मध्य प्रदेश में बड़े प्रशासनिक फेरबदल
भोपाल। मध्य प्रदेश की नौकरशाही में नए साल से पहले बड़े प्रशासनिक फेरबदल का संकेत मिला है। राज्य सरकार ने 17 आईएएस अधिकारियों को सचिव स्तर पर पदोन्नत करने का निर्णय लिया है। यह फैसला मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक में लिया गया। इस सूची में 2010 बैच के सभी अधिकारी शामिल हैं, जिनमें प्रमुख जिलों के कलेक्टर और विभाग प्रमुखों के नाम हैं।
पदोन्नति की इस सूची में सबसे प्रमुख नाम राजधानी भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह का है। इसके अलावा इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह, उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह और ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान भी सचिव पद पर प्रमोट किए गए हैं। प्रशासनिक हलकों में इसे राज्य की नौकरशाही में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
प्रमुख अधिकारियों को मिली पदोन्नति
डीपीसी की बैठक में जिन अधिकारियों को सचिव स्तर पर पदोन्नत किया गया है, उनमें कई महत्वपूर्ण जिलों और विभागों के अधिकारी शामिल हैं। ये सभी अधिकारी वर्तमान में प्रदेश के प्रमुख जिलों और विभागों में अहम जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। सचिव पद मिलने के बाद इनकी जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र में और विस्तार होने की संभावना है।
सचिव स्तर की इस पदोन्नति से अधिकारी सुपर टाइम स्केल वेतनमान और उच्च पदनाम प्राप्त करेंगे। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में प्रशासनिक कसावट और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अन्य प्रमुख नाम और विभाग
पदोन्नति सूची में कई अन्य महत्वपूर्ण विभागों के प्रमुख भी शामिल हैं। इनमें मप्र वेयर हाउसिंग लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के एमडी दीपक सक्सेना, उप सचिव तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास विभाग ललित कुमार दाहिमा, संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग भरत यादव, राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव अभिषेक सिंह, उप सचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग भरत नारायण मिश्रा और संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग सूफिया फारूकी वली के नाम शामिल हैं।
इन अधिकारियों के अनुभव और विभागीय कार्यकुशलता को ध्यान में रखते हुए उन्हें सचिव स्तर पर पदोन्नत किया गया है। यह कदम राज्य सरकार की प्रशासनिक रणनीति और भविष्य की योजनाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अन्य अधिकारियों का कद बढ़ा
डीपीसी द्वारा मंजूरी प्राप्त सूची में और भी कई नाम शामिल हैं। इनमें लोकेश कुमार जांगिड़ (संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र), सुरभि गुप्ता (सचिव, चिकित्सा शिक्षा), शशांक मिश्र (सीईओ, स्मार्ट सिटी भोपाल), शिल्पा गुप्ता (अपर आयुक्त, वाणिज्यिक कर), अनुग्रह पी (कलेक्टर, खरगोन), अभिजीत अग्रवाल (कलेक्टर, श्योपुर) और चंद्रमौली शुक्ला (कलेक्टर, देवास) शामिल हैं।
इन सभी अधिकारियों को अब सुपर टाइम स्केल का वेतनमान मिलेगा और वे सचिव स्तर के अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग जल्द ही इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी करेगा, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया आधिकारिक रूप से पूरी होगी।
प्रशासनिक कसावट और भविष्य
राज्य सरकार द्वारा किए गए इस निर्णय को प्रशासनिक कसावट और कार्यकुशलता बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के कार्यभार संभालने के बाद यह पहला बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इन पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपने के साथ जल्द ही प्रदेश में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन पदोन्नतियों से मध्य प्रदेश की नौकरशाही और प्रशासनिक ढांचा और मजबूत होगा। सचिव स्तर पर अधिकारियों की बढ़ती संख्या से राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं को तेजी से और प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह कदम नौकरशाही में नए और अनुभवी अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन का काम करेगा। इससे अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को और बेहतर तरीके से निभा सकेंगे और प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार होगा। अधिकारियों की पदोन्नति से संगठन में संतुलन और नेतृत्व क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।
