MP Police Promotion Controversy: पुलिस विभाग में पदोन्नति सूची पर उठे सवाल, दागी अधिकारियों को मौका मिलने का आरोप; कई पात्र पुलिसकर्मी बाहर
MP Police Promotion News: मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में हाल ही में जारी हुई पदोन्नति सूची अब विवादों में घिर गई है। विभाग द्वारा जल्दबाजी में जारी की गई प्रमोशन प्रक्रिया को लेकर कई पुलिसकर्मियों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सूची में ऐसे अधिकारियों के नाम भी शामिल कर दिए गए हैं, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले, विभागीय जांच या न्यायालयीन प्रकरण चल रहे हैं। वहीं कई पात्र पुलिसकर्मियों के नाम सूची से बाहर रह गए हैं।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। कई कर्मचारी अपनी शिकायत लेकर पुलिस मुख्यालय पहुंच रहे हैं और पदोन्नति प्रक्रिया की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
दागी अधिकारियों को प्रमोशन मिलने पर सवाल
पुलिस विभाग के नियमों के अनुसार यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला लंबित हो या विभागीय जांच चल रही हो तो उसकी पदोन्नति प्रक्रिया को रोककर रखा जाता है। ऐसे मामलों में पदोन्नति का लिफाफा बंद कर दिया जाता है और अंतिम निर्णय जांच या न्यायालय के फैसले के बाद लिया जाता है।
लेकिन इस बार जारी हुई पदोन्नति सूची में कई ऐसे नाम सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिनके खिलाफ गंभीर आरोप या मामले लंबित हैं। इसको लेकर विभाग के अंदर ही सवाल उठने लगे हैं।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में ऐसे कई निरीक्षकों के नाम सामने आए हैं, जिनके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने के बावजूद उन्हें पदोन्नति मिलने की बात कही जा रही है। पुलिस विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी अनौपचारिक रूप से इस प्रक्रिया में हुई कमियों को स्वीकार कर रहे हैं।
ग्वालियर-चंबल में उठे सबसे ज्यादा सवाल
ग्वालियर-चंबल अंचल में पदस्थ कुछ निरीक्षकों को लेकर विवाद ज्यादा बढ़ गया है। आरोप है कि कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप होने के बावजूद उन्हें प्रमोशन सूची में शामिल कर लिया गया।
बताया जा रहा है कि ग्वालियर में पदस्थ निरीक्षक मंगल सिंह पपोला के खिलाफ सीबीआई द्वारा फर्जी एनकाउंटर मामले में प्रकरण दर्ज किया गया था। वहीं पीटीएस तिघरा में पदस्थ निरीक्षक रूपेश शर्मा के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज होने की बात सामने आई है।
हालांकि विभागीय स्तर पर इन मामलों को लेकर अंतिम स्थिति और कार्रवाई की जानकारी संबंधित अधिकारियों की जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
कई पात्र पुलिसकर्मियों के नाम सूची से गायब
जहां एक तरफ कुछ अधिकारियों को प्रमोशन मिलने पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई पात्र पुलिसकर्मियों को पदोन्नति नहीं मिलने से नाराजगी है।
कई पुलिसकर्मियों का कहना है कि वे सभी पात्रता पूरी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम प्रमोशन सूची में शामिल नहीं किया गया। इसके पीछे वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (एसीआर) की जानकारी अपडेट नहीं होने या दस्तावेज समय पर नहीं पहुंचने जैसी वजहें बताई जा रही हैं।
कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उनकी विभागीय जांच पहले ही समाप्त हो चुकी है, फिर भी उन्हें पदोन्नति सूची से बाहर रखा गया।
सेवानिवृत्त अधिकारी का नाम भी सूची में शामिल होने का दावा
पदोन्नति सूची में एक और विसंगति सामने आने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) पद की सूची में एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी का नाम भी शामिल हो गया।
वहीं दूसरी ओर समान नाम वाले एक अन्य पुलिसकर्मी की पदोन्नति रुक गई। बताया गया कि दूसरे अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही है, जिसके कारण भ्रम की स्थिति बनी।
2015 बैच के उपनिरीक्षकों ने उठाई आवाज
MP पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर 2015 बैच के उपनिरीक्षकों ने भी पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि उनके बैच के कई अधिकारी पात्र होने के बावजूद पदोन्नति से वंचित रह गए।
इन उपनिरीक्षकों का आरोप है कि उनके बाद के बैच के कुछ सूबेदारों को प्रमोशन देकर रक्षित निरीक्षक बना दिया गया, जबकि 2015 बैच के कई उपनिरीक्षक अभी भी उसी पद पर कार्यरत हैं।
प्रदेशभर में इस बैच के करीब 199 उपनिरीक्षक पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि निरीक्षक से डीएसपी पद पर हुई पदोन्नति के बाद बड़ी संख्या में निरीक्षक पद खाली हुए हैं, इसके बावजूद उन्हें मौका नहीं दिया गया।
333 में से केवल 134 को मिला प्रमोशन
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के 2015 बैच के उपनिरीक्षकों के अनुसार उनके बैच में कुल 333 उपनिरीक्षक थे। इनमें से केवल 134 को ही पदोन्नति दी गई, जबकि करीब 199 अधिकारी अभी भी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।
उनका कहना है कि पुलिस मुख्यालय की कार्मिक शाखा के नियमों के अनुसार उन्हें भी पदोन्नति का अधिकार मिलना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को आवेदन देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
विभाग में बढ़ी नाराजगी
MP पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर उठे विवाद के बाद अब कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई पुलिसकर्मियों का कहना है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और सभी पात्र कर्मचारियों को समान अवसर मिलना चाहिए।
वहीं विभाग के सामने अब चुनौती है कि वह सामने आई शिकायतों और विसंगतियों की जांच कर समाधान निकाले। यदि जांच में अनियमितताएं पाई जाती हैं तो पदोन्नति सूची में संशोधन भी किया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस महकमे में जारी यह विवाद प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और कई अधिकारी अब विभागीय निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
