हाई कोर्ट ने दमोह एसपी और सागर डीआईजी के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिए
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े न्यायालय के आदेश के पालन में कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया है। सोमवार को न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने दमोह के पुलिस अधीक्षक और सागर के पुलिस उपमहानिरीक्षक के वर्तमान पदधारियों के खिलाफ 100-100 रुपये के जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिए। दोनों अधिकारियों को अगली सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा।
यह मामला दमोह निवासी करण सिंह ठाकुर द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिका में राजेश राजोरा एवं अन्य को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जायवीर सिंह सैनी ने न्यायालय को बताया कि पूर्व में हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत प्रदान की थी, लेकिन संबंधित आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है।
आदेश का पालन नहीं होने पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि न्यायालय के पूर्व आदेश के बावजूद उसका पालन नहीं किया गया। मामले की स्थिति को देखते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
न्यायालय ने दमोह एसपी और सागर डीआईजी के वर्तमान पदधारियों को एक सितंबर को कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार दोनों अधिकारियों के खिलाफ जारी जमानती वारंट की तामील सागर के पुलिस महानिरीक्षक के माध्यम से कराई जाएगी।
एक सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने 25 अगस्त को वारंट जारी करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए एक सितंबर की तारीख निर्धारित की गई है। उस दिन दोनों संबंधित अधिकारियों को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होना होगा।
मामला अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े पूर्व न्यायालयीन आदेश के अनुपालन से संबंधित है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद आदेश को लागू नहीं किया गया। इसी कथित अवमानना को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।
अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश
न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल नोटिस जारी करने के बजाय संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया। 100-100 रुपये के इन वारंट को सागर के पुलिस महानिरीक्षक के माध्यम से तामील कराया जाएगा।
अब इस मामले में एक सितंबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान न्यायालय संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति और पूर्व आदेश के अनुपालन की स्थिति पर विचार करेगा।
क्या है मामला
दमोह निवासी करण सिंह ठाकुर ने न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करते हुए पूर्व में दिए गए आदेश के पालन नहीं होने का मुद्दा उठाया है। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उन्हें पहले न्यायालय से राहत मिली थी, लेकिन संबंधित आदेश के बावजूद कार्रवाई पूरी नहीं हुई।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष की अनुपस्थिति और आदेश के अनुपालन को लेकर सामने आई स्थिति के बाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने दमोह के पुलिस अधीक्षक और सागर के पुलिस उपमहानिरीक्षक के वर्तमान पदधारियों को न्यायालय में बुलाने के लिए 100-100 रुपये के जमानती वारंट जारी करने के निर्देश दिए।
सागर आईजी के माध्यम से होगी कार्रवाई
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों जमानती वारंट सागर के पुलिस महानिरीक्षक के माध्यम से तामील कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित अधिकारी अगली सुनवाई में न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों।
मामले की अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी। उस दिन न्यायालय पूर्व आदेश के पालन, संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति और अवमानना याचिका से जुड़े अन्य तथ्यों पर आगे सुनवाई कर सकता है।
नोट: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट ने आदेश के अनुपालन में कथित लापरवाही पर यह कार्रवाई की है। मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अगली सुनवाई और आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
