MP Police Promotions: मध्य प्रदेश के 161 पुलिसकर्मियों का प्रमोशन रद्द, आपराधिक और विभागीय जांच के चलते लिया गया फैसला
MP Police Promotions: मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस मुख्यालय ने 161 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति निरस्त कर दी है। इनमें उप निरीक्षक (SI) और निरीक्षक (TI) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और कई मामलों में विभागीय जांच भी चल रही है। इसी आधार पर उनकी हालिया पदोन्नति को रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
पुलिस मुख्यालय की ओर से यह कार्रवाई प्रमोशन नीति 2026 के तहत की गई पदोन्नतियों की समीक्षा के बाद सामने आई है। इस संबंध में भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय से 31 अगस्त 2026 को दो अलग-अलग आदेश जारी किए गए। आदेश के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को पहले की तरह कार्यवाहक पद पर ही काम करना होगा।
161 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति निरस्त
पुलिस विभाग में जिन 161 कर्मचारियों की पदोन्नति निरस्त की गई है, उनमें उप निरीक्षक और निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मी शामिल हैं। बताया गया है कि पदोन्नति के बाद उनके रिकॉर्ड की जांच में आपराधिक मामलों और विभागीय जांच से जुड़ी जानकारी सामने आई।
इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने पदोन्नति को निरस्त करने का फैसला लिया। इस फैसले का असर उन पुलिसकर्मियों की वर्तमान पदोन्नत स्थिति पर पड़ेगा, जिन्हें हाल ही में उच्च पद की जिम्मेदारी दी गई थी।
पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार, पदोन्नति निरस्त होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी अपने मूल पद के बजाय कार्यवाहक पद पर जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। यानी उन्हें पदोन्नति के आधार पर नियमित रूप से उच्च पद का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन विभागीय व्यवस्था के तहत वे कार्यवाहक जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
13 और 20 जुलाई को हुई थी पदोन्नति
जानकारी के अनुसार, इन पुलिसकर्मियों की पदोन्नति जुलाई 2026 में की गई थी। 13 जुलाई 2026 को निरीक्षक पद पर पदोन्नति की गई थी, जबकि 20 जुलाई 2026 को उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति के आदेश जारी हुए थे।
इन पदोन्नतियों के बाद विभागीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों के रिकॉर्ड और पात्रता से जुड़ी जानकारी की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामले या विभागीय जांच लंबित होने की जानकारी सामने आई, उनकी पदोन्नति पर सवाल उठे।
इसके बाद अब दोनों स्तरों पर की गई पदोन्नतियों को निरस्त कर दिया गया है।
DGP के हस्ताक्षर से जारी हुए आदेश
पुलिस मुख्यालय से जारी दोनों आदेशों पर डीजीपी कैलाश मकवाना के हस्ताक्षर बताए गए हैं। आदेश जारी होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को पदोन्नति का लाभ गंवाना पड़ा है।
पुलिस विभाग में पदोन्नति केवल वरिष्ठता या सेवा अवधि के आधार पर नहीं होती, बल्कि अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड और अन्य निर्धारित पात्रताओं को भी देखा जाता है। आपराधिक प्रकरण या विभागीय जांच लंबित होने की स्थिति में पदोन्नति से जुड़े नियम अलग तरीके से लागू हो सकते हैं।
इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित पुलिसकर्मियों की पदोन्नति की समीक्षा की गई और अब उसे निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।
आपराधिक मामले और विभागीय जांच बनी वजह
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि संबंधित 161 पुलिसकर्मियों में से ऐसे अधिकारी भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण चल रहे हैं। इसके अलावा कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी लंबित बताई गई है।
ऐसे मामलों में पुलिसकर्मियों की पदोन्नति को लेकर विभागीय स्तर पर नियमों और पात्रता की समीक्षा की जाती है। यदि जांच या प्रकरण की स्थिति पदोन्नति के लिए निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं होती है तो विभाग कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, केवल आपराधिक मामला लंबित होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित पुलिसकर्मी दोषी साबित हो चुके हैं। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है। यहां पदोन्नति निरस्त करने की कार्रवाई विभागीय नियमों और सेवा रिकॉर्ड की स्थिति के आधार पर की गई है।
कार्यवाहक पद पर जारी रहेगी जिम्मेदारी
पदोन्नति निरस्त होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों को पूरी तरह जिम्मेदारी से हटाया नहीं गया है। पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार वे पहले की तरह कार्यवाहक पद पर काम करते रहेंगे।
इस व्यवस्था के तहत अधिकारी अपने विभागीय कार्य और जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे, लेकिन हालिया पदोन्नति से मिलने वाला नियमित पद और उससे जुड़े लाभ प्रभावित होंगे।
इस फैसले के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के लिए अब आगे की विभागीय और कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि उनके खिलाफ चल रही जांच या प्रकरणों में स्थिति बदलती है तो भविष्य में उनकी पदोन्नति पर दोबारा विचार की स्थिति बन सकती है।
पुलिस विभाग में आदेश के बाद चर्चा
161 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति निरस्त किए जाने का फैसला मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में चर्चा का विषय बन गया है। जुलाई में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों को अब फिर कार्यवाहक पद पर जिम्मेदारी निभानी होगी।
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों के बाद विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया, सेवा रिकॉर्ड और लंबित जांच से जुड़े मामलों को लेकर भी ध्यान बढ़ा है। यह फैसला इस बात को भी रेखांकित करता है कि पदोन्नति के दौरान पुलिसकर्मियों की सेवा स्थिति और लंबित मामलों की जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
फिलहाल पुलिस मुख्यालय के आदेश के बाद 161 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति निरस्त हो चुकी है। इनमें उप निरीक्षक और निरीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। अब ये पुलिसकर्मी कार्यवाहक पद पर अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे और संबंधित आपराधिक मामलों तथा विभागीय जांच की स्थिति के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
