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MP में आउटसोर्स भर्ती पर सख्ती, अब बिना वित्त विभाग की अनुमति नहीं रख सकेंगे कर्मचारी

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Published On: 23 January 2026
MP Government Brings Stricter Control Over Outsourced Hiring
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MP में आउटसोर्स भर्ती पर सख्ती, बिना वित्त विभाग की अनुमति नहीं रखे जा सकेंगे कर्मचारी

MP सरकार ने आउटसोर्स भर्ती व्यवस्था को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब राज्य का कोई भी विभाग बिना वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर सकेगा। इस संबंध में वित्त विभाग ने वर्ष 2023 में जारी उस निर्देश को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया है, जिसके तहत विभागों को चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर आउटसोर्स से कर्मचारियों की व्यवस्था करने की अनुमति दी गई थी।

इस निर्णय को प्रशासनिक सख्ती, वित्तीय अनुशासन और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

2023 के आदेश को किया गया निरस्त

वित्त विभाग के उप सचिव विवेक कुमार घारू द्वारा गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किया गया। आदेश की प्रति सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और जिला कलेक्टरों को भेज दी गई है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2023 में जारी निर्देश वर्तमान परिस्थितियों में अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं, इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जा रहा है।

आदेश के अनुसार अब कोई भी विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार सीधे आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर सकेगा।

क्या था 2023 का निर्देश

वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने एक विशेष निर्देश जारी किया था, जिसके तहत विभिन्न विभागों को चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों को रखने की छूट दी गई थी। यह व्यवस्था तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लागू की गई थी।

इस निर्देश में विभागाध्यक्षों को कई अधिकार दिए गए थे, जिनमें शामिल थे:

  • आउटसोर्स किए जाने वाले पदों की पहचान
  • आउटसोर्स एजेंसी का चयन
  • बजट की व्यवस्था
  • निविदा राशि की गणना और भुगतान प्रक्रिया

इन प्रावधानों के तहत कई विभागों ने आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति की थी।

क्यों लिया गया यह फैसला

विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में राज्य में नियमित भर्ती प्रक्रियाएं लगातार चल रही हैं। कई विभागों में सीधी भर्तियां की जा रही हैं और रिक्त पदों की पूर्ति की जा रही है। ऐसे में आउटसोर्स भर्ती के लिए दी गई अस्थायी छूट की आवश्यकता नहीं रह गई थी।

इसके अलावा, आउटसोर्स भर्ती को लेकर शिकायतें, वित्तीय बोझ और प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंकाएं भी सामने आ रही थीं। इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए वित्त विभाग ने 2023 के निर्देश को निरस्त करने का निर्णय लिया।

अब क्या बदलेगा

नए आदेश के तहत अब यदि किसी विभाग को किसी विशेष परिस्थिति में आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी, तो उसे पहले वित्त विभाग से लिखित अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति की गई किसी भी आउटसोर्स भर्ती को अवैध माना जाएगा।

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि:

  • सभी विभागों को नियमित भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता देनी होगी
  • आउटसोर्स भर्ती केवल वैकल्पिक और अस्थायी व्यवस्था के रूप में ही की जा सकेगी
  • प्रत्येक मामले में वित्त विभाग की स्वीकृति अनिवार्य होगी
प्रशासनिक नियंत्रण होगा मजबूत

सरकारी सूत्रों का मानना है कि इस फैसले से आउटसोर्स भर्ती पर नियंत्रण मजबूत होगा। अब विभाग अपनी सुविधा के अनुसार बिना उच्चस्तरीय अनुमति के कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर पाएंगे। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन कायम होगा, बल्कि कर्मचारियों की भर्ती में एकरूपता और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि अनावश्यक रूप से आउटसोर्स पर कर्मचारियों को रखकर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ न डाला जाए।

आउटसोर्स कर्मचारियों पर क्या होगा असर

इस फैसले के बाद पहले से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। हालांकि आदेश में सीधे तौर पर मौजूदा आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त करने की बात नहीं कही गई है, लेकिन भविष्य में नई नियुक्तियों पर सख्ती जरूर बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का फोकस अब नियमित और स्थायी भर्तियों पर अधिक रहेगा, जिससे कर्मचारियों को भी अधिक स्थिरता मिल सके।

विभागों को दिए गए निर्देश

वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अब नई व्यवस्था के अनुसार ही रिक्त पदों की पूर्ति की योजना बनाएं। यदि किसी विभाग को किसी कार्य के लिए आउटसोर्स व्यवस्था आवश्यक लगती है, तो उसका पूरा प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजना होगा।

प्रस्ताव में यह स्पष्ट करना होगा कि:

  • आउटसोर्स की आवश्यकता क्यों है
  • कितने पदों के लिए व्यवस्था चाहिए
  • कितने समय के लिए नियुक्ति प्रस्तावित है
  • इससे होने वाला वित्तीय व्यय कितना होगा

वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

सरकार के फैसले को कैसे देखा जा रहा है

प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को सरकार की सख्त और स्पष्ट नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से आउटसोर्स भर्ती को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब इस फैसले से यह संदेश गया है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित बनाना चाहती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो इससे न केवल भर्ती व्यवस्था सुधरेगी बल्कि सरकारी कामकाज में जवाबदेही भी बढ़ेगी।

निष्कर्ष

MP में अब आउटसोर्स भर्ती आसान प्रक्रिया नहीं रहेगी। वित्त विभाग की अनुमति के बिना कोई भी विभाग आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर सकेगा। 2023 के निर्देश को निरस्त किए जाने के बाद सभी विभागों को नई व्यवस्था के अनुसार काम करना होगा।

यह फैसला प्रशासनिक सुधार, वित्तीय अनुशासन और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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