MP हाईकोर्ट ने दिव्यांग रिक्तियों पर भर्ती में सख्त रुख अपनाया
MP हाईकोर्ट ने दिव्यांग कर्मचारियों के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती में देरी और अनियमितताओं के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव और मध्य प्रदेश वेयरहाउस एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन (MPWLC) के प्रबंध निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कदम राज्य में दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कोर्ट का आदेश और नोटिस
हाईकोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल की एकल पीठ ने शुक्रवार, 27 फरवरी, 2026 को नोटिस जारी किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों को यह बताना होगा कि दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती प्रक्रिया में देरी क्यों हुई और इस विषय में विभाग की जिम्मेदारी क्या रही। कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी देरी या अनियमितताएँ न हों, इसके लिए उचित कदम उठाए जाएँ।
अधिकारियों को तलब किया गया जवाब
सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला और MPWLC के एमडी अनुराग वर्मा को नोटिस के माध्यम से निर्देश दिया गया कि वे मामले की पूरी जानकारी कोर्ट के समक्ष पेश करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह नोटिस राज्य सरकार और विभागों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि दिव्यांग कर्मचारियों के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती में देरी स्वीकार्य नहीं है।
अगली सुनवाई की तिथि
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल, 2026 को निर्धारित की है। इस दिन अधिकारियों को अपनी ओर से पूर्ण जवाब पेश करना अनिवार्य होगा। अदालत ने कहा कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह तिथि राज्य के सभी विभागों के लिए संदेश है कि दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती प्रक्रिया में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पृष्ठभूमि
मध्यप्रदेश में दिव्यांग वर्ग के लिए सरकारी विभागों में आरक्षित पदों पर भर्ती में लगातार देरी की शिकायतें सामने आई थीं। कई मामलों में आरोप थे कि विभाग समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर रहा और भर्ती में पारदर्शिता का अभाव है। इस स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही
हाईकोर्ट का उद्देश्य केवल जवाब तलब करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी, समय पर और न्यायसंगत तरीके से पूरी हो। दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती में देरी से उन्हें मिलने वाले अधिकारों का नुकसान होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या विलंब अस्वीकार्य है।
अन्य विभागों के लिए संकेत
हाईकोर्ट का यह आदेश केवल MPWLC तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के सरकारी विभागों के लिए संदेश है कि वे दिव्यांग कर्मचारियों के लिए आरक्षित पदों पर भर्ती में देरी या अनियमितता न होने दें। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि सभी विभाग अपने आरक्षित पदों के लिए समय पर और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाएँ।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का यह कदम दिव्यांग कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सरकारी विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षित पदों पर भर्ती में देरी और अनियमितताएँ अस्वीकार्य हैं। संबंधित अधिकारियों को जवाब देने और सुधारात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य किया जाएगा। इस फैसले से राज्य में दिव्यांग वर्ग के लिए रोजगार सुनिश्चित करने और सरकारी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
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