MP Guest Faculty Conference: अतिथि विद्वानों के लिए हरियाणा मॉडल पर विचार करेगी समिति, CM मोहन यादव ने दिए निर्देश
भोपाल। राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में शुक्रवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय अतिथि विद्वान सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने Guest Faculty को लेकर बड़ा ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिथि विद्वानों की मांगों और सेवा शर्तों पर विचार करने के लिए एक समिति बनाई जाएगी, जो अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन करेगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से कहा कि वे अपने स्तर पर समिति का गठन करें और यह देखें कि हरियाणा सहित अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं में से कौन सा मॉडल मध्यप्रदेश के लिए बेहतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में पूरा सहयोग करेगी।
Guest Faculty लंबे समय से कर रहे हैं मांग
मध्यप्रदेश के अतिथि विद्वान लंबे समय से अपनी सेवा सुरक्षा और समान वेतन की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि वे कई वर्षों से प्रदेश के कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों में पूरी जिम्मेदारी के साथ शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके रोजगार को लेकर स्थायी व्यवस्था नहीं बन पाई है।
अतिथि विद्वानों का कहना है कि लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद भी उन्हें नौकरी की अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। उनकी मांग है कि सरकार उनके अनुभव और योगदान को ध्यान में रखते हुए नियमित सेवा जैसी सुरक्षा उपलब्ध कराए।
इसके साथ ही अतिथि विद्वान समान कार्य के लिए सम्मानजनक वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बेहतर सेवा शर्तें मिलने से वे शिक्षा व्यवस्था में और अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगे।
हरियाणा मॉडल पर है विशेष जोर
अतिथि विद्वान लंबे समय से हरियाणा मॉडल लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस मॉडल में अनुभव और योग्यता रखने वाले शिक्षकों को सेवा सुरक्षा देने का प्रावधान बताया जाता है।
अतिथि विद्वानों के अनुसार, हरियाणा मॉडल के तहत करीब 5 साल का अनुभव रखने वाले योग्य शिक्षकों को 62 से 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु तक सेवा से नहीं हटाने और यूजीसी नियमों के अनुसार न्यूनतम वेतन देने का प्रावधान है।
इस मॉडल के तहत लगभग 57,700 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन की व्यवस्था का भी उल्लेख किया जाता है।
समिति करेगी मॉडल का अध्ययन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि गठित होने वाली समिति अन्य राज्यों में लागू अतिथि विद्वान व्यवस्थाओं का गहन अध्ययन करेगी। इसके बाद समिति की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर मध्यप्रदेश के लिए उपयुक्त व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अतिथि विद्वानों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा। समिति सेवा सुरक्षा, वेतनमान, पात्रता नियम, वित्तीय प्रभाव और अन्य आवश्यक बिंदुओं का परीक्षण करेगी।
सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे अतिथि विद्वानों की समस्याओं का समाधान हो सके और उच्च शिक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सके।
अतिथि विद्वानों में जगी उम्मीद
मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के बाद प्रदेश के अतिथि विद्वानों में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे अतिथि विद्वानों का कहना है कि यदि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस और स्थायी निर्णय लेती है, तो इससे हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।
अतिथि विद्वानों का मानना है कि वर्तमान में सबसे बड़ी चिंता नौकरी की स्थिरता को लेकर है। कई वर्षों से उच्च शिक्षा संस्थानों में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि सेवा सुरक्षा मिलने से वे बिना किसी चिंता के बेहतर तरीके से शिक्षण कार्य कर सकेंगे।
शिक्षकों का यह भी मानना है कि स्थायी व्यवस्था और सम्मानजनक वेतन मिलने से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। अनुभवी शिक्षक लंबे समय तक संस्थानों से जुड़े रहकर विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे।
अब अतिथि विद्वानों की नजर समिति की रिपोर्ट और सरकार के आगामी फैसले पर टिकी हुई है।
शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में कदम
मध्यप्रदेश सरकार उच्च और तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में सुधार को लेकर लगातार प्रयास कर रही है। अतिथि विद्वानों की सेवा शर्तों का मुद्दा भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण विषय है।
अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट और सरकार के अगले फैसले पर रहेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर अतिथि विद्वानों के भविष्य को लेकर आगे की नीति तय की जा सकती है।
