विवाह सहायता योजना में ₹30.18 करोड़ के कथित घोटाले पर ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व जनपद CEO शोभित त्रिपाठी गिरफ्तार
भोपाल की विशेष PMLA अदालत ने 9 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेजा, 5,923 संदिग्ध विवाह प्रकरणों की जांच जारी
भोपाल। मध्य प्रदेश की विवाह सहायता योजना में करीब 30.18 करोड़ रुपये के कथित फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की भोपाल इकाई ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी शोभित त्रिपाठी को धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत गिरफ्तार किया है।
ईडी ने शोभित त्रिपाठी को 2 सितंबर को गिरफ्तार किया और अगले दिन भोपाल की विशेष PMLA अदालत में पेश किया। अदालत ने पूछताछ के लिए उन्हें 9 सितंबर तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया। ईडी अब कथित घोटाले की रकम, उसके लेन-देन और इस प्रकरण से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका के संबंध में पूछताछ करेगी।
यह मामला वर्ष 2019 से नवंबर 2021 के बीच सिरोंज जनपद पंचायत में विवाह सहायता योजना के तहत स्वीकृत किए गए 5,923 संदिग्ध प्रकरणों से जुड़ा है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों के माध्यम से सरकारी धन का भुगतान कराया गया। हालांकि आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।
ED ने 2 सितंबर को किया गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भोपाल जोनल कार्यालय ने सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन CEO शोभित त्रिपाठी को PMLA के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया, जहां से ईडी को 9 सितंबर तक उनकी हिरासत मिली।
ईडी की टीम अब यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि विवाह सहायता योजना से कथित रूप से निकाली गई रकम कहां पहुंची और इसका लाभ किन लोगों ने उठाया। जांच में बैंक खाते, डिजिटल रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज और सरकारी पोर्टल पर दर्ज लाभार्थियों की जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
5,923 संदिग्ध विवाह मामलों में भुगतान का आरोप
ईडी के अनुसार, कथित फर्जीवाड़ा शोभित त्रिपाठी के सिरोंज जनपद पंचायत CEO के रूप में कार्यरत रहने के दौरान हुआ। वर्ष 2019 से नवंबर 2021 तक विवाह सहायता योजना के अंतर्गत 5,923 संदिग्ध प्रकरणों में करीब 30.18 करोड़ रुपये स्वीकृत एवं वितरित किए जाने का आरोप है।
यह सहायता पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के परिवारों की पात्र बेटियों के विवाह के लिए दी जाती थी। प्रत्येक पात्र हितग्राही को 51 हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान था। आरोप है कि योजना में अपात्र लोगों के आवेदन स्वीकार किए गए और कई मामलों में जाली दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किया गया।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित लाभार्थियों के नाम पर बैंक खाते खोलकर उनमें सरकारी सहायता राशि जमा कराई गई। बाद में यह रकम ATM और अन्य माध्यमों से निकाल ली गई। ईडी अब इन खातों की पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है।
कोविड लॉकडाउन के दौरान भी दिखाए गए विवाह
मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि से संबंधित है। जांच में कथित रूप से ऐसे विवाह प्रकरण भी सामने आए, जिनमें उस समय सहायता राशि जारी की गई, जब महामारी संबंधी प्रतिबंध लागू थे और बड़े स्तर पर विवाह आयोजनों पर रोक थी।
इन प्रकरणों के आधार पर जांच एजेंसियों को आवेदन एवं दस्तावेजों की वास्तविकता पर संदेह हुआ। अब यह जांच की जा रही है कि जिन लोगों के नाम पर राशि निकाली गई, क्या वास्तव में उनका विवाह हुआ था और वे योजना की पात्रता पूरी करते थे या नहीं।
ईडी लाभार्थियों की पहचान, विवाह प्रमाणपत्र, श्रमिक पंजीकरण, बैंक खातों और सरकारी पोर्टल पर अपलोड किए गए रिकॉर्ड की जांच कर रही है। संदिग्ध प्रकरणों में इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों को तैयार करने तथा सत्यापित करने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
EOW की FIR के आधार पर शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच
विवाह सहायता योजना में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद मध्य प्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने शोभित त्रिपाठी और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोपों में धोखाधड़ी, सरकारी धन का गबन और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित प्रावधान शामिल थे।
EOW की FIR के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की। ईडी यह पता लगा रही है कि कथित घोटाले से प्राप्त राशि को कहां निवेश किया गया और क्या उसे वैध कमाई के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास हुआ।
इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर योगेंद्र शर्मा और हेमंत साहू के नाम भी पहले सामने आ चुके हैं। आरोप है कि सरकारी पोर्टल पर कथित रूप से गलत जानकारी अपलोड करने, जाली आवेदन तैयार करने और अपात्र खातों में राशि हस्तांतरित कराने में इनकी भूमिका रही। सभी आरोप जांच और न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
सात ठिकानों पर पहले हो चुकी है तलाशी
अक्टूबर 2025 में ईडी ने इस मामले में भोपाल, विदिशा, कटनी और छतरपुर जिलों के सात ठिकानों पर तलाशी ली थी। यह कार्रवाई शोभित त्रिपाठी और उनसे जुड़े लोगों एवं संस्थानों के परिसरों पर की गई थी।
तलाशी के दौरान ईडी ने संपत्ति के दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद करने का दावा किया था। इसके साथ ही बैंक खातों और म्यूचुअल फंड में जमा करीब 21.7 लाख रुपये की राशि फ्रीज किए जाने की जानकारी दी गई थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित अपराध से प्राप्त धन का इस्तेमाल अलग-अलग भुगतान, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अचल संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया। आरोप यह भी है कि रकम को वैध दिखाने के लिए रिश्तेदारों और उनसे जुड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बैंक खातों का उपयोग किया गया।
गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ने की संभावना
शोभित त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद ईडी की जांच और तेज होने की संभावना है। हिरासत के दौरान एजेंसी उनसे संदिग्ध लाभार्थियों, बैंक खातों, दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और कथित रकम के निवेश के संबंध में सवाल पूछ सकती है।
ईडी यह भी जांच सकती है कि पूरा मामला कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित था या इसके पीछे बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड से मिलने वाली जानकारी के आधार पर अन्य संबंधित लोगों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा सकता है।
फिलहाल शोभित त्रिपाठी 9 सितंबर तक ईडी की हिरासत में रहेंगे। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं और उन्हें कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है। मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच जारी है।
