MP Marriage Registration: मध्य प्रदेश में शादी का सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं? जानें फीस और दस्तावेज
भोपाल। मध्य प्रदेश में विवाह के बाद उसका पंजीयन कराकर विवाह प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है। यह प्रमाण पत्र शादी का सरकारी रिकॉर्ड और वैवाहिक संबंध का प्रमाण होता है। पासपोर्ट, वीजा, बैंक और कुछ सरकारी या कानूनी प्रक्रियाओं में इसकी जरूरत पड़ सकती है। राज्य में विवाह पंजीयन के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। आवेदन संबंधित सरकारी पोर्टल पर किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर एमपी ऑनलाइन कियोस्क की मदद भी ली जा सकती है।
कहां करें ऑनलाइन आवेदन
मध्य प्रदेश सरकार के ई-सर्विस पोर्टल पर “विवाह पंजीयन” ऑनलाइन सेवा उपलब्ध है। शहरी क्षेत्रों में नगर निगम, नगर पालिका या नगर परिषद के माध्यम से ई-नगर पालिका पोर्टल पर भी विवाह प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कर लॉगिन करना होगा। इसके बाद विवाह पंजीयन का फॉर्म भरकर दूल्हा-दुल्हन की जानकारी, विवाह की तारीख और स्थान सहित मांगी गई जानकारियां दर्ज करनी होंगी।
फॉर्म जमा करने से पहले नाम, जन्मतिथि, पता और विवाह की तारीख जैसे विवरण दस्तावेजों से मिलाकर देख लें। गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज होने पर आवेदन में आपत्ति आ सकती है और प्रक्रिया में देरी हो सकती है। ऑनलाइन आवेदन पूरा होने के बाद उसकी रसीद या आवेदन क्रमांक सुरक्षित रखें, जिससे आवेदन की स्थिति देखी जा सके।
कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी
आवेदन के साथ दूल्हा-दुल्हन के पहचान और उम्र संबंधी दस्तावेज जमा करने होते हैं। आम तौर पर आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र अथवा अंकसूची, दोनों के पासपोर्ट आकार के फोटो, विवाह का निमंत्रण पत्र और विवाह समारोह के फोटो मांगे जाते हैं। सरकारी जिला सेवा पृष्ठों पर दूल्हा और दुल्हन के चार-चार पासपोर्ट आकार के फोटो तथा विवाह समारोह के तीन पोस्टकार्ड आकार के फोटो का उल्लेख है।
कुछ मामलों में वर-वधू के माता-पिता के पहचान पत्र भी मांगे जा सकते हैं। विवाह आर्य समाज या किसी पंजीकृत पुरोहित/संस्था के माध्यम से हुआ हो तो संबंधित संस्था या पुरोहित का प्रमाण पत्र देना पड़ सकता है। आवेदन में दो गवाहों का विवरण देना होता है। गवाहों को पहचान पत्र सहित पंजीयन की प्रक्रिया के दौरान उपस्थित रहने के लिए कहा जा सकता है।
दस्तावेजों की सूची स्थानीय निकाय और विवाह की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए आवेदन शुरू करने से पहले अपने क्षेत्र के पोर्टल पर उपलब्ध नवीनतम चेकलिस्ट देखना उचित है।
आवेदन के बाद क्या होगा
ऑनलाइन फॉर्म और दस्तावेज जमा करने के बाद संबंधित अधिकारी आवेदन की जांच करेंगे। जरूरत पड़ने पर आवेदक को मूल दस्तावेज दिखाने या अतिरिक्त जानकारी देने के लिए बुलाया जा सकता है। सरकारी सेवा विवरण के अनुसार, विवाह प्रमाण पत्र सेवा के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है और सेवा की निर्धारित समय-सीमा 30 दिन बताई गई है; सरकारी अवकाश इसमें शामिल नहीं होते।
कुछ स्थानीय निकायों में दूल्हा-दुल्हन की व्यक्तिगत उपस्थिति, अंगूठे का निशान और वेबकैम से फोटो लेने की प्रक्रिया भी हो सकती है। आवेदन स्वीकृत होने के बाद प्रमाण पत्र पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है या संबंधित कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। आवेदन क्रमांक से पोर्टल पर स्थिति जांचते रहें।
फीस कितनी लगती है
मध्य प्रदेश के अनिवार्य विवाह पंजीयन नियमों में पंजीयन के समय प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 30 रुपये शुल्क का उल्लेख है। ऑनलाइन आवेदन या स्थानीय निकाय की सेवा के दौरान पोर्टल पर अतिरिक्त सेवा या भुगतान शुल्क दिख सकता है। इसलिए भुगतान करने से पहले पोर्टल पर प्रदर्शित कुल राशि और रसीद जरूर जांचें। नियमों के अनुसार प्रमाण पत्र हिंदी में जारी किया जाता है; मांग करने पर अंग्रेजी संस्करण भी दिया जा सकता है।
देरी होने पर रखें ध्यान
मध्य प्रदेश के विवाह पंजीयन नियमों में विवाह के 30 दिनों के भीतर ज्ञापन जमा करने का प्रावधान है। देरी होने पर कारण बताना पड़ सकता है और स्थानीय निकाय अतिरिक्त शपथपत्र या दस्तावेज मांग सकता है। कुछ जिला सेवा सूचियों में 21 दिनों से अधिक देरी की स्थिति में वर-वधू का शपथपत्र देने का उल्लेख है। इसलिए विवाह के बाद जल्द आवेदन करना बेहतर है।
