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MP पावर CMD मंजीत सिंह मीडियाकर्मियों पर भड़क गए, संजय गांधी थर्मल पावर स्टेशन दौरे के दौरान

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Published On: 26 February 2026
MP Power CMD Manjit Singh lashes out at journalists during Sanjay Gandhi Thermal Power Station visit
— MP Power CMD Manjit Singh lashes out at journalists during Sanjay Gandhi Thermal Power Station visit

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MP : उमरिया में पावर कंपनी CMD मंजीत सिंह मीडियाकर्मियों पर भड़क गए

MP के उमरिया जिले में स्थित संजय गांधी ताप विद्युत परियोजना (Sanjay Gandhi Thermal Power Station) के दौरे के दौरान मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के सीएमडी मंजीत सिंह मीडियाकर्मियों पर भड़क गए। यह घटना तब हुई जब पत्रकारों ने उनसे विवादित मेगा टेंडर स्कीम के बारे में सवाल किया। नाराजगी जताते हुए सीएमडी ने सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिया कि पत्रकारों को हटाया जाए, और बाद में गोलमोल जवाब देकर इस मामले से पल्ला झाड़ लिया।

इस घटना ने न केवल कंपनी के भीतर चल रही उथल-पुथल को उजागर किया, बल्कि नई नीति के विरोध को भी और बढ़ा दिया है। इस घटना के कारण बिजली उत्पादन क्षेत्र, ठेकेदार समुदाय और मीडिया के बीच तनाव की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।

घटना का पूरा विवरण

सीएमडी मंजीत सिंह बुधवार को प्लांट की इकाई नंबर चार के मेंटिनेंस निरीक्षण और राखड़ डैम (Ash Dam) का जायजा लेने पहुंचे थे। वहां पहले से ही कई पत्रकार मौजूद थे। पत्रकारों ने जब उनसे मेगा टेंडर स्कीम और इसे लेकर उठ रहे विरोध के बारे में सवाल किया, तो सीएमडी असहज हो गए।

इसके बाद उन्होंने अपने सुरक्षा कर्मचारियों को निर्देश दिया कि सभी पत्रकारों का कैमरा बंद किया जाए और उन्हें मौके से हटाया जाए। इस आदेश से पत्रकारों और सुरक्षा कर्मचारियों के बीच कुछ समय के लिए हल्की असहमति भी देखने को मिली।

सीएमडी मंजीत सिंह की यह नाराजगी उस समय और बढ़ गई जब मीडिया ने यह सवाल किया कि इस नई नीति के लागू होने से छोटे और मंझले ठेकेदारों की स्थिति पर क्या असर पड़ेगा।

मेगा टेंडर स्कीम क्या है?

सीएमडी मंजीत सिंह की नाराजगी नई मेगा टेंडर स्कीम से संबंधित थी। इस स्कीम के तहत प्रदेश की सभी चार विद्युत उत्पादन इकाइयों में निर्माण और उत्पादन से जुड़े सभी कार्यों के लिए एक बड़ा टेंडर जारी किया गया है।

  • इस नई नीति का छोटे और मंझले ठेकेदार विरोध कर रहे हैं।
  • ठेकेदारों का आरोप है कि इस नई व्यवस्था से वे टेंडर प्रक्रिया की शर्तों से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी।
  • इस योजना का उद्देश्य विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया में बड़े ठेकेदारों को प्राथमिकता देना और कार्यों में दक्षता बढ़ाना है, लेकिन छोटे ठेकेदारों के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

ठेकेदारों का कहना है कि इस नई नीति के कारण वे अपनी परियोजनाओं में हिस्सा नहीं ले पाएंगे और उनकी आमदनी और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

मीडिया से बातचीत और गोलमोल जवाब

जब पत्रकारों ने इस मुद्दे पर सवाल पूछना जारी रखा, तो सीएमडी मंजीत सिंह ने बाद में मीडिया से बातचीत की, लेकिन किसी भी सीधा जवाब देने से बचते हुए गोलमोल जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया।

  • उन्होंने मेगा टेंडर स्कीम की आलोचना का कोई सीधा उत्तर नहीं दिया।
  • गोलमोल जवाब देने से यह प्रतीत हुआ कि सीएमडी इस विवादित नीति को लेकर गंभीर सवालों से बचना चाहते थे।
  • इस घटना ने मीडिया और जनता में कंपनी के निर्णयों के प्रति सवाल और आलोचना बढ़ा दी।

इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी के भीतर नीति लागू करने की प्रक्रिया को लेकर तनाव और विरोध है।

ठेकेदारों और नीति पर प्रभाव

नई मेगा टेंडर नीति के कारण छोटे ठेकेदारों में असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि इस योजना में शामिल शर्तों के कारण वे टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे, जिससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ सकती है।

  • ठेकेदारों का आरोप है कि बड़े ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • इस नीति का उद्देश्य विद्युत उत्पादन की गुणवत्ता और समय पर कार्य पूरा करना है।
  • बावजूद इसके छोटे ठेकेदारों के लिए यह योजना चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है।

इस विरोध ने यह भी उजागर किया कि नीति लागू करने में सभी हितधारकों के विचारों और चिंताओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

कंपनी और सुरक्षा कर्मचारियों का रुख

सीएमडी मंजीत सिंह ने पत्रकारों को हटाने के लिए सुरक्षा कर्मचारियों को निर्देशित किया। सुरक्षा कर्मियों ने आदेश का पालन किया, लेकिन इससे मीडिया और सुरक्षा कर्मचारियों के बीच तनाव पैदा हुआ।

  • घटना के समय पत्रकारों ने सवाल करना जारी रखा।
  • सुरक्षा व्यवस्था और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा।
  • यह घटना कंपनी के भीतर और बाहर, दोनों जगह, चर्चा का विषय बन गई।
विशेषज्ञों की राय

कानून और ऊर्जा क्षेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि नई नीति के प्रभाव और इसे लेकर विरोध को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

  • छोटे ठेकेदारों के लिए नीति को संतुलित बनाना आवश्यक है।
  • मीडिया को सवाल पूछने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
  • नीति और विरोध के बीच संतुलन बनाए रखना कंपनी के लिए अहम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से हल किया जाना चाहिए ताकि बिजली उत्पादन और ठेकेदारों के हित दोनों सुरक्षित रहें।

निष्कर्ष

उमरिया में हुई यह घटना दर्शाती है कि नई मेगा टेंडर नीति को लेकर कंपनी के भीतर और बाहरी ठेकेदारों में असंतोष है। मीडियाकर्मियों के सवालों पर सीएमडी का असहज और गोलमोल जवाब इस विवाद को और बढ़ावा दे रहा है।

  • यह मामला बिजली उत्पादन, ठेकेदारों के हित और मीडिया स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर करता है।
  • नई नीति को लागू करते समय हितधारकों के विचारों और चिंताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
  • आने वाले समय में यह विवाद सार्वजनिक बहस का विषय बन सकता है, जिससे नीति और कार्यान्वयन में बदलाव की संभावना बनी रहेगी।

इस प्रकार, उमरिया में हुई घटना ने बिजली उत्पादन क्षेत्र की नई नीतियों और ठेकेदारों के विरोध की संवेदनशीलता को सामने ला दिया है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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