MP में 56 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म की राशि सीधे खाते में भेजने की तैयारी, 350 करोड़ का टेंडर कोर्ट में अटका
MP के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा पहली से आठवीं तक के करीब 56 लाख विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म को लेकर सरकार व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी में है। बच्चों को सिली हुई यानी रेडीमेड यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के बजाय अब उनके बैंक खातों में यूनिफॉर्म की राशि सीधे ट्रांसफर करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग इस संबंध में संशोधित प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।
दरअसल, नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई महीने बीत चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को अब तक यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं हो पाई है। सरकार ने जून में विद्यार्थियों को दो जोड़ी सिली हुई यूनिफॉर्म देने का निर्णय लिया था। इस फैसले को लागू करने के लिए मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से करीब 350 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था।
हाई कोर्ट में चुनौती के बाद रुकी टेंडर प्रक्रिया
रेडीमेड यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। मामले में कोर्ट की ओर से अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद यूनिफॉर्म की सिलाई और सप्लाई का काम आगे नहीं बढ़ सका। इसके कारण स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म मिलने में देरी हो रही है।
विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जाता है, तो बच्चों तक यूनिफॉर्म पहुंचाने में और समय लग सकता है। टेंडर के बाद विद्यार्थियों की नाप लेने, यूनिफॉर्म तैयार कराने, उसकी गुणवत्ता जांचने और फिर प्रदेश के अलग-अलग स्कूलों तक वितरण की प्रक्रिया में भी काफी समय लगेगा।
इसी वजह से स्कूल शिक्षा विभाग अब वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रहा है।
डीबीटी के जरिए खातों में भेजी जा सकती है राशि
विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के मुताबिक, विद्यार्थियों को दो जोड़ी यूनिफॉर्म खरीदने के लिए निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा सकती है। इसके लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों को यूनिफॉर्म स्वयं खरीदने का विकल्प मिल सकता है। इससे रेडीमेड यूनिफॉर्म की खरीद, सिलाई, नाप और प्रदेशभर में वितरण की लंबी प्रक्रिया से बचने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह अंतिम फैसला नहीं है। डीबीटी के माध्यम से कितनी राशि दी जाएगी, राशि किस समय जारी होगी और भुगतान की प्रक्रिया क्या होगी, इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
शिक्षा विभाग ने शुरू की तैयारी
यूनिफॉर्म व्यवस्था में बदलाव को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की मौजूदगी में बैठक भी हुई। बैठक में मौजूदा स्थिति और टेंडर में हुई देरी पर चर्चा की गई। इसके बाद विभाग ने डीबीटी के माध्यम से राशि उपलब्ध कराने की संभावित व्यवस्था पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है।
विभाग अब संशोधित प्रस्ताव तैयार कर रहा है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव को जल्द ही मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।
56 लाख विद्यार्थियों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का सीधा असर मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ने वाले लगभग 56 लाख विद्यार्थियों पर पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को समय पर स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना है, ताकि यूनिफॉर्म वितरण में देरी के कारण बच्चों और उनके अभिभावकों को परेशानी न हो।
मौजूदा व्यवस्था में सरकार की ओर से सिली हुई दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का फैसला किया गया था। लेकिन टेंडर प्रक्रिया कानूनी विवाद में फंसने के कारण निर्धारित समयसीमा के भीतर यूनिफॉर्म उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है।
ऐसे में डीबीटी को एक वैकल्पिक रास्ते के रूप में देखा जा रहा है। यदि कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो सरकार रेडीमेड यूनिफॉर्म की जगह सीधे आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था लागू कर सकती है।
कैबिनेट के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन राशि की अंतिम रकम और भुगतान की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रत्येक विद्यार्थी के खाते में कितनी राशि भेजी जाएगी और इसे किस चरण में जारी किया जाएगा। साथ ही यह भी तय होगा कि पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों का सत्यापन और डीबीटी भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
कुल मिलाकर, 350 करोड़ रुपये का यूनिफॉर्म टेंडर कोर्ट में अटकने के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब लाखों विद्यार्थियों तक यूनिफॉर्म का लाभ पहुंचाने के लिए व्यवस्था बदलने की तैयारी कर रही है। यदि नया प्रस्ताव मंजूर होता है, तो प्रदेश के करीब 56 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म की राशि सीधे बैंक खाते में मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
