MP Kisan News: मध्यप्रदेश के 5 हजार डिफॉल्टर किसानों को मिलेगी बड़ी राहत, सरकार ला सकती है ‘कवच योजना’
MP सरकार प्रदेश के हजारों किसानों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। सहकारी बैंकों से जुड़े करीब 5 हजार डिफॉल्टर किसानों को दोबारा राहत देने के लिए सरकार ने एक नई योजना का प्रस्ताव तैयार किया है। इस योजना का नाम ‘कवच योजना’ रखा गया है। इसे मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
यदि कैबिनेट से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो ऐसे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जो अपनी गलती से नहीं बल्कि सहकारी समितियों के कर्मचारियों और पदाधिकारियों की गड़बड़ी के कारण डिफॉल्टर घोषित हो गए थे। योजना के तहत किसानों के बकाया कर्ज के एक हिस्से का भुगतान राज्य सरकार और एक हिस्से का भुगतान अपेक्स बैंक द्वारा किए जाने का प्रस्ताव है।
फर्जीवाड़े के कारण डिफॉल्टर बने किसान
दरअसल, प्रदेश में ऐसे कई किसान हैं जिन्होंने कुछ साल पहले सहकारी बैंकों और समितियों से कृषि ऋण लिया था। इन किसानों ने बैंक से मिले लोन की राशि खाद, बीज और खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए समितियों में जमा कराई थी।
आरोप है कि कई समितियों के प्रबंधकों और सचिवों ने किसानों द्वारा जमा की गई राशि का सही हिसाब नहीं रखा और कुछ मामलों में राशि का दुरुपयोग किया गया। किसानों को भुगतान की रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
जब बाद में बैंक और समितियों का रिकॉर्ड जांचा गया तो कई किसानों के खाते में भुगतान नहीं दिखा। इसके चलते किसान समय पर ऋण जमा नहीं कर पाए और उन्हें डिफॉल्टर की श्रेणी में डाल दिया गया।
जांच में सामने आई थी बड़ी गड़बड़ी
इस पूरे मामले की जांच के दौरान सहकारी समितियों में कई स्तरों पर अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद कई समिति प्रबंधकों और पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई।
कुछ मामलों में गबन की गई राशि की वसूली भी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद जिन किसानों के नाम डिफॉल्टर सूची में शामिल हो गए थे, उन्हें अभी तक राहत नहीं मिल सकी है।
डिफॉल्टर होने के कारण इन किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वे सहकारी बैंकों से नया कृषि ऋण नहीं ले पा रहे हैं और समितियों से खाद, बीज जैसी जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं।
सरकार देगी बकाया भुगतान में सहयोग
प्रस्तावित कवच योजना का उद्देश्य ऐसे किसानों को डिफॉल्टर की स्थिति से बाहर निकालना है। योजना के तहत किसानों के बकाया ऋण का कुछ हिस्सा सरकार और कुछ हिस्सा अपेक्स बैंक वहन कर सकती है।
सरकार का मानना है कि जिन किसानों को धोखाधड़ी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण नुकसान उठाना पड़ा है, उन्हें राहत देना जरूरी है। इससे किसानों को दोबारा खेती के लिए ऋण सुविधा मिल सकेगी और वे कृषि गतिविधियों को सुचारू रूप से चला पाएंगे।
कैबिनेट बैठक में हो सकता है फैसला
कवच योजना का प्रस्ताव अब राज्य कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यदि मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो योजना को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
इसके अलावा कैबिनेट बैठक में अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सकती है। इनमें योजनाओं की निरंतरता और पेंशन से जुड़े विषय शामिल हैं।
किसानों को मिलेगा आर्थिक सहारा
MP में बड़ी संख्या में किसान सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खेती के लिए ऋण लेते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
किसान संगठनों का कहना है कि लंबे समय से डिफॉल्टर की समस्या झेल रहे किसानों को राहत मिलने से उन्हें खेती में दोबारा निवेश करने का अवसर मिलेगा। साथ ही सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में किसानों का भरोसा भी मजबूत होगा।
डिफॉल्टर किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना
किसानों के लिए डिफॉल्टर का टैग सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं बल्कि भविष्य की खेती पर भी असर डालता है। डिफॉल्टर किसान न तो आसानी से नया ऋण ले पाते हैं और न ही सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा पाते हैं।
कवच योजना के जरिए सरकार ऐसे किसानों को वित्तीय संकट से बाहर निकालने की कोशिश कर रही है। इससे हजारों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल सभी की नजरें कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के करीब 5 हजार किसानों के लिए यह बड़ा फैसला साबित हो सकता है।
