1 अक्टूबर से मध्यप्रदेश की 28 हजार राशन दुकानें बंद रखने का ऐलान, विक्रेता संघ ने रखीं पांच मांगें
मांगें पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी; राशन वितरण प्रभावित होने की आशंका, उपभोक्ताओं की बढ़ सकती है परेशानी
भोपाल। मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े राशन विक्रेताओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। मध्यप्रदेश राशन विक्रेता संघ का कहना है कि मांगों पर समाधान नहीं निकला तो 1 अक्टूबर 2026 से प्रदेश की करीब 28 हजार उचित मूल्य राशन दुकानें अनिश्चितकाल के लिए बंद रखी जाएंगी। संघ की इस घोषणा के बाद अक्टूबर महीने में राशन वितरण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि 1 अक्टूबर से सभी दुकानें निश्चित रूप से बंद रहेंगी, यह फिलहाल संघ की घोषित चेतावनी है। सरकार और विक्रेता संघ के बीच समाधान निकलने पर स्थिति बदल भी सकती है।
पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
राशन विक्रेता लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से निर्णय की मांग कर रहे हैं। संघ का कहना है कि राशन दुकानों के संचालन में आने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है और मौजूदा व्यवस्था में विक्रेताओं को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख मांगों में विक्रेताओं का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने, कमीशन व्यवस्था में सुधार और अन्य लंबित समस्याओं का समाधान शामिल बताया गया है।
संघ का कहना है कि उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से सरकार की खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को अंतिम लाभार्थी तक पहुंचाने में विक्रेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए उनकी आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
28 हजार दुकानों पर असर का दावा
राशन विक्रेता संघ ने दावा किया है कि आंदोलन में प्रदेशभर की करीब 28 हजार उचित मूल्य दुकानें शामिल होंगी। यदि घोषित हड़ताल शुरू होती है और लंबी चलती है तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से मिलने वाले खाद्यान्न के वितरण पर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रदेश में बड़ी संख्या में पात्र परिवार राशन दुकानों से खाद्यान्न प्राप्त करते हैं। ऐसे में अक्टूबर की शुरुआत में हड़ताल होने पर लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
भोपाल में प्रदर्शन की भी तैयारी
राशन विक्रेताओं ने अपनी मांगों को लेकर राजधानी भोपाल में प्रदर्शन करने की तैयारी भी की है। रिपोर्ट के मुताबिक संघ ने 30 सितंबर को भोपाल में प्रदर्शन और इसके बाद 1 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया है।
विक्रेता संघ का कहना है कि सरकार के सामने पहले भी समस्याएं रखी गई हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं मिलने के कारण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
मानदेय बढ़ाने की प्रमुख मांग
विक्रेताओं की प्रमुख मांगों में मासिक मानदेय का मुद्दा शामिल है। संघ चाहता है कि राशन विक्रेताओं को नियमित रूप से ऐसा मानदेय मिले जिससे दुकान संचालन और परिवार के खर्च को पूरा करने में मदद मिल सके।
इसके अलावा खाद्यान्न वितरण के दौरान आने वाली तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने तथा कमीशन और अन्य भुगतान से जुड़े मामलों के समाधान की मांग भी उठाई जा रही है।
राशन कार्ड धारकों पर पड़ सकता है असर
अगर 1 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू होती है तो सबसे अधिक चिंता उन परिवारों की होगी जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन पर निर्भर हैं।
हालांकि राशन कार्ड धारकों को अभी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हड़ताल शुरू होने से पहले सरकार और विक्रेता संघ के बीच बातचीत या कोई वैकल्पिक व्यवस्था सामने आ सकती है। इसलिए उपभोक्ताओं को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग अथवा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर नजर रखनी चाहिए।
सरकार के फैसले पर टिकी नजर
अब सबकी नजर सरकार और राशन विक्रेता संघ के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि मांगों को लेकर सहमति बनती है तो प्रस्तावित हड़ताल वापस या स्थगित हो सकती है। यदि समझौता नहीं हुआ तो संघ ने 1 अक्टूबर से दुकानें बंद रखने की चेतावनी दी है।
ऐसे में अगले कुछ दिन राशन विक्रेताओं के साथ-साथ प्रदेश के लाखों राशन कार्ड धारकों के लिए भी महत्वपूर्ण रहेंगे। हड़ताल को लेकर अंतिम स्थिति सरकार अथवा राशन विक्रेता संघ की अगली आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
