MP हाईकोर्ट की सख्ती: रेरा अध्यक्ष पद खाली रहने पर सरकार को फटकार, मुख्य सचिव को कोर्ट में पेशी की चेतावनी
MP में रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले रेरा (Real Estate Regulatory Authority) ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष पद को लंबे समय से खाली रखने को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह स्थिति न्याय व्यवस्था के सुचारू संचालन में बाधा बन रही है और सरकार को तुरंत इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये को “ढुलमुल” बताते हुए कड़ा रुख अपनाया और निर्देश दिया कि रेरा अध्यक्ष का पद जल्द से जल्द भरा जाए। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं करती है, तो मुख्य सचिव (Chief Secretary) को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना पड़ सकता है।
दो महीने से खाली पड़ा है महत्वपूर्ण पद
जानकारी के अनुसार, रेरा ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष का पद पिछले करीब दो महीनों से खाली पड़ा है। 14 मार्च को पूर्व अध्यक्ष के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद रिक्त है। तब से अब तक किसी नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे रियल एस्टेट से जुड़े कई मामलों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
रेरा का गठन इस उद्देश्य से किया गया था कि खरीदारों और बिल्डरों के बीच विवादों का शीघ्र और प्रभावी समाधान हो सके। लेकिन अध्यक्ष पद के खाली रहने के कारण ट्रिब्यूनल का कामकाज धीमा पड़ गया है और कई महत्वपूर्ण केस लंबित हो गए हैं।
हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण न्यायिक और अर्ध-न्यायिक पद को लंबे समय तक खाली रखना स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि इससे न केवल मामलों का निपटारा प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों को भी न्याय पाने में देरी हो रही है।
कोर्ट ने सरकार से पूछा कि आखिर इतने जरूरी पद पर नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है, जबकि यह स्पष्ट है कि रियल एस्टेट मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और ट्रिब्यूनल पर काम का दबाव भी अधिक है।
सरकार को स्पष्ट निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द रेरा अध्यक्ष पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करे। अदालत ने यह भी कहा कि यदि अगली सुनवाई तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो मुख्य सचिव को अदालत में उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
अदालत ने संकेत दिया कि यह मामला केवल प्रशासनिक देरी का नहीं है, बल्कि न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता से जुड़ा हुआ गंभीर मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
लंबित मामलों पर असर
रेरा ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष की अनुपस्थिति के कारण रियल एस्टेट से जुड़े कई मामले अटके हुए हैं। इनमें खरीदारों द्वारा बिल्डरों के खिलाफ दर्ज शिकायतें, परियोजनाओं में देरी, धन वापसी से जुड़े विवाद और अन्य कई महत्वपूर्ण मामले शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ट्रिब्यूनल में शीर्ष पद खाली रहता है, तो निर्णय प्रक्रिया बाधित होती है और न्याय मिलने में देरी होती है, जिससे आम जनता का भरोसा प्रणाली पर कमजोर पड़ सकता है।
रियल एस्टेट सेक्टर में चिंता
रेरा एक ऐसा मंच है जो रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। इसके माध्यम से खरीदारों के हितों की रक्षा की जाती है और बिल्डरों पर निगरानी रखी जाती है। ऐसे में अध्यक्ष पद का खाली रहना पूरे सिस्टम की कार्यक्षमता पर असर डालता है।
राज्य के कई हितधारकों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है और जल्द नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि लंबित मामलों की वजह से आम लोगों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अगली सुनवाई 23 जून को
इस मामले में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 23 जून निर्धारित की है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि तब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
निष्कर्ष
MP हाईकोर्ट का यह रुख सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि न्यायिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों को खाली रखना गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। रेरा अध्यक्ष पद पर नियुक्ति में देरी न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि यह आम जनता के न्याय अधिकारों को भी प्रभावित करती है।
अब सभी की निगाहें 23 जून की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सरकार इस दिशा में कितना गंभीर कदम उठाती है।
