जमीन के बदले किसानों को 60% विकसित भूखंड देगी एमपी सरकार, 6-लेन सड़क बनेगी इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर में
MP सरकार प्रदेश के विकास को नई गति देने के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में यह परियोजना न केवल औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी बल्कि हजारों किसानों और स्थानीय लोगों के जीवन में भी बड़ा बदलाव लाएगी।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का कुल बजट करीब 2410 करोड़ रुपये है और इसका भूमि पूजन 3 मई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा नैनोद में किया जाएगा। यह परियोजना इंदौर को औद्योगिक और आर्थिक रूप से नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
1331 हेक्टेयर जमीन पर विकसित होगा कॉरिडोर
यह पूरा इकोनॉमिक कॉरिडोर लगभग 1331.02 हेक्टेयर भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा, जहां अलग-अलग औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय गतिविधियां संचालित होंगी।
इस परियोजना का उद्देश्य एक ऐसा आधुनिक विकास मॉडल तैयार करना है, जिसमें उद्योग, व्यापार और रहन-सहन की सभी सुविधाएं एक ही क्षेत्र में उपलब्ध हों।
किसानों को मिलेगा 60% विकसित भूखंड
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार किसानों को उनकी जमीन के बदले 60 प्रतिशत विकसित भूखंड देगी। यह अब तक की किसी भी विकास योजना में दिया गया सबसे बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।
किसानों को न केवल उचित मुआवजा मिलेगा, बल्कि वे विकसित भूमि के मालिक भी बनेंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे विकास प्रक्रिया के सीधे भागीदार बन सकेंगे।
20.25 किलोमीटर लंबी 6-लेन सड़क
इंदौर एयरपोर्ट के पीछे से लेकर पीथमपुर सेक्टर सेवन तक 20.25 किलोमीटर लंबी 6-लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह सड़क इंदौर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे और एबी रोड को जोड़ने का काम करेगी।
इस सड़क के बनने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि औद्योगिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स को भी बड़ी राहत मिलेगी।
300-300 मीटर चौड़ी भूमि कॉरिडोर के दोनों तरफ
कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इस क्षेत्र को आधुनिक शहरी और औद्योगिक विकास के अनुसार डिजाइन किया जाएगा।
यहां फिनटेक सिटी, दलाल स्ट्रीट मॉडल, आईटी हब, औद्योगिक क्षेत्र और वाणिज्यिक प्लॉट विकसित किए जाएंगे।
लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार
सरकार का दावा है कि इस परियोजना से लगभग 5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे इंदौर और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
किसानों के लिए भव्य तैयारी, पीले चावल से आमंत्रण
भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने विशेष तैयारी की है। प्रभावित गांवों जैसे टीही, धन्नड़, भैंसलाय, सोनवाय, बागोदा, नैनोद और अन्य गांवों के किसानों को पीले चावल देकर आमंत्रित किया जा रहा है।
किसानों के सम्मान में कार्यक्रम स्थल पर 4000 लोगों की क्षमता वाला एसी पंडाल बनाया जा रहा है। यहां उनके लिए लजीज भोजन और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई है।
किसानों को चार गुना मुआवजे का प्रस्ताव
सरकार ने कुछ किसानों के लिए चार गुना मुआवजा देने की भी घोषणा की है। जिन किसानों की जमीन इस परियोजना में शामिल होगी, उन्हें बेहतर मुआवजा और विकसित भूमि दोनों दिए जाएंगे।
इससे किसानों में विकास परियोजना को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है और वे इसे अपने भविष्य के लिए अवसर के रूप में देख रहे हैं।
आधुनिक औद्योगिक और आवासीय मॉडल
इस कॉरिडोर में आधुनिक शहर की तर्ज पर विकास किया जाएगा। यहां ऊंची इमारतों वाले रेजिडेंशियल जोन, आईटी पार्क, औद्योगिक यूनिट्स और व्यापारिक केंद्र बनाए जाएंगे।
20 मंजिल तक की हाईराइज इमारतों की भी योजना है, जिससे यह क्षेत्र एक नए आधुनिक शहर के रूप में विकसित हो सकेगा।
इंदौर के विकास में मील का पत्थर
यह परियोजना इंदौर को एक ग्लोबल इंडस्ट्रियल और कमर्शियल हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न केवल शहर की कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि निवेश के नए अवसर भी खुलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का गेम चेंजर साबित हो सकता है।
निष्कर्ष
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक समग्र विकास मॉडल है, जो किसानों, उद्योगों और शहरी विकास को एक साथ जोड़ता है। 60 प्रतिशत विकसित भूमि का प्रावधान इसे और भी खास बनाता है।
यह परियोजना आने वाले समय में मध्य प्रदेश को औद्योगिक और आर्थिक मानचित्र पर नई पहचान दिला सकती है।
