—Advertisement—

MP High Court: माखनलाल यूनिवर्सिटी में डॉ. पी. शशिकला की 2014 की नियुक्ति पर सवाल, सात पक्षों को नोटिस

Author Picture
Published On: 18 September 2026

—Advertisement—

MP High Court: माखनलाल यूनिवर्सिटी में डॉ. पी. शशिकला की 2014 की नियुक्ति पर सवाल, सात पक्षों को नोटिस

याचिकाकर्ता ने शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और बाद में मिली पदोन्नति को दी चुनौती; जबलपुर हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय सहित संबंधित पक्षों से मांगा जवाब

जबलपुर/भोपाल। भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में वर्ष 2014 में हुई एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। डॉ. पी. शशिकला की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने सात संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता ने नियुक्ति के समय डॉ. पी. शशिकला की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव को लेकर सवाल उठाए हैं। याचिका में नियुक्ति के बाद उन्हें दी गई पदोन्नति की वैधता की जांच कराने की मांग भी की गई है। हाई कोर्ट ने फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। संबंधित पक्षों का जवाब आने के बाद मामले में आगे सुनवाई होगी।

एसोसिएट प्रोफेसर पद की नियुक्ति का मामला

विवाद विश्वविद्यालय में वर्ष 2014 के दौरान एसोसिएट प्रोफेसर पद पर की गई नियुक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि पद के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव संबंधी मापदंडों के आधार पर डॉ. पी. शशिकला की पात्रता की दोबारा जांच की जानी चाहिए।

याचिका में सवाल उठाया गया है कि नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में उम्मीदवारों के लिए कौन-कौन सी योग्यताएं निर्धारित की गई थीं और चयन समिति ने उम्मीदवारों के आवेदन एवं दस्तावेजों की जांच किस आधार पर की थी। याचिकाकर्ता ने चयन प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने की मांग की है।

ये सभी दावे फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोप हैं। विश्वविद्यालय और अन्य संबंधित पक्षों का उत्तर सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

शैक्षणिक योग्यता और अनुभव पर आपत्ति

याचिकाकर्ता के अनुसार, एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित विषय में आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित अवधि का अनुभव होना जरूरी था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियुक्ति के समय इन मापदंडों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता ने डॉ. पी. शशिकला द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अनुभव से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा कराने की मांग की है। इसके साथ ही यह भी जांचने को कहा गया है कि चयन समिति ने नियुक्ति की अनुशंसा करते समय विश्वविद्यालय के नियमों और उस समय लागू पात्रता मानकों का पालन किया था या नहीं।

हाई कोर्ट में संबंधित पक्ष अपना जवाब पेश करते हुए इन आरोपों का खंडन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय नियुक्ति के समर्थन में विज्ञापन, पात्रता जांच, चयन समिति की अनुशंसा और नियुक्ति आदेश से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत कर सकता है।

बाद में मिली पदोन्नति भी चुनौती के दायरे में

याचिका में डॉ. पी. शशिकला की मूल नियुक्ति के साथ बाद में उन्हें दी गई पदोन्नति पर भी सवाल उठाया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि मूल नियुक्ति निर्धारित नियमों या पात्रता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उसके आधार पर दी गई बाद की पदोन्नति की भी समीक्षा की जानी चाहिए।

हालांकि नियुक्ति अथवा पदोन्नति अवैध थी या नहीं, इस बारे में अदालत ने अभी कोई टिप्पणी या अंतिम निर्णय नहीं दिया है। यह न्यायिक परीक्षण का विषय है और इसका फैसला सभी पक्षों के जवाब एवं संबंधित दस्तावेज देखने के बाद होगा।

मामले में नियुक्ति के समय लागू विश्वविद्यालय के सेवा नियम, पदोन्नति की प्रक्रिया और शैक्षणिक पात्रता से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

सात संबंधित पक्षों को जारी हुआ नोटिस

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद सात संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। नोटिस के माध्यम से पक्षकारों को याचिका में लगाए गए आरोपों पर अपना जवाब प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।

जवाब दाखिल होने के बाद अदालत यह देखेगी कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं। आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालय से नियुक्ति और पदोन्नति से संबंधित मूल अभिलेख भी मांगे जा सकते हैं।

कानूनी प्रक्रिया में नोटिस जारी होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं होता। यह केवल इतना दर्शाता है कि अदालत ने याचिका में उठाए गए विषयों पर संबंधित पक्षों से उनका पक्ष रखने को कहा है।

विश्वविद्यालय के जवाब पर टिकी अगली सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का जवाब महत्वपूर्ण रहेगा। विश्वविद्यालय को बताना पड़ सकता है कि वर्ष 2014 में एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए क्या मापदंड निर्धारित थे और डॉ. पी. शशिकला की पात्रता किस आधार पर स्वीकार की गई थी।

विश्वविद्यालय चयन प्रक्रिया, साक्षात्कार, दस्तावेजों के सत्यापन और नियुक्ति आदेश से जुड़ी जानकारी भी न्यायालय के सामने प्रस्तुत कर सकता है। संबंधित उम्मीदवार को भी अपनी योग्यता, अनुभव और नियुक्ति के समर्थन में जवाब देने का अधिकार मिलेगा।

मामला सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्रता नियमों के पालन से जुड़ा है। अदालत के अंतिम निर्णय से पहले किसी भी पक्ष को दोषी या नियुक्ति को अवैध नहीं माना जा सकता। सभी पक्षों के जवाब आने के बाद ही हाई कोर्ट तय करेगा कि मामले में आगे किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक है।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp