामना होने पर स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। ऐसे में केवल विभागीय कार्रवाई की जानकारी पर्याप्त नहीं होती; कर्मचारियों को संकट के समय खुद को सुरक्षित रखने और दूसरे विभागों के साथ तालमेल बनाने का प्रशिक्षण भी जरूरी होता है। संयुक्त अभ्यास इसी तैयारी का हिस्सा होगा।
वन भूमि पर अतिक्रमण भी बड़ी चुनौती
वन क्षेत्रों में अतिक्रमण और शिकार गिरोहों की गतिविधियां विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। रिपोर्ट में वर्ष 2025 के दौरान 7,02,167 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण पाए जाने का आंकड़ा दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वन भूमि पर खेती के लिए कब्जे के प्रयास लगातार हो रहे हैं। इतने बड़े क्षेत्र से जुड़ी समस्या का सामना करने के लिए नियमित निगरानी के साथ-साथ मैदानी अमले की सुरक्षा और कार्रवाई की क्षमता मजबूत करना भी जरूरी माना जा रहा है।
वन भूमि पर कब्जे का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं रहता। इससे जंगलों के संरक्षण, वन्यजीवों के आवास और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर भी दबाव पड़ता है। इसी तरह अवैध खनन और लकड़ी चोरी जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जब विभागीय टीमें मौके पर पहुंचती हैं, तो उन्हें कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार का उद्देश्य वन अमले को मजबूत करना
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अमित दुबे के अनुसार, पुलिस के साथ प्रशिक्षण से वन अमले को अतिक्रमणकारियों और खनन माफिया से निपटने के लिए अधिक सक्षम बनाया जाएगा। संयुक्त प्रशिक्षण का जोर मैदानी कर्मचारियों को आत्मरक्षा, भीड़ या तनावपूर्ण हालात को संभालने और विपरीत परिस्थितियों में काम करने की समझ देने पर रहेगा।
वन विभाग के कर्मचारी जंगलों की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने का काम भी करते हैं। यह काम कई बार जोखिम भरे हालात में करना पड़ता है। इसलिए प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा और विभागों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना भी है।
प्रशिक्षण की कार्ययोजना का इंतजार
संयुक्त प्रशिक्षण की घोषणा के बाद अब इसकी विस्तृत कार्ययोजना सामने आने का इंतजार है। प्रशिक्षण कहां आयोजित होगा, किन पुलिस इकाइयों की इसमें भूमिका रहेगी और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा या नहीं—इन बिंदुओं पर उपलब्ध रिपोर्ट में जानकारी नहीं है। योजना का प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि मैदानी कर्मचारियों को अभ्यास का कितना अवसर मिलता है और प्रशिक्षण के बाद आपात स्थितियों में वन विभाग तथा पुलिस के बीच समन्वय कैसे किया जाता है।
वन अमले के साथ पुलिस का प्रशिक्षण जंगलों की सुरक्षा और कर्मचारियों की हिफाजत की दिशा में उठाया गया कदम है। हालिया हमलों और वन भूमि पर अतिक्रमण की चुनौती के बीच विभागीय कर्मचारियों को बेहतर तैयारी देना आवश्यक माना जा रहा है। अब इस फैसले को अमल में लाने और प्रशिक्षण के कार्यक्रम की जानकारी जारी होने पर नजर रहेगी।
