भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े और व्यस्त रेल नेटवर्कों में से एक है, और इस नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश से गुजरता है। प्रदेश में जहाँ एक ओर अत्याधुनिक और आधुनिक रेलवे स्टेशन विकसित हो रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे ऐतिहासिक स्टेशन भी हैं जो 100 से 150 वर्ष पहले ब्रिटिश काल में बनाए गए थे। ये स्टेशन सिर्फ यात्रा का केंद्र नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास और भारत के स्वतंत्रता इतिहास के भी साक्षी हैं।
यहाँ जानिए मध्य प्रदेश के 5 सबसे पुराने और ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों के बारे में—
1. इटारसी जंक्शन (Itarsi Junction)

इटारसी जंक्शन को मध्य प्रदेश का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन माना जाता है। इसका निर्माण 1870 के दशक में ग्रेट इंडियन पेनिनसुला रेलवे (GIPR) ने किया था। यह स्टेशन उत्तर-दक्षिण (दिल्ली–चेन्नई) और पूर्व–पश्चिम (मुंबई–कोलकाता) रेल मार्गों का प्रमुख क्रॉसिंग पॉइंट है। प्रतिदिन 300 से अधिक ट्रेनें यहाँ से गुजरती हैं, जिससे यह भारतीय रेलवे का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र बन जाता है।
2. जबलपुर जंक्शन (Jabalpur Junction)

1867 में शुरू हुआ यह स्टेशन हावड़ा–इलाहाबाद–मुंबई लाइन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पश्चिम मध्य रेलवे का मुख्यालय भी यहीं स्थित है। विक्टोरियन शैली की झलक देने वाली इसकी ऐतिहासिक इमारत आज भी आकर्षण का केंद्र है। यह स्टेशन महाकौशल क्षेत्र को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में प्रमुख भूमिका निभाता है।
3. खंडवा जंक्शन (Khandwa Junction)

खंडवा स्टेशन का इतिहास भी 19वीं सदी का है। यह GIPR की मुख्य लाइन पर बना एक प्रमुख जंक्शन था। पहले यहाँ मीटर-गेज लाइनों का बड़ा नेटवर्क था, जिसे अब ब्रॉड-गेज में परिवर्तित किया जा चुका है। खंडवा महान गायक किशोर कुमार की जन्मभूमि होने के कारण भी प्रसिद्ध है।
4. भोपाल जंक्शन (Bhopal Junction)

राजधानी भोपाल का मुख्य स्टेशन 1884 में तैयार हुआ था। इसे दिल्ली–मुंबई मुख्य मार्ग पर एक रणनीतिक स्टेशन के रूप में विकसित किया गया। भोपाल रियासत के काल में भी यह महत्वपूर्ण केंद्र था। आज यहाँ से राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनें संचालित होती हैं, जिससे यह राज्य के सबसे व्यस्त स्टेशनों में शामिल है।
5. ग्वालियर जंक्शन (Gwalior Junction)

ग्वालियर स्टेशन अपनी अनूठी वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण 1880 के दशक में सिंधिया राजवंश ने कराया था। यह ‘सिंधिया स्टेट रेलवे’ का हिस्सा था, जिसे बाद में भारतीय रेलवे में शामिल किया गया। राजधानी और दक्षिण भारत की ओर जाने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का यह प्रमुख पड़ाव है।
