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MP Promotion 2026: मध्यप्रदेश के 1 लाख से अधिक कर्मचारियों को प्रमोशन में राहत की मांग, सेवा शर्तों में एकमुश्त छूट देने की उठी मांग

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Published On: 4 August 2026
Madhya Pradesh government employees demand a one-time relaxation in promotion rules ahead of the 2026 Departmental Promotion Committee (DPC) meetings in Bhopal
— Madhya Pradesh government employees demand a one-time relaxation in promotion rules ahead of the 2026 Departmental Promotion Committee (DPC) meetings in Bhopal

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MP Promotion 2026: मध्यप्रदेश के 1 लाख से अधिक कर्मचारियों को प्रमोशन में राहत की मांग, सेवा शर्तों में एकमुश्त छूट देने की उठी मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से लंबित पदोन्नति (Promotion) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। प्रदेश के एक लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी आगामी विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) में अपने प्रमोशन को लेकर चिंता में हैं। उनका कहना है कि वर्तमान सेवा शर्तों के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने जीवन का अंतिम प्रमोशन पाने से वंचित हो सकते हैं।

इसी को लेकर मध्यप्रदेश मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने राज्य सरकार से विशेष राहत देने की मांग उठाई है। संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात कर सेवा शर्तों में एकमुश्त छूट (One-Time Relaxation) देने का आग्रह करने का निर्णय लिया है।

संघ का कहना है कि वर्ष 2016 से 2025 तक पदोन्नतियां लंबे समय तक प्रभावित रहीं, जिससे हजारों अधिकारी और कर्मचारी समय पर प्रमोशन नहीं पा सके। अब जब सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में नई विभागीय पदोन्नति समितियां (DPC) प्रस्तावित हैं, तब बड़ी संख्या में कर्मचारी निर्धारित पात्रता पूरी नहीं कर पाएंगे और प्रमोशन से बाहर हो जाएंगे।

लंबे समय तक रुकी रही थीं पदोन्नतियां

मध्यप्रदेश में बीते लगभग एक दशक तक विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक कारणों से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित रही। कई विभागों में नियमित डीपीसी नहीं हो सकी, जिससे अधिकारी और कर्मचारियों के करियर पर सीधा असर पड़ा।

कई कर्मचारियों को वर्षों तक एक ही पद पर कार्य करना पड़ा। बाद में जब प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हुई तो कई कर्मचारियों को अपने जूनियर अधिकारियों के साथ या उनके बाद पदोन्नति मिली।

संघ का कहना है कि यह स्थिति कर्मचारियों के लिए पूरी तरह असामान्य थी और इसमें उनकी कोई व्यक्तिगत गलती नहीं थी।

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से करेंगे मुलाकात

मध्यप्रदेश मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के पदाधिकारी मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपेंगे।

ज्ञापन में मांग की जाएगी कि विशेष परिस्थितियों को देखते हुए आगामी विभागीय पदोन्नति समितियों में वर्तमान सेवा शर्तों में एक बार के लिए राहत प्रदान की जाए।

संघ का कहना है कि यदि सरकार समय रहते निर्णय लेती है तो हजारों कर्मचारियों को उनके अंतिम प्रमोशन का लाभ मिल सकेगा।

संघ ने क्यों उठाई एकमुश्त छूट की मांग

संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक के अनुसार वर्ष 2016 से 2025 के बीच हजारों अधिकारी और कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रहे।

बाद में सरकार ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों को प्रमोट तो किया, लेकिन अब उनमें से कई कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।

ऐसे कर्मचारियों को अगली पदोन्नति के लिए वर्तमान नियमों के अनुसार आवश्यक सेवा अवधि पूरी करने का अवसर नहीं मिल पाएगा।

यही कारण है कि संघ ने सरकार से वन टाइम रिलैक्सेशन देने की मांग की है।

सितंबर 2026 और जनवरी 2027 की DPC बनी उम्मीद

राज्य सरकार सितंबर 2026 तथा जनवरी 2027 में विभिन्न विभागों की विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) आयोजित करने की तैयारी कर रही है।

इसी प्रक्रिया में हजारों अधिकारी और कर्मचारी शामिल होंगे।

लेकिन वर्तमान नियमों के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी पात्रता सूची से बाहर हो सकते हैं।

संघ का कहना है कि यदि अभी नियमों में राहत नहीं दी गई तो हजारों कर्मचारियों का अंतिम प्रमोशन हमेशा के लिए छूट जाएगा।

क्या है वर्तमान प्रमोशन नियम

मध्यप्रदेश सरकार के मौजूदा सेवा नियमों के अनुसार किसी अधिकारी या कर्मचारी को अगले पद पर पदोन्नति के लिए पात्र बनने से पहले वर्तमान पद पर कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी करनी होती है।

यानी यदि किसी कर्मचारी को हाल ही में प्रमोशन मिला है तो उसे अगले प्रमोशन के लिए फिर से पांच वर्ष पूरे होने का इंतजार करना पड़ता है।

