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MP Police New Rule 2026: तीन बार फेल हुए थाना प्रभारी की जाएगी कुर्सी, हर महीने होगा एग्जाम

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Published On: 8 June 2026
MP Police New Rule 2026:

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MP Police New Rule 2026: अब हर महीने होगा थाना प्रभारियों का एग्जाम, 

मध्यप्रदेश पुलिस का बड़ा फैसला, पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने की तैयारी

MP Police New Rule 2026: मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा पुलिसिंग में जवाबदेही बढ़ाने के लिए पुलिस विभाग ने एक नई और सख्त व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब प्रदेश के थाना प्रभारियों (SHO) का हर महीने प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत थाना प्रभारियों को 22 अलग-अलग पुलिसिंग मानकों पर परखा जाएगा और उनके कार्यों की ग्रेडिंग की जाएगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि कोई थाना प्रभारी लगातार तीन बार इस मूल्यांकन में असफल रहता है तो उससे थाने का प्रभार वापस लिया जा सकता है। पुलिस विभाग का मानना है कि इस कदम से पुलिसिंग में सुधार आएगा, अपराध नियंत्रण बेहतर होगा और अधिकारियों में कार्य के प्रति अधिक जवाबदेही विकसित होगी।

22 मानकों पर होगा मूल्यांकन

पुलिस विभाग द्वारा तैयार किए गए नए मूल्यांकन मॉडल में थाना प्रभारियों की कार्यक्षमता को 22 अलग-अलग बिंदुओं पर जांचा जाएगा। यह परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी, जिसमें अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के निस्तारण, वारंट की तामील और विशेष कानूनों के तहत की गई कार्रवाई को प्रमुखता दी जाएगी।

प्रत्येक थाना प्रभारी का प्रदर्शन निर्धारित मानकों के आधार पर रिकॉर्ड किया जाएगा और उसी के अनुसार उसकी ग्रेडिंग तय होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल अंक देना नहीं बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली में सुधार लाना और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना है।

भोपाल कमिश्नरेट से होगी शुरुआत

इस नई व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले भोपाल कमिश्नरेट में की जा रही है। पुलिस विभाग के अनुसार इसी महीने से थाना प्रभारियों की मासिक परीक्षा और ग्रेडिंग प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में इसे प्रदेश के अन्य जिलों और पुलिस इकाइयों में भी लागू किया जा सकता है। इससे पूरे प्रदेश में एक समान कार्यप्रणाली और प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन प्रणाली विकसित होने की संभावना है।

अपराध नियंत्रण पर रहेगा विशेष फोकस

मूल्यांकन के दौरान थाना प्रभारियों के लिए अपराध नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण मानकों में शामिल रहेगा। उनके क्षेत्र में अपराध की स्थिति, अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और अपराध रोकने के लिए किए गए प्रयासों को विशेष रूप से परखा जाएगा।

पुलिस विभाग का मानना है कि यदि थाना स्तर पर अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होगी तो कानून व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

वारंट तामील और विशेष अभियानों पर मिलेंगे अधिक अंक

नई ग्रेडिंग प्रणाली में वारंट तामील को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। लंबे समय से लंबित वारंटों की तामील, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायालयीन प्रक्रियाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर थाना प्रभारियों को अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे।

इसके अलावा विशेष अभियान चलाकर अपराधियों पर की गई कार्रवाई भी मूल्यांकन का हिस्सा होगी। इससे पुलिस अधिकारियों को सक्रिय और परिणामोन्मुखी कार्य करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

NDPS और आर्म्स एक्ट की कार्रवाई होगी अहम

पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि NDPS एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत की गई कार्रवाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध हथियारों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने वाले थाना प्रभारियों को बेहतर अंक मिलेंगे।

यह कदम प्रदेश में नशे के कारोबार और अवैध हथियारों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निगरानीशुदा बदमाशों और जिला बदर अपराधियों पर नजर

नई मूल्यांकन प्रणाली में निगरानीशुदा बदमाशों की मॉनिटरिंग और जिला बदर अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण भी शामिल किया गया है। यदि किसी थाना क्षेत्र में ऐसे अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जाती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव ग्रेडिंग में दिखाई देगा।

पुलिस विभाग का उद्देश्य है कि अपराधियों पर लगातार निगरानी रखकर अपराध की संभावनाओं को पहले ही कम किया जाए।

थानों में बढ़ेगी सकारात्मक प्रतिस्पर्धा

भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के अनुसार इस मूल्यांकन मॉडल का मुख्य उद्देश्य थानों के बीच सकारात्मक प्रतिस्पर्धा विकसित करना है। जब प्रत्येक थाना प्रभारी को अपने प्रदर्शन के आधार पर आंका जाएगा तो वे बेहतर परिणाम देने का प्रयास करेंगे।

इससे न केवल अपराध नियंत्रण में सुधार होगा बल्कि लंबित मामलों के निस्तारण, जांच की गुणवत्ता और आम जनता को मिलने वाली पुलिस सेवाओं में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

जवाबदेही और पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा

पुलिस विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से थाना प्रभारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन के कारण अधिकारियों को अपने कार्यों का नियमित आकलन करना होगा और बेहतर परिणाम देने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।

साथ ही ग्रेडिंग सिस्टम पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता लाने में भी सहायक साबित होगा, क्योंकि प्रत्येक अधिकारी का मूल्यांकन तय मानकों के आधार पर किया जाएगा।

पुलिसिंग में सुधार की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस विभाग का यह निर्णय आधुनिक और परिणाम आधारित पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, अपराध नियंत्रण को मजबूती मिलेगी और जनता का पुलिस पर विश्वास भी मजबूत होगा।

यदि यह मॉडल सफल साबित होता है तो आने वाले समय में मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा थाना प्रभारियों के लिए शुरू किया गया मासिक मूल्यांकन और ग्रेडिंग सिस्टम पुलिसिंग को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 22 मानकों पर आधारित 100 अंकों की परीक्षा, अपराध नियंत्रण पर फोकस, NDPS और आर्म्स एक्ट की कार्रवाई, वारंट तामील और अपराधियों की निगरानी जैसे बिंदु इस व्यवस्था को खास बनाते हैं।

तीन बार असफल होने पर थाना प्रभार हटाने की व्यवस्था यह संकेत देती है कि अब पुलिस विभाग प्रदर्शन आधारित कार्य संस्कृति को प्राथमिकता देने जा रहा है। इससे कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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