मध्य प्रदेश में खाद वितरण की नई व्यवस्था लागू: अब ‘हाइब्रिड मोड’ से मिलेगा उर्वरक, मूंग-उड़द की स्लॉट बुकिंग 10 अगस्त तक बढ़ी
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने और कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण फैसले लागू किए हैं। पहला फैसला खाद वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ‘हाइब्रिड मोड’ लागू करने का है, जबकि दूसरा फैसला ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की सरकारी खरीद से जुड़ा है। सरकार ने किसानों की मांग को देखते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त 2026 तथा सरकारी खरीद की अंतिम तिथि 20 अगस्त 2026 कर दी है।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना, कालाबाजारी और अनियमितताओं पर रोक लगाना तथा सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक सरल और पारदर्शी बनाना है।
खाद वितरण में लागू हुआ ‘हाइब्रिड मोड’
प्रदेश में 30 जुलाई 2026 से खाद वितरण के लिए हाइब्रिड मोड लागू कर दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत खाद वितरण केवल डिजिटल रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रत्येक बिक्री का भौतिक रिकॉर्ड भी अनिवार्य रूप से रखा जाएगा।
सरकार का मानना है कि केवल ऑनलाइन प्रणाली पर निर्भर रहने से कई बार तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं। वहीं केवल मैनुअल रिकॉर्ड रखने से पारदर्शिता प्रभावित होती है। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं को मिलाकर हाइब्रिड मॉडल तैयार किया गया है।
किसानों से ली जाएगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था के अनुसार अब खाद विक्रेताओं को प्रत्येक किसान का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। इसके तहत किसान से निम्न जानकारी लेना अनिवार्य होगा—
- आधार कार्ड की फोटोकॉपी
- मोबाइल नंबर
- किसान का नाम एवं पता
- खरीदे गए खाद का प्रकार
- कंपनीवार खाद की मात्रा
- बिक्री की तारीख
- विक्रेता के हस्ताक्षर एवं रिकॉर्ड
यह पूरी जानकारी एक निर्धारित रजिस्टर में दर्ज की जाएगी।
ऑनलाइन पोर्टल पर भी होगी एंट्री
रजिस्टर में दर्ज किए गए सभी विवरण बाद में विभागीय पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। इससे सरकार के पास खाद वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
यदि किसी जिले या दुकान पर खाद की कमी, कालाबाजारी या अधिक मूल्य पर बिक्री जैसी शिकायत मिलती है तो विभाग रिकॉर्ड की जांच कर तुरंत कार्रवाई कर सकेगा।
पुराने रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा
कृषि विभाग ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि 30 जुलाई तक ई-विकास प्रणाली में दर्ज समस्त रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
इन रिकॉर्डों की आवश्यकता किसी भी समय जांच या सत्यापन के दौरान पड़ सकती है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्यों जरूरी पड़ा हाइब्रिड सिस्टम?
हर वर्ष खरीफ और रबी सीजन में खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है। कई स्थानों पर किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ता है, जबकि कुछ जगहों पर खाद की कालाबाजारी और फर्जी बिक्री की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
नई व्यवस्था से सरकार को निम्न लाभ मिलने की उम्मीद है—
- खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- एक ही किसान के नाम पर बार-बार खरीद पर रोक लगेगी।
- कालाबाजारी पर नियंत्रण होगा।
- वास्तविक किसानों तक खाद पहुंच सकेगी।
- जिलेवार खाद उपलब्धता की निगरानी आसान होगी।
- भविष्य की योजना बनाने में सरकार को सटीक आंकड़े मिलेंगे।
मूंग और उड़द उत्पादक किसानों को बड़ी राहत
प्रदेश सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की सरकारी खरीद के लिए समय सीमा बढ़ा दी है।
पहले निर्धारित अवधि समाप्त होने के कारण कई किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए थे। किसानों की मांग और विभिन्न जिलों से प्राप्त सुझावों को देखते हुए सरकार ने नई समय-सीमा घोषित की है।
10 अगस्त तक होगी स्लॉट बुकिंग
अब किसान 10 अगस्त 2026 तक ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुक कर सकेंगे।
जिन किसानों ने अभी तक स्लॉट बुक नहीं कराया है, वे निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण कर खरीद केंद्र का चयन कर सकते हैं।