यही नियम वर्तमान विवाद का मुख्य कारण बना हुआ है।

कर्मचारियों का तर्क क्या है

संघ का कहना है कि—

  • कर्मचारियों की गलती से प्रमोशन नहीं रुके थे।
  • न्यायालय और प्रशासनिक कारणों से पदोन्नतियां वर्षों तक लंबित रहीं।
  • देर से प्रमोशन मिलने के कारण कर्मचारी पांच वर्ष की सेवा पूरी नहीं कर पाएंगे।
  • बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
  • अंतिम प्रमोशन का लाभ उन्हें कभी नहीं मिल सकेगा।

इसलिए सरकार को विशेष परिस्थिति मानते हुए राहत देनी चाहिए।

राज्य सरकार के पास है विशेष अधिकार

संघ का कहना है कि राज्य मंत्रिमंडल के पास विशेष परिस्थितियों में सेवा शर्तों में छूट देने का अधिकार उपलब्ध है।

यदि सरकार चाहे तो कैबिनेट के माध्यम से एक बार के लिए पात्रता अवधि में छूट देकर हजारों कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ दे सकती है।

ऐसा पहले भी विशेष परिस्थितियों में विभिन्न राज्यों में किया जा चुका है।

एकमुश्त छूट मिलने से क्या होगा फायदा

यदि सरकार सेवा अवधि में एक बार के लिए छूट देती है तो इसके कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।

कर्मचारियों को मिलेगा अंतिम प्रमोशन

सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे अधिकारी और कर्मचारी अपने कैरियर का अंतिम प्रमोशन प्राप्त कर सकेंगे।

आर्थिक लाभ मिलेगा

प्रमोशन मिलने से कर्मचारियों के वेतनमान में वृद्धि होगी।

इसके साथ ही पेंशन, ग्रेच्युटी तथा अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में भी बढ़ोतरी होगी।

मनोबल बढ़ेगा

लंबे समय तक प्रमोशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों को न्याय मिलने की भावना पैदा होगी।

इससे सरकारी कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।

नई भर्तियों का रास्ता खुलेगा

यदि बड़े स्तर पर पदोन्नतियां होती हैं तो निचले पद खाली होंगे।

इन पदों पर राज्य सरकार नई भर्ती कर सकेगी।

इससे प्रदेश के हजारों युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने का अवसर मिल सकता है।

बेरोजगार युवाओं को भी मिलेगा लाभ

संघ का मानना है कि केवल कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।

ऊपरी पदों पर प्रमोशन होने से रिक्त पदों की संख्या बढ़ेगी और विभिन्न विभागों में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

लंबे समय तक प्रमोशन रुकने का पड़ा असर

करीब एक दशक तक प्रमोशन प्रक्रिया प्रभावित रहने से कई विभागों में प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई।

  • वरिष्ठता विवाद बढ़े।
  • विभागों में पद रिक्त रहे।
  • कई अधिकारी अतिरिक्त प्रभार संभालते रहे।
  • कर्मचारियों में असंतोष बढ़ा।
  • पदोन्नति संबंधी न्यायालयीन मामले भी सामने आए।

अब कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान निकाले।

सरकार के सामने क्या हैं विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार सरकार के पास कई विकल्प मौजूद हैं—

  • एक बार के लिए सेवा अवधि में छूट देना।
  • विशेष DPC आयोजित करना।
  • सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारियों के लिए अलग प्रावधान करना।
  • कैबिनेट स्तर पर विशेष निर्णय लेना।
  • पात्रता अवधि में आंशिक संशोधन करना।

यदि सरकार इनमें से कोई निर्णय लेती है तो हजारों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।

कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

संघ द्वारा सरकार के सामने रखी जाने वाली प्रमुख मांगें—

  • प्रमोशन के लिए पांच वर्ष की अनिवार्य सेवा अवधि में एकमुश्त छूट।
  • सितंबर 2026 एवं जनवरी 2027 की DPC में विशेष राहत।
  • लंबे समय तक प्रमोशन रुकने से हुए नुकसान की आंशिक भरपाई।
  • सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारियों को अंतिम प्रमोशन का अवसर।
  • बड़े स्तर पर पदोन्नति कर रिक्त पदों पर नई भर्ती शुरू करना।

क्या ले सकती है सरकार बड़ा फैसला?

कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात के बाद सरकार इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय ले सकती है।

यदि कैबिनेट स्तर पर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सितंबर 2026 की DPC से पहले ही सेवा शर्तों में संशोधन किया जा सकता है।

हालांकि, अंतिम निर्णय राज्य सरकार के विचार-विमर्श और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में पदोन्नति का मुद्दा एक बार फिर लाखों अधिकारी-कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ गया है। वर्षों तक प्रमोशन प्रक्रिया प्रभावित रहने के कारण अनेक कर्मचारी समय पर पदोन्नति नहीं पा सके। अब जबकि सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकें प्रस्तावित हैं, कर्मचारी संगठन सेवा शर्तों में एकमुश्त छूट की मांग कर रहे हैं। यदि सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो न केवल हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर रिक्त पदों पर नई भर्तियों का रास्ता भी खुलेगा, जिससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

 

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