चुनावी वादा याद दिलाया: 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं MSP की मांग,भारतीय किसान संघ ने 2600 रुपए की दर पर उठाया सवाल
मध्यप्रदेश सरकार ने इस वर्ष किसानों से गेहूं खरीदी की दर 2600 रुपए प्रति क्विंटल घोषित की है। यह दर केंद्रीय सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपए के मुकाबले केवल 15 रुपए अधिक है। लेकिन प्रदेश में किसानों के हितों और चुनावी वादों के मद्देनजर भारतीय किसान संघ (Bharatiya Kisan Sangh – BKS) ने सरकार को उसके निर्वाचन वादे की याद दिलाने की तैयारी शुरू कर दी है। संघ की मांग है कि गेहूं की खरीदी दर 2700 रुपए प्रति क्विंटल तय की जाए, जैसा कि 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में किसानों से वादा किया था।
चुनावी वादा बनाम वर्तमान MSP
चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में स्पष्ट किया था कि अगर वह सत्ता में आती है तो प्रदेश के किसानों से गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल और धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। उस समय यह घोषणा किसानों के बीच काफी उम्मीदें पैदा करने वाली थी। बीते वर्ष, जब केंद्र सरकार ने गेहूं की MSP 2425 रुपए प्रति क्विंटल तय की थी, तब राज्य सरकार ने 175 रुपए का बोनस जोड़कर खरीदी दर को 2600 रुपए तक बढ़ाया। उस सीजन में प्रदेश में कुल 77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा गया था। वर्तमान सीजन में केंद्र सरकार ने MSP बढ़ाकर 2585 रुपए कर दी है, जिसके बाद मोहन सरकार ने इसमें केवल 15 रुपए जोड़कर 2600 रुपए की दर तय की। यह दर किसानों की मांग और चुनावी वादों के बीच स्पष्ट अंतर को दर्शाती है। इसी वजह से भारतीय किसान संघ अब सरकार से MSP बढ़ाने की मांग पर जोर दे रहा है।

भारतीय किसान संघ की प्रतिक्रिया
भारतीय किसान संघ ने राज्य सरकार के इस निर्णय पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। प्रांत अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने कहा कि किसानों की मांग पूरी तरह जायज और संवेदनशील है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चाहे बोनस बढ़ाकर 115 रुपए कर दे या न दे, लेकिन चुनावी वादे के मुताबिक गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार घोषणा पत्र के अनुसार कदम नहीं उठाती है, तो किसान संघ आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस संदेश से स्पष्ट होता है कि संघ राज्य सरकार पर MSP बढ़ाने के लिए दबाव बनाने में संजीदा है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने भी कहा कि किसानों की मांग पूरी तरह वाजिब है। उन्होंने यह संकेत दिया कि जल्द ही महाकौशल और मालवा प्रांतों में बैठकें की जाएंगी, ताकि आगे की रणनीति तैयार की जा सके। उनका यह भी कहना है कि किसान संघ ने पहले भी अपने प्रदर्शन और आंदोलन के जरिए अपनी ताकत दिखा दी है, जैसे कि हाल ही में उज्जैन में लैंड पुलिंग योजना को वापस कराना।
MSP बढ़ाने की मांग के पीछे कारण
MSP बढ़ाने की मांग सिर्फ चुनावी वादे को याद दिलाने तक सीमित नहीं है। किसान संघ का मानना है कि वर्तमान 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर किसानों के लिए पर्याप्त लाभकारी नहीं है।
-
गेहूं की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की कीमतों में वृद्धि ने किसानों की लागत को प्रभावित किया है।
-
बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच अंतर होने से किसानों को अपने उत्पाद का उचित मुनाफा नहीं मिल पा रहा है।
-
MSP को 2700 रुपए तक बढ़ाने से किसानों की आमदनी में वास्तविक सुधार होगा और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
इन कारणों से संघ MSP बढ़ाने के लिए सरकार पर दबाव डालने की योजना बना रहा है, ताकि किसानों को वाजिब मूल्य मिल सके और उनके हितों की रक्षा हो।
मध्यप्रदेश में गेहूं की खरीदी का इतिहास
मध्यप्रदेश में गेहूं की खरीदी का लंबा इतिहास रहा है। राज्य सरकार हर साल केंद्रीय MSP में कुछ बोनस जोड़कर किसानों को बेहतर दर देने की कोशिश करती रही है।
-
बीते वर्ष राज्य ने 77 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा।
-
पिछले साल बोनस जोड़कर दर को 2600 रुपए प्रति क्विंटल किया गया, जबकि केंद्रीय MSP 2425 रुपए थी।
-
इस साल केंद्रीय MSP बढ़कर 2585 रुपए हो गया है, और राज्य सरकार ने मात्र 15 रुपए जोड़कर 2600 रुपए तय किए।
इस तरह से देखा जाए तो राज्य सरकार की दर में बहुत छोटा इजाफा हुआ है, जो चुनावी वादों और किसानों की अपेक्षाओं से काफी कम है।
आगे की रणनीति
भारतीय किसान संघ ने प्रदेश में अगले कुछ हफ्तों में बैठकें आयोजित करने की योजना बनाई है। इसके तहत महाकौशल और मालवा प्रांतों के किसान नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के साथ रणनीति तय की जाएगी। संघ ने यह भी संकेत दिया है कि अगर सरकार MSP बढ़ाने में नहीं आती, तो आंदोलन और प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जाएगा। संघ के पिछले प्रदर्शन यह दर्शाते हैं कि वे अपने प्रस्तावों को सख्ती से लागू करवाने में सक्षम हैं। उदाहरण के तौर पर, उज्जैन की लैंड पुलिंग योजना को वापस करवाना संघ की सक्रियता और दबाव की शक्ति का प्रमाण है।
राजनीतिक प्रभाव
एमएसपी बढ़ाने की मांग न सिर्फ किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा गर्म है। क्योंकि यह सीधे चुनावी वादों और सरकार की विश्वसनीयता से जुड़ा है।
-
अगर राज्य सरकार MSP नहीं बढ़ाती है, तो किसान संघ और अन्य किसान संगठन सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।
-
विपक्षी दल इस मुद्दे का उपयोग कर सरकार की विश्वसनीयता और वादाखिलाफी को जनता के सामने ला सकते हैं।
-
किसान संघ के आंदोलन की संभावना से राजनीतिक माहौल और किसान विरोध प्रदर्शन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
