MP टीईटी 2018: हाईकोर्ट ने लंबित नियुक्ति याचिका खारिज की, सात साल तक अनुपस्थित रहने वाले कैंडिडेट्स को बड़ा झटका
MP में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2018 उत्तीर्ण कैंडिडेट्स के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। जबलपुर की हाईकोर्ट डिवीजन बेंच ने उन उम्मीदवारों की याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिन्होंने लंबे समय तक नियुक्ति के लिए कोई सक्रिय प्रयास नहीं किया और 29 सितंबर 2022 को जारी सार्वजनिक सूचना के बावजूद आवेदन नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस परिस्थिति में नियुक्ति की मांग न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।
2018 टीईटी उत्तीर्ण कैंडिडेट्स की लंबित नियुक्ति
टीईटी 2018 में सफल हुए कई उम्मीदवार लंबे समय से मध्य प्रदेश में नियुक्ति की मांग कर रहे थे। इन कैंडिडेट्स का मानना था कि प्रदेश में मिडिल स्कूल शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं और उन्हें वर्ष 2018 के नियमों के तहत नियुक्ति दी जानी चाहिए। इस कारण कई कैंडिडेट्स ने भोपाल में प्रदर्शन किया और सरकारी अधिकारियों को अपनी समस्या बताई, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।
याचिका का विवरण
कटनी की रहने वाली सरस्वती पाटीदार और नरसिंहपुर की रेणुका यादव ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें 2018 में पास की गई टीईटी परीक्षा के आधार पर नियुक्ति दी जाए। याचिका में यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 में नई भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है और प्रदेश में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
कोर्ट का निर्णय
हाईकोर्ट ने 2 मार्च 2026 को सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि सात वर्षों से अधिक समय तक कोई सक्रिय पहल न करने और 29 सितंबर 2022 को जारी सार्वजनिक सूचना के बावजूद आवेदन न करने के बाद अब नियुक्ति की मांग न्यायसंगत नहीं ठहर सकती। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अब उम्मीदवारों के पास टीईटी 2018 के आधार पर नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं बचा।
कोर्ट का तर्क
कोर्ट ने अपने आदेश में यह तर्क दिया कि नियुक्ति के लिए समय पर सक्रिय प्रयास और नियमों के अनुसार आवेदन करना आवश्यक है। उम्मीदवारों की लापरवाही के कारण अब उन्हें पुरानी परीक्षा के आधार पर किसी पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि लंबी अवधि तक अनुपस्थित रहने वाले कैंडिडेट्स के लिए नियुक्ति का दावा “अन्यायपूर्ण” होगा और इससे सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया में असमानता पैदा हो सकती है।
उम्मीदवारों की प्रतिक्रिया
सरस्वती पाटीदार और रेणुका यादव ने कोर्ट के निर्णय के बाद निराशा व्यक्त की। उनका कहना था कि उन्होंने वर्षों तक अपनी योग्यता साबित की और शिक्षक पदों के लिए प्रयास किया, लेकिन लंबी प्रक्रिया और प्रशासनिक बाधाओं के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी। वहीं, कई शिक्षा विशेषज्ञों ने कोर्ट के फैसले को उचित बताया क्योंकि सरकारी प्रक्रियाओं में नियमों का पालन सभी के लिए समान होना आवश्यक है।
टीईटी और शिक्षक नियुक्तियों का महत्व
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) मध्य प्रदेश में मिडिल और प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए मुख्य मानक है। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होना शिक्षक बनने की योग्यता का पहला और अनिवार्य कदम है। हालांकि, टीईटी उत्तीर्ण होना अपने आप में नियुक्ति का अधिकार नहीं देता। समय पर आवेदन और नियमों का पालन करना आवश्यक है।
भविष्य की राह
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद 2018 के टीईटी उत्तीर्ण कैंडिडेट्स को अब नई भर्ती के लिए आगामी विज्ञापनों और प्रक्रियाओं के माध्यम से ही आवेदन करना होगा। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों को सक्रिय रहना चाहिए और निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
टीईटी 2018 उत्तीर्ण उम्मीदवारों के लिए हाईकोर्ट का फैसला स्पष्ट है – लंबे समय तक सक्रिय प्रयास न करने और सार्वजनिक सूचना के बावजूद आवेदन न करने वाले उम्मीदवार अब पुरानी परीक्षा के आधार पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते। यह निर्णय राज्य में सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया में नियम और अनुशासन बनाए रखने के महत्व को रेखांकित करता है। उम्मीदवारों को अब भविष्य में नई भर्तियों और विज्ञापनों के अनुसार ही आवेदन करना होगा और सक्रिय प्रयासों के साथ अपने हक के लिए लड़ना होगा।