20 अगस्त तक जारी रहेगी सरकारी खरीद
सरकारी खरीद केंद्रों पर मूंग और उड़द की खरीद अब 20 अगस्त 2026 तक जारी रहेगी।
इस निर्णय से हजारों किसानों को अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा।
दूसरे स्लॉट की भी सुविधा
राज्य सरकार ने उन किसानों को भी राहत दी है जिन्होंने 30 जुलाई तक अपनी उपज बेच दी थी।
ऐसे किसान यदि पात्रता रखते हैं तो वे ई-उपार्जन पोर्टल पर दोबारा Second Slot Booking कर सकते हैं।
इससे जिन किसानों के पास अतिरिक्त उपज है, वे भी सरकारी खरीद का लाभ उठा सकेंगे।
उपार्जन नीति में किया गया संशोधन
विपणन वर्ष 2026-27 की फसल उपार्जन नीति में भी आंशिक संशोधन किया गया है।
सरकार ने सरकारी खरीद की अधिकतम सीमा निर्धारित की है ताकि खरीद प्रक्रिया संतुलित रहे और बाजार व्यवस्था प्रभावित न हो।
नई व्यवस्था के अनुसार—
- मूंग के कुल उत्पादन का अधिकतम 60 प्रतिशत तक उपार्जन किया जाएगा।
- उड़द के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत तक सरकारी खरीद की जाएगी।
इसका उद्देश्य सरकारी खरीद और खुले बाजार के बीच संतुलन बनाए रखना है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
नई व्यवस्था लागू होने से किसानों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है।
1. समय पर खाद उपलब्ध होगी
रिकॉर्ड आधारित वितरण प्रणाली से खाद का बेहतर प्रबंधन होगा और किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
2. कालाबाजारी पर लगेगी रोक
प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से खाद की अवैध बिक्री और जमाखोरी पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
3. सरकारी खरीद का मिलेगा अधिक अवसर
स्लॉट बुकिंग की तिथि बढ़ने से वे किसान भी लाभ उठा सकेंगे जो पहले किसी कारणवश पंजीकरण नहीं करा पाए थे।
4. अतिरिक्त उपज बेचने का मौका
दूसरे स्लॉट की सुविधा मिलने से पात्र किसान अतिरिक्त उत्पादन भी समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे।
5. पारदर्शिता बढ़ेगी
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों रिकॉर्ड होने से किसी भी प्रकार की अनियमितता की जांच आसान होगी।
किसानों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?
यदि किसान सरकारी खरीद का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें कुछ आवश्यक बातों का ध्यान रखना चाहिए—
- समय रहते ई-उपार्जन पोर्टल पर स्लॉट बुक करें।
- आधार कार्ड एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें।
- निर्धारित खरीद केंद्र पर तय तारीख को ही उपज लेकर पहुंचें।
- एसएमएस अथवा पोर्टल पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।
- केवल स्वच्छ एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उपज ही खरीद केंद्र पर ले जाएं।
खाद विक्रेताओं की जिम्मेदारी भी बढ़ी
नई व्यवस्था में उर्वरक विक्रेताओं की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है।
अब उन्हें—
- प्रत्येक बिक्री का सही रिकॉर्ड रखना होगा।
- किसानों के आधार एवं मोबाइल नंबर दर्ज करने होंगे।
- कंपनीवार खाद की मात्रा लिखनी होगी।
- विभागीय पोर्टल पर समय पर जानकारी अपलोड करनी होगी।
- पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित रखने होंगे।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
कृषि विभाग ने दिए आवश्यक निर्देश
कृषि विभाग के अधिकारियों ने सभी जिला कृषि अधिकारियों और खाद विक्रेताओं को नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का कहना है कि यदि कहीं भी अनियमितता, कालाबाजारी या रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही किसानों से भी अपील की गई है कि खाद खरीदते समय अपनी रसीद अवश्य लें और किसी भी प्रकार की शिकायत होने पर तत्काल संबंधित कृषि विभाग या जिला प्रशासन को सूचित करें।
सरकार का उद्देश्य
प्रदेश सरकार का कहना है कि इन दोनों फैसलों का मुख्य उद्देश्य किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना, सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना है। हाइब्रिड मोड लागू होने से खाद वितरण व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी, जबकि स्लॉट बुकिंग की समय-सीमा बढ़ने से हजारों किसानों को अपनी मूंग और उड़द की फसल समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिलेगा।
