Indore में अप्रैल 2026 से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, नागरिक खुद दर्ज कर सकेंगे जानकारी
MP News: लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश के Indore में डिजिटल जनगणना की शुरुआत होने जा रही है। अप्रैल 2026 से यह प्रक्रिया शुरू होगी और इसे अब तक की सबसे आधुनिक और तकनीक-आधारित जनगणना माना जा रहा है। इस बार की जनगणना खास इसलिए है क्योंकि पहली बार नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिसे स्व-गणना (Self-Enumeration) कहा जाता है।
भारत में जनगणना हर 10 साल में होती है और यह सरकार के लिए नीतियों और योजनाओं की आधारशिला होती है। इंदौर में डिजिटल जनगणना के जरिए न केवल समय और लागत की बचत होगी, बल्कि आंकड़ों की सटीकता और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
Indore जिला कलेक्टर ने जारी किए दिशा-निर्देश
Indore जिले में डिजिटल जनगणना की तैयारियों के लिए जिला कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए और जिले में जनगणना की औपचारिक तैयारियां शुरू हो गई हैं।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सटीक और भरोसेमंद आंकड़े जुटाना प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा नहीं होगी, उनके लिए डोर-टू-डोर डेटा कलेक्शन जारी रहेगा।
डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया
अब तक की पारंपरिक जनगणना में कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी इकट्ठा करते थे। इसमें समय लगता था और कई बार नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता था।
इस बार सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाया है। इसका उद्देश्य है:
- नागरिक मोबाइल ऐप या पोर्टल के माध्यम से खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
- ऐप पर परिवार के सदस्यों की संख्या, आयु, शिक्षा, रोजगार, आवास की स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज किए जाएंगे।
- डिजिटल प्रक्रिया से डेटा सीधे सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे फर्जी या डुप्लीकेट एंट्री की संभावना कम हो जाएगी।
इस तरीके से डेटा संग्रह अधिक सटीक, तेज और भरोसेमंद होगा।
डोर-टू-डोर डेटा संग्रह
जिन लोगों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है, उनके लिए जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी नागरिक की जानकारी छूटने नहीं दी जाएगी।
इस प्रकार डिजिटल और पारंपरिक दोनों तरीके अपनाए जाएंगे, ताकि हर नागरिक तक डेटा संग्रह की प्रक्रिया पहुंचे।
डिजिटल जनगणना के फायदे
- सटीक आंकड़े: डिजिटल प्लेटफॉर्म से डेटा सीधे सर्वर पर जाएगा।
- समय और लागत में बचत: घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करने की प्रक्रिया कम होगी।
- फर्जी डेटा की संभावना कम: डेटा की वैरिफिकेशन और सत्यापन आसान होगा।
- भविष्य की योजनाओं में मदद: स्मार्ट सिटी, विकास योजनाओं और सरकारी नीतियों के लिए डेटा का उपयोग होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना शहर को तकनीक के मामले में एक कदम आगे ले जाएगी और इसे अन्य शहरों के लिए भी मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।
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नागरिकों के लिए निर्देश
- नागरिकों को ऑफिशियल ऐप या पोर्टल पर ही जानकारी भरनी होगी।
- किसी भी तरह की धोखाधड़ी या अनधिकृत ऐप्स से बचें।
- यदि इंटरनेट या स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है, तो जनगणना कर्मचारी से संपर्क करें।
इस प्रक्रिया से नागरिकों को स्वयं डेटा दर्ज करने की स्वतंत्रता मिलेगी। इसके साथ ही जिम्मेदारी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
प्रशासन का दावा और उम्मीद
- प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी नागरिक की जानकारी छूटने नहीं दी जाएगी।
- डिजिटल जनगणना से शहर को स्मार्ट सिटी योजनाओं के लिए सटीक डेटा मिलेगा।
- आने वाले समय में यह प्रणाली पूरे मध्य प्रदेश और भारत के अन्य शहरों के लिए मॉडल बन सकती है।
Indore डिजिटल जनगणना का महत्व
- तकनीक के मामले में अग्रणी शहर: इंदौर पहली बार इतनी व्यापक डिजिटल जनगणना कर रहा है।
- स्मार्ट सिटी योजनाओं में मदद: डिजिटल आंकड़े योजना निर्माण में अहम योगदान देंगे।
- सटीक और विश्वसनीय डेटा संग्रह: पारंपरिक डेटा संग्रह की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद होगा।
डिजिटल जनगणना के माध्यम से सरकार न केवल सटीक आंकड़े जुटाएगी, बल्कि भविष्य में विभिन्न योजनाओं के लिए भी यह आधार बनेंगे।
तकनीक और सुरक्षा
डिजिटल जनगणना के लिए ऐप और पोर्टल सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड होंगे। नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा और केवल सरकारी उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाएगा।
इसके अलावा, जिनके पास इंटरनेट या स्मार्टफोन सुविधा नहीं है, उनके डेटा को डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से इकट्ठा किया जाएगा।
निष्कर्ष
अप्रैल 2026 से Indore में शुरू होने वाली डिजिटल जनगणना नागरिकों और प्रशासन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
- नागरिक खुद जानकारी दर्ज करेंगे।
- डेटा की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
- स्मार्ट सिटी योजनाओं और सरकारी नीतियों के लिए आधार तैयार होगा।
इंदौरवासियों की सक्रिय भागीदारी इस प्रक्रिया की सफलता तय करेगी। डिजिटल जनगणना न केवल इंदौर को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगी, बल्कि भविष्य की सरकारी योजनाओं के लिए सटीक डेटा का स्रोत भी बनेगी।

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