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“MP IFS-SFS Transfer 2025: DFO नेहा श्रीवास्तव समेत 7 अफसरों के बड़े तबादले, वन विभाग में प्रशासनिक सुधार”

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Published On: 11 November 2025
MP IFS SFS Transfer

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MP IFS-SFS Transfer 2025: मध्य प्रदेश वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, DFO नेहा श्रीवास्तव समेत 7 अफसरों के तबादले

इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, नर्मदापुरम, भोपाल, रीवा, शहडोल, सागर (11 नवंबर 2025) – मध्य प्रदेश वन विभाग (MP Forest Department) में सोमवार, 10 नवंबर को बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। MP IFS-SFS Transfer के तहत चार IFS (Indian Forest Service) अधिकारियों के साथ तीन राज्य वन सेवा (SFS) अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस बार के ट्रांसफर सूची में DFO नेहा श्रीवास्तव का नाम भी शामिल है, जिनके खिलाफ हाल ही में विवादित मामले सामने आए थे।

MP IFS-SFS Transfer: DFO नेहा श्रीवास्तव का तबादला

वन विभाग में MP IFS-SFS Transfer के सबसे चर्चित नामों में DFO नेहा श्रीवास्तव का नाम भी शामिल है। बालाघाट से कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पर 3 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाने वाली DFO नेहा श्रीवास्तव को अब मध्य प्रदेश राज्य लघुवनोंपच संघ में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, यह तबादला आरोप गलत पाए जाने के बाद किया गया है। नेहा श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के बाद प्रशासन ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी।

बालाघाट दक्षिण DFO अधर गुप्ता पर कार्रवाई

MP IFS-SFS Transfer में एक और अहम नाम बालाघाट दक्षिण DFO अधर गुप्ता का है। उनके खिलाफ कार्रवाई बाघ के शिकार और उसके पोस्टमार्टम किए बिना जलाने के मामले में हुई। अधिकारी बिना किसी को जानकारी दिए लंबी छुट्टी पर चले गए थे।

इसी क्रम में, सुजीत जी पाटिल को मुरैना डीएफओ से भोपाल मुख्यालय में पदस्थ किया गया। यह बदलाव वन विभाग के प्रशासनिक सुधार और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्य वन सेवा (SFS) अधिकारियों का ट्रांसफर

MP IFS-SFS Transfer में केवल IFS अधिकारियों तक ही सीमित नहीं रहा। राज्य वन सेवा (SFS) के कई अधिकारियों के भी तबादले किए गए हैं।

  • माधव सिंह मौर्य, असिस्टेंट डायरेक्टर पन्ना टाइगर रिजर्व, को मंडला का प्रभारी DFO बनाया गया।

  • हरिश्चंद्र बघेल, राज्य वन विकास निगम से मुरैना के प्रभारी DFO बने।

  • रमेश सिंह धुर्वे, नीमच से उत्तर बालाघाट का प्रभारी DFO नियुक्त हुए।

ये तबादले वन विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में लिए गए कदम हैं।

IFS Transfer

DFO नेहा श्रीवास्तव और अधर गुप्ता का विवाद

DFO नेहा श्रीवास्तव का मामला 18 अगस्त 2025 को सुर्खियों में आया, जब उन्होंने अपने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने उनसे रिश्वत मांगने की कोशिश की थी।

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन ने दो सदस्यीय महिला जांच टीम का गठन किया, जिसमें भोपाल से ACF स्तर की अधिकारी कमोलिका मोहंता और बैतूल से CCF वासू कनौजिया शामिल थे। जांच टीम ने मामले की निष्पक्ष जाँच करने के बाद रिपोर्ट शासन को सौंपी।

इसके बाद DFO नेहा श्रीवास्तव का प्रतिनियुक्ति पर तबादला किया गया। अधर गुप्ता के मामले में भी प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें जिम्मेदारी से हटाया।

MP IFS-SFS Transfer: पूरे प्रशासनिक बदलाव का महत्व

वन विभाग में इस तरह का MP IFS-SFS Transfer इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे विभाग की जिम्मेदारियों और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है। अधिकारियों के नियमित स्थानांतरण से कार्यक्षेत्र में सुधार, भ्रष्टाचार की रोकथाम और वन संरक्षण की बेहतर निगरानी संभव होती है।

विशेष रूप से SFS अधिकारियों का तबादला टाइगर रिजर्व और वन क्षेत्रीय प्रशासन की जिम्मेदारियों के अनुरूप किया गया है। इससे वन्यजीव संरक्षण, वन्य प्रजातियों के संरक्षण और क्षेत्रीय प्रबंधन में सुधार की उम्मीद है।

MP IFS-SFS Transfer की पूरी सूची (मुख्य नाम)

  1. DFO नेहा श्रीवास्तव – बालाघाट से मध्य प्रदेश राज्य लघुवनोंपच संघ में प्रतिनियुक्ति

  2. DFO अधर गुप्ता – बालाघाट दक्षिण से हटाए गए

  3. सुजीत जी पाटिल – मुरैना डीएफओ से भोपाल मुख्यालय में पदस्थ

  4. माधव सिंह मौर्य – पन्ना टाइगर रिजर्व से मंडला प्रभारी DFO

  5. हरिश्चंद्र बघेल – राज्य वन विकास निगम से मुरैना प्रभारी DFO

  6. रमेश सिंह धुर्वे – नीमच से उत्तर बालाघाट प्रभारी DFO

  7. चौथा IFS अफसर – प्रशासनिक सुधार के लिए अन्य प्रमुख पदस्थापना

मध्य प्रदेश वन विभाग में इस MP IFS-SFS Transfer से न केवल प्रशासनिक सुधार होगा, बल्कि अधिकारियों की जिम्मेदारी और वन संरक्षण कार्यों में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। DFO नेहा श्रीवास्तव और अधर गुप्ता जैसे मामलों के समाधान से वन विभाग की छवि में सुधार आने की संभावना है।

वन विभाग के अधिकारियों के नियमित IFS और SFS officers transfer से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहतर प्रशासनिक निगरानी संभव होगी।

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