मांगें पूरी नहीं हुईं तो पटवारियों का बड़ा आंदोलन, 28 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान
संवाददाता : राहुल जैन
वेतन विसंगति, समयमान वेतनमान सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने खोला मोर्चा, राजस्व कार्य प्रभावित होने की आशंका
अशोकनगर। मध्य प्रदेश में राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाने वाले पटवारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया है। लंबे समय से चली आ रही पांच सूत्रीय मांगों के निराकरण की मांग को लेकर मध्य प्रदेश पटवारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संघ का कहना है कि यदि शासन स्तर पर जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी 28 जुलाई 2026 से प्रदेशभर के पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
पटवारियों के इस आंदोलन से प्रदेश के राजस्व कार्यों पर सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। भूमि संबंधी कार्य, नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी, किसान योजनाओं से जुड़े डिजिटल कार्य और अन्य राजस्व गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
लंबे समय से लंबित हैं पटवारियों की मांगें
मध्य प्रदेश पटवारी संघ जिला इकाई अशोकनगर द्वारा मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि पटवारी संवर्ग की कई महत्वपूर्ण मांगें वर्षों से लंबित हैं। संघ का आरोप है कि शासन स्तर पर लगातार आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन वास्तविक रूप से मांगों के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
संघ के अनुसार पटवारी राजस्व व्यवस्था की रीढ़ हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर भूमि संबंधी कार्यों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं और मांगों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है।
पटवारी संघ ने कहा कि लगातार बढ़ते कार्यभार और जिम्मेदारियों के बीच कर्मचारियों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ रही है।
वेतन विसंगति और समयमान वेतनमान मुख्य मुद्दा
पटवारी संघ का सबसे बड़ा विरोध वेतन विसंगति और समयमान वेतनमान को लेकर है। संघ का कहना है कि पटवारी संवर्ग की वेतन विसंगति दूर करने की मांग लंबे समय से शासन के सामने रखी जा रही है, लेकिन अभी तक इसका समाधान नहीं किया गया।
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के अन्य शासकीय कर्मचारियों को पदोन्नति और वेतन संबंधी लाभ मिल रहे हैं, लेकिन पटवारियों को इससे वंचित रखा जा रहा है। इससे कर्मचारियों में असंतोष और निराशा का माहौल है।
पटवारियों का कहना है कि वे लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में काम करते हुए शासन की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने का कार्य करते हैं, लेकिन उनके स्वयं के हितों से जुड़े विषयों पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
भत्तों और मानदेय के भुगतान में देरी का आरोप
पटवारी संघ ने ज्ञापन में गृह भाड़ा भत्ता और कृषि सांख्यिकी लघु सिंचाई संगणना कार्य के मानदेय भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा भी उठाया है।
संघ का कहना है कि कई जिलों में इन कार्यों से संबंधित भुगतान लंबे समय से लंबित हैं। अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पटवारियों ने मांग की है कि लंबित भुगतान जल्द से जल्द जारी किए जाएं और भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत
अपनी मांगों को लेकर पटवारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है। संघ द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन की शुरुआत 21 जुलाई से होगी।
21 से 23 जुलाई: काली पट्टी बांधकर विरोध
पटवारी अपनी मांगों के समर्थन में 21 जुलाई से 23 जुलाई तक काली पट्टी बांधकर शासकीय कार्य करेंगे। इस दौरान वे अपने नियमित कार्य करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे।
24 से 27 जुलाई: विभागीय संचार माध्यमों का बहिष्कार
इसके बाद 24 जुलाई से 27 जुलाई तक पटवारी शासकीय वाट्सएप ग्रुप और अन्य विभागीय संचार माध्यमों का बहिष्कार करेंगे। संघ का कहना है कि यह आंदोलन का दूसरा चरण होगा।
25 जुलाई से डिजिटल कार्यों का बहिष्कार
पटवारी संघ ने 25 जुलाई से 26 अगस्त तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना सहित विभिन्न ऐप आधारित डिजिटल कार्यों के बहिष्कार का निर्णय लिया है।
28 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल
यदि सरकार द्वारा मांगों के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जाती है तो 28 जुलाई 2026 से प्रदेशभर के पटवारी कलम बंद आंदोलन शुरू करेंगे और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
पदाधिकारियों के तबादलों पर भी जताई आपत्ति
पटवारी संघ ने अपने ज्ञापन में संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई और कथित नियम विरुद्ध तबादलों का भी विरोध किया है।
संघ का आरोप है कि अशोकनगर जिले में संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को परेशान करने के उद्देश्य से उन्हें उनकी गृह तहसीलों से बाहर स्थानांतरित किया गया है। संघ ने इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताते हुए तत्काल तबादले निरस्त करने की मांग की है।
पटवारियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा इस मामले में उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सरकार से समाधान की उम्मीद
पटवारी संघ का कहना है कि उनका उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं है, बल्कि अपनी जायज मांगों को शासन तक पहुंचाना है। संघ ने कहा कि यदि सरकार समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेती है तो आंदोलन को समाप्त किया जा सकता है।
पटवारियों का कहना है कि वे वर्षों से पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं का समाधान करना शासन की जिम्मेदारी है।
राजस्व व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
पटवारियों की संभावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर प्रशासन के सामने भी चुनौती खड़ी हो सकती है। प्रदेश में राजस्व विभाग से जुड़े अनेक कार्य सीधे तौर पर पटवारियों पर निर्भर रहते हैं।
भूमि रिकॉर्ड सुधार, किसान योजनाओं की जानकारी, फसल सर्वेक्षण, प्राकृतिक आपदा से संबंधित रिपोर्ट तैयार करना और अन्य कई महत्वपूर्ण कार्य पटवारियों की भूमिका से जुड़े हैं।
यदि हड़ताल लंबी चलती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
अब शासन के निर्णय पर टिकी नजरें
पटवारी संघ के आंदोलन की घोषणा के बाद अब सभी की नजरें सरकार के रुख पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं शासन के सामने राजस्व व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती होगी।
यदि बातचीत के माध्यम से समाधान निकलता है तो आंदोलन टल सकता है, लेकिन मांगों का निराकरण नहीं होने की स्थिति में प्रदेशभर में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
