—Advertisement—

MP Land Mutation: मध्यप्रदेश में जमीन का नामांतरण कैसे कराएं? आवेदन, फीस और जरूरी दस्तावेज

Author Picture
Published On: 10 October 2026
rtttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttttt

—Advertisement—

MP Land Mutation: मध्यप्रदेश में जमीन का नामांतरण कैसे कराएं? आवेदन, फीस और जरूरी दस्तावेज

मध्य प्रदेश में जमीन खरीदने, विरासत में मिलने, दान के जरिए प्राप्त होने या अदालत के आदेश के बाद सरकारी भूमि रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज कराना जरूरी होता है। इस प्रक्रिया को नामांतरण या म्यूटेशन कहते हैं। नामांतरण के बाद खसरा और बी-1 जैसे राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित बदलाव दर्ज किया जाता है। राज्य के ई-सेवा पोर्टल पर नामांतरण और RCMS नामांतरण की सेवाएं उपलब्ध हैं।

नामांतरण कब कराना पड़ता है?

जमीन की रजिस्ट्री के बाद खरीदार को नामांतरण कराना होता है। मालिक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज कराने, उपहार या दान से जमीन मिलने और सक्षम अदालत के आदेश के आधार पर भी राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव कराया जा सकता है। विरासत के मामले में यह देखना जरूरी है कि संपत्ति को लेकर परिवार में कोई विवाद तो नहीं है। विवाद होने पर प्रक्रिया सामान्य अविवादित मामले से अलग हो सकती है।

आवेदन कहां और कैसे करें?

जमीन के नामांतरण के लिए मध्य प्रदेश शासन के ई-सेवा पोर्टल पर “राजस्व अभिलेखों में नामांतरण” या RCMS की नामांतरण सेवा देखी जा सकती है। पोर्टल पर सेवा चुनकर आवेदन की जानकारी भरें, संबंधित जमीन और खसरा विवरण दर्ज करें और मांगे गए दस्तावेज अपलोड करें। आवेदन जमा करने के बाद उसकी रसीद या आवेदन क्रमांक संभालकर रखें, जिससे प्रकरण की स्थिति देखी जा सके। राज्य का आधिकारिक पोर्टल बिक्री, विरासत, उपहार और न्यायालय के आदेश से जुड़े नामांतरण के लिए सेवा सूचीबद्ध करता है।

पंजीकृत विक्रय विलेख के आधार पर होने वाले कुछ मामलों में साइबर तहसील की फेसलेस सेवा भी उपलब्ध है। सेवा पोर्टल इसे रजिस्ट्री वाली जमीन के नामांतरण के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया बताता है। आवेदन की पात्रता और संबंधित सुविधा जिले या मामले के अनुसार पोर्टल पर जांचें। जरूरत पड़ने पर आवेदक तहसील कार्यालय या अधिकृत सेवा केंद्र से प्रक्रिया की जानकारी ले सकता है।

कौन से दस्तावेज तैयार रखें?

दस्तावेज मामले के प्रकार के अनुसार बदल सकते हैं। सामान्य तौर पर आवेदक को पहचान और पते का प्रमाण, जमीन का खसरा नंबर, मौजूदा खसरा या बी-1 की जानकारी और नामांतरण के आधार से जुड़ा दस्तावेज तैयार रखना चाहिए। खरीद के मामले में पंजीकृत विक्रय विलेख, विरासत में मृत्यु प्रमाणपत्र और वारिसों से जुड़े प्रमाण, दान के मामले में पंजीकृत दानपत्र तथा अदालत के आदेश वाले मामले में आदेश की प्रति मांगी जा सकती है। दस्तावेजों की अंतिम सूची आवेदन के दौरान पोर्टल पर देखें या संबंधित तहसील से पुष्टि करें।

नामांतरण की फीस कितनी है?

नामांतरण की एक निश्चित रकम यहां बताना उचित नहीं होगा, क्योंकि उपलब्ध सरकारी सेवा सूची में शुल्क की स्पष्ट राशि नहीं दी गई है। आवेदन जमा करते समय पोर्टल पर दिखने वाला शुल्क और भुगतान की रसीद ही मान्य मानें। जमीन के प्रमाणित खसरा, बी-1 या नक्शे की प्रति लेने का शुल्क नामांतरण आवेदन शुल्क से अलग हो सकता है। ऑनलाइन भुगतान या सेवा केंद्र पर जमा रकम की रसीद जरूर रखें।

आवेदन के बाद क्या होता है?

आवेदन के बाद संबंधित राजस्व अधिकारी और पटवारी रिकॉर्ड तथा दस्तावेजों की जांच कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर सूचना या आपत्ति की प्रक्रिया भी होती है। मामला अविवादित है या विवादित, इसके आधार पर समय अलग हो सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा में दिए गए सरकारी उत्तर के अनुसार अविवादित नामांतरण के लिए 30 दिन और विवादित नामांतरण के लिए पांच माह की समय-सीमा बताई गई है। आवेदन में कमी या आपत्ति होने पर आवेदक से अतिरिक्त जानकारी मांगी जा सकती है।

नामांतरण आदेश होने के बाद अपडेटेड खसरा और बी-1 में नया नाम दर्ज हुआ है या नहीं, यह MP Bhulekh पोर्टल पर जांचें। रिकॉर्ड में गलती दिखे तो संबंधित तहसील कार्यालय में आवेदन क्रमांक और दस्तावेजों के साथ संपर्क करें।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp