21 साल बाद मध्य प्रदेश में लौटी सार्वजनिक बस सेवा, 351 बसों के साथ मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू
भोपाल। MP में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। करीब 21 साल के अंतराल के बाद प्रदेश में संगठित सार्वजनिक बस सेवा को नए स्वरूप में शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ और ‘पीएम ई-बस सेवा’ का शुभारंभ किया। दोनों नेताओं ने रिमोट का बटन दबाकर 351 बसों को हरी झंडी दिखाई। पहले चरण में यह सेवा भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड को जोड़ेगी।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से संबंधित विशेष पुस्तिका का विमोचन किया गया। परिवहन क्षेत्र में शोध, नवाचार और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण एमओयू भी किए गए। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर कनेक्टिविटी वाला सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है।
351 बसों से हुई शुरुआत, सात शहरों को जोड़ा गया
पहले चरण में कुल 351 बसें संचालित की जा रही हैं। इनमें 120 इंटरसिटी और 231 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इंदौर को सबसे अधिक 145 बसें मिली हैं, जिनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। भोपाल में 106 बसें चलेंगी, जिनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी बसें हैं। जबलपुर को 67 बसें मिली हैं, जिनमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी बसें शामिल हैं। इसके अलावा रीवा में 18, देवास में 10, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें संचालित होंगी।
सरकार ने आने वाले वर्षों में इस नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने की योजना बनाई है। पहले वर्ष करीब 1,500 बसें संचालित करने का लक्ष्य है। इसके बाद हर साल लगभग 2,500 से 3,000 बसें जोड़ने की योजना है। वर्ष 2031 तक प्रदेश में करीब 15,000 बसों का नेटवर्क तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों तक भी बस कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
21 साल बाद आम आदमी के लिए परिवहन सेवा शुरू
प्रदेश के परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि करीब 21 साल के लंबे इंतजार के बाद आम नागरिकों के लिए सुलभ परिवहन सेवा शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर इस सेवा की शुरुआत होना महत्वपूर्ण है। मंत्री के अनुसार योजना तैयार करते समय निजी बस संचालकों के हितों को भी ध्यान में रखा गया है।
नई व्यवस्था में निजी बस संचालकों की भागीदारी के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार के अनुसार इससे निजी ऑपरेटरों को बस संचालन के साथ गैर-किराया आय के अवसर भी मिल सकते हैं।
गांवों तक पहुंचेगी बस सेवा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़कों के विस्तार के साथ सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को भी मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर इंटरसिटी और इंट्रासिटी सेवाओं के अलावा आने वाले समय में अंतरराज्यीय बस सेवाओं का भी विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अभी छोटे वाहनों के माध्यम से आवागमन होता है, वहां भी बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की योजना के तहत ग्रामीण कनेक्टिविटी को बढ़ाकर बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों को बस नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। आधिकारिक योजना के अनुसार 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक परिवहन सेवा विस्तार का लक्ष्य बताया गया है।
GPS, CCTV और पैनिक बटन से लैस होंगी बसें
नई बस सेवा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। बसों में GPS आधारित लाइव लोकेशन ट्रैकिंग, CCTV कैमरे और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे यात्रियों को बस की लोकेशन और संचालन की जानकारी मिल सकेगी, वहीं आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने के लिए पैनिक बटन का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
बसों के संचालन की रियल-टाइम निगरानी के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। चालकों को आधुनिक तकनीक, यातायात सुरक्षा मानकों और इलेक्ट्रिक तथा सीएनजी बसों के संचालन का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की व्यवस्था भी की जा रही है।
‘लोकपथ ऐप’ से मिलेगी बसों की लाइव जानकारी
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने ‘लोकपथ ऐप’ के माध्यम से यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। उनके अनुसार ऐप के माध्यम से यात्री बस की उपलब्धता और संचालन की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा गंतव्य, पर्यटन स्थल, टोल नाके और अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
इससे यात्रियों को यात्रा की योजना बनाने में आसानी होने और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने की उम्मीद है।
नितिन गडकरी ने परिवहन में हरित तकनीक पर दिया जोर
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में परिवहन क्षेत्र में प्रदूषण कम करने और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने वैकल्पिक ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों और नई तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया।
गडकरी ने E20 ईंधन के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग हो रहा है। उन्होंने इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और हाइड्रोजन आधारित वाहनों के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि नागपुर स्थित अपने खेत में वे सौर ऊर्जा से चार्ज होने वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करते हैं और दिल्ली में हाइड्रोजन कार का उपयोग करते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक बस निर्माण की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देवास में ई-बसों का निर्माण किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए 972 बसों को मंजूरी दी है, जबकि राज्य में भविष्य में लगभग 25 हजार बसों की क्षमता विकसित किए जाने की संभावना बताई गई है।
सार्वजनिक परिवहन के विस्तार पर सरकार का जोर
नई बस सेवा को मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। 351 बसों से शुरू हुई यह व्यवस्था आने वाले वर्षों में बड़े नेटवर्क में बदलने की योजना के साथ शुरू की गई है। सरकार का लक्ष्य शहरों के साथ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
पहले चरण में सात शहरों को शामिल किया गया है, जबकि आगे बसों की संख्या और रूट दोनों बढ़ाने की योजना है। 2031 तक 15 हजार बसों के लक्ष्य के साथ सरकार सार्वजनिक परिवहन को निजी ऑपरेटरों की भागीदारी, डिजिटल निगरानी, सुरक्षा सुविधाओं और वैकल्पिक ईंधन तकनीक से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
