MP के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उद्यानिकी फसलों को किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बताते हुए इनके व्यापक विस्तार पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिक से अधिक किसानों को फल, फूल, सब्जी, मसाला, औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती से जोड़ना आवश्यक है, जिससे कम जमीन में भी अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
उद्यानिकी फसलों से बढ़ेगी किसानों की आय
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ अब उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करना समय की आवश्यकता है। इन फसलों में कम लागत में अधिक मुनाफा मिलने की संभावना होती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को इस दिशा में लगातार प्रेरित किया जाए, ताकि उनकी वास्तविक आय में वृद्धि हो सके।
जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को सीजनल और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में प्राकृतिक खाद और जैविक खेती की ओर प्रेरित करना जरूरी है। जैविक खेती न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने पर विशेष बल दिया।
उद्यानिकी उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की उद्यानिकी और मसाला फसलों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है। इस मांग को पूरा करने के लिए एक मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उद्यानिकी उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग की जाए और उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाए।
महोत्सवों के माध्यम से बढ़ेगा बाजार संपर्क
बैठक में जानकारी दी गई कि किसानों और उद्यानिकी उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश में कई महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इनमें जून में भोपाल में आम महोत्सव, जुलाई में खरगोन में मिर्च महोत्सव, सितंबर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव और नवंबर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव शामिल हैं।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने संतरा महोत्सव आयोजित करने के भी निर्देश दिए हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य किसानों को नए बाजार और उपभोक्ताओं से जोड़ना है।
फूलों की खेती और फ्लोरीकल्चर पर विशेष ध्यान
बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में फ्लोरीकल्चर (फूलों की खेती) के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए लगभग 19 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। यह केंद्र फूलों की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मदद करेगा।
औषधीय और मसाला फसलों की बढ़ती मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की औषधीय और मसाला फसलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन फसलों की आपूर्ति के लिए मजबूत प्रणाली विकसित की जाए। साथ ही, आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में प्रदेश की कृषि उपज का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
सप्लाई चेन और औद्योगिक उपयोग पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय और अस्पतालों की स्थापना की जा रही है। ऐसे में औषधीय फसलों का उपयोग बढ़ाकर स्थानीय किसानों को सीधा लाभ दिया जा सकता है। उन्होंने पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करने पर बल दिया, ताकि उत्पादन से लेकर बाजार तक एक सुचारु व्यवस्था विकसित हो सके।
उद्यानिकी विकास एजेंसी की स्थापना की तैयारी
बैठक में यह भी बताया गया कि उद्यानिकी फसलों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हार्टिकल्चर प्रमोशन एजेंसी की स्थापना की प्रक्रिया जारी है। यह एजेंसी किसानों को तकनीकी सहायता, बाजार उपलब्धता और प्रशिक्षण प्रदान करेगी।
जीआई टैग और वैश्विक पहचान की दिशा में कदम
प्रदेश के उद्यानिकी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग (Geographical Indication Tag) प्राप्त करने की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे मध्यप्रदेश के कृषि उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और किसानों को वैश्विक बाजार में बेहतर मूल्य मिलेगा।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की यह पहल मध्यप्रदेश के कृषि क्षेत्र में एक नए बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उद्यानिकी फसलों, जैविक खेती, औषधीय पौधों और मसाला उत्पादन को बढ़ावा देकर न केवल किसानों की आय बढ़ाई जाएगी, बल्कि प्रदेश को कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी यह प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
