राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर, MP-Jharkhand के विधायकों को दूसरे राज्यों में भेजने की तैयारी
राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज
18 जून 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले देश के कई राज्यों में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। MP-Jharkhand में खास तौर पर कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग और विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी कारण पार्टी ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने और एकजुटता बनाए रखने के लिए रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
राजनीतिक गलियारों में इसे “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है, जहां मतदान से पहले विधायकों को दूसरे राज्यों में शिफ्ट किया जाता है।
कांग्रेस की रणनीति: विधायकों को कर्नाटक भेजने की तैयारी
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर मतदान होना है, जिसके चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों को क्रॉस वोटिंग से बचाने के लिए उन्हें कर्नाटक भेजने की योजना बनाई है।
सूत्रों के अनुसार, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आवास पर कांग्रेस विधायक दल (CLP) की देर रात बैठक हुई, जिसमें विधायकों से राय ली गई कि क्या उन्हें मतदान तक किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। बैठक में लगभग 60 विधायकों ने हिस्सा लिया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने वर्चुअल रूप से बैठक में भाग लिया।
पार्टी का मानना है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार होने के कारण वहां विधायकों को सुरक्षित माहौल मिल सकता है और किसी प्रकार के दबाव या प्रलोभन की संभावना कम होगी।
क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका
कांग्रेस की चिंता का मुख्य कारण क्रॉस वोटिंग और विधायकों की संभावित खरीद-फरोख्त है। पार्टी का मानना है कि भाजपा इस चुनाव में तीसरी सीट को लेकर पूरी रणनीति के साथ मैदान में है और अतिरिक्त वोट जुटाने की कोशिशें की जा सकती हैं।
इसी आशंका के चलते कांग्रेस ने पहले से ही अपने विधायकों को एकजुट रखने की कवायद तेज कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम 2020 के राजनीतिक संकट की याद दिलाता है, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक विधायकों के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ था।
भाजपा के तीसरे उम्मीदवार से बढ़ी कांग्रेस की चिंता
मध्य प्रदेश में भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारने के बाद राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं। भाजपा ने महेश केवट को तीसरे प्रत्याशी के रूप में उतारा है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
शुरुआत में माना जा रहा था कि कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन को एक सीट आसानी से मिल जाएगी, लेकिन अब तीसरी सीट को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा अब अतिरिक्त वोट जुटाने और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं पर फोकस कर रही है, जिससे कांग्रेस की रणनीति और दबाव में आ गई है।
मध्य प्रदेश में कांग्रेस की बड़ी बैठक
इस स्थिति को देखते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक में रणनीति, सुरक्षा और एकजुटता बनाए रखने पर चर्चा हुई। विधायकों से राय ली गई कि क्या उन्हें मतदान तक दूसरे राज्य में शिफ्ट किया जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, अधिकांश विधायकों ने पार्टी के फैसले पर सहमति जताई, हालांकि अभी अंतिम निर्णय औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया गया है।
झारखंड में भी रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की तैयारी
मध्य प्रदेश के साथ-साथ झारखंड में भी कांग्रेस इसी तरह की रणनीति पर काम कर रही है। यहां भी राज्यसभा चुनाव को देखते हुए विधायकों को तेलंगाना भेजने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, झारखंड के कांग्रेस विधायक मतदान तक तेलंगाना के एक रिसॉर्ट में ठहर सकते हैं, ताकि किसी भी तरह की राजनीतिक दबाव या प्रलोभन की स्थिति से बचा जा सके।
हालांकि पार्टी की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बताता है कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या बल का खेल नहीं रह गया है, बल्कि अब यह पूरी तरह रणनीति और विश्वास की परीक्षा बन चुका है।
विश्लेषकों के अनुसार, छोटे दलों के विधायक और निर्दलीय सदस्य इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में लगे हुए हैं।
निष्कर्ष
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस द्वारा अपने विधायकों को कर्नाटक और तेलंगाना भेजने की तैयारी यह दर्शाती है कि पार्टी क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक दबाव को लेकर गंभीर है।
मध्य प्रदेश और झारखंड दोनों ही राज्यों में यह रणनीति राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ते तनाव का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” चुनावी परिणामों को किस हद तक प्रभावित करती है और क्या यह कांग्रेस की एकजुटता को बनाए रखने में सफल होती है या नहीं।
