एमपी के 70 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत, पहली नियुक्ति से मिल सकते हैं सेवा लाभ; वेतन में 15 से 20 हजार तक बढ़ोतरी की संभावना
हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश के पालन के लिए दिए चार सप्ताह, वरिष्ठता-वेतनवृद्धि और पेंशन लाभ का भी खुल सकता है रास्ता
भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत से जुड़ी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ ने शिक्षकों को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा लाभ देने संबंधी पूर्व आदेश के पालन के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। मामला पंचायत विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में आए अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों की वरिष्ठता, वेतन निर्धारण, वेतनवृद्धि और पेंशन सहित अन्य सेवा लाभों से जुड़ा है।
पहली नियुक्ति की तारीख से सेवा गणना का मामला
शिक्षकों की मांग है कि उनकी सेवा अवधि की गणना बाद की संविलियन तारीख के बजाय उनकी मूल नियुक्ति की तारीख से की जाए। रिपोर्ट के मुताबिक कई शिक्षक वर्ष 1998 में पंचायत विभाग के अंतर्गत नियुक्त हुए थे। बाद में उनकी सेवाएं अध्यापक संवर्ग में और फिर वर्ष 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में शामिल हुईं।
विवाद इसी बात को लेकर था कि वेतन, वरिष्ठता, वेतनवृद्धि और पेंशन जैसे लाभों की गणना किस तारीख से की जाए। हाईकोर्ट के पहले के आदेशों में शिक्षकों के सेवा लाभ उनकी प्रारंभिक नियुक्ति से जोड़ने की दिशा में राहत दी गई थी।
छठे वेतनमान का लाभ भी अहम
मामले में छठे वेतन आयोग का लाभ भी महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट के आदेश में प्राथमिक शिक्षकों की वरिष्ठता को पहली नियुक्ति से मानने और 1 जनवरी 2006 से छठे वेतन आयोग से जुड़े लाभ पर विचार करने का निर्देश शामिल था।
इससे पात्र शिक्षकों के वेतन निर्धारण के साथ वरिष्ठता, इंक्रीमेंट और पेंशन संबंधी लाभों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में SLP हुई खारिज
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका यानी SLP दायर की थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को यह SLP खारिज कर दी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए शिक्षकों की ओर से अवमानना याचिका दायर की गई।
अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। न्यायमूर्ति दीपक खोट की पीठ ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में निर्धारित होने की जानकारी है।
15 से 20 हजार रुपये तक बढ़ सकता है वेतन?
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आदेश लागू होने पर प्रभावित शिक्षकों के मासिक वेतन में करीब 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही पिछले वर्षों के एरियर का रास्ता भी खुल सकता है। कुछ रिपोर्टों में करीब 10 साल तक के एरियर की संभावना जताई गई है।
हालांकि वास्तविक वेतन वृद्धि और एरियर प्रत्येक शिक्षक की नियुक्ति तिथि, वर्तमान वेतन, सेवा रिकॉर्ड और अंतिम सरकारी गणना पर निर्भर करेगा। इसलिए सभी 70 हजार शिक्षकों को समान रूप से 15 से 20 हजार रुपये अधिक वेतन या निश्चित रूप से 10 साल का एरियर मिलेगा, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता।
497 शिक्षकों की अवमानना याचिका
एक रिपोर्ट के मुताबिक आदेश के पालन को लेकर 497 शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने पक्ष रखा। अदालत ने सरकार को आदेश के अनुपालन के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी।
करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ सकता है असर
इस मामले का प्रभाव केवल अवमानना याचिका दायर करने वाले शिक्षकों तक सीमित न रहकर समान परिस्थितियों वाले करीब 70 हजार शिक्षकों तक पहुंचने का अनुमान मीडिया रिपोर्टों में लगाया गया है। आदेश लागू होने की स्थिति में पात्र शिक्षकों के वेतन, वरिष्ठता, वेतनवृद्धि और पेंशन जैसे सेवा लाभों में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।
अब शिक्षकों की निगाह राज्य सरकार द्वारा अगले चार सप्ताह में की जाने वाली कार्रवाई पर है। वास्तविक वित्तीय लाभ और एरियर की स्थिति सरकार द्वारा आदेश के अनुपालन और पात्रता के आधार पर होने वाली गणना के बाद अधिक स्पष्ट होगी।
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