मध्यप्रदेश में सोयाबीन एमएसपी खरीद में देरी पर दिग्विजय सिंह का सरकार पर हमला, किसानों की परेशानी बढ़ी
भोपाल: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि राज्य में सोयाबीन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की प्रक्रिया में हो रही देरी किसानों के लिए भारी नुकसान का कारण बन रही है। उन्होंने ट्वीट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खरीद के आदेश अब तक जारी नहीं किए गए हैं, जबकि गुजरात और महाराष्ट्र में ये आदेश पहले ही लागू हो चुके हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश, जो कि देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य है, वहां किसानों को पिछले 12 साल से उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि क्या केंद्रीय कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों के हित में सड़क पर उतरेंगे, और अगर नहीं तो फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “एमपी में जहां सबसे अधिक सोयाबीन पैदा होती है, वहां प्रदेश सरकार ने अब तक एमएसपी पर खरीद के आदेश जारी नहीं किए। जबकि पड़ोसी राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र में यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है क्योंकि व्यापारी उन्हें बाजार से कम कीमत पर सोयाबीन खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं।”
केंद्रीय सरकार ने इस साल सोयाबीन के लिए 5328 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। लेकिन राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट निर्देश या खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं होने के कारण किसान परेशान हैं।
दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि पिछले वर्षों में सोयाबीन के भाव स्थिर रहने के कारण किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा कि क्या वे MSP के साथ कुछ बोनस राशि देकर किसानों को राहत देंगे। उनका यह बयान कृषि क्षेत्र और किसान हितों के मुद्दे पर सरकार पर सीधे दबाव डालने के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खरीद में देरी केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक सवाल भी खड़े कर रही है। किसानों की नाराज़गी बढ़ रही है और यह मामला आगामी चुनावी परिस्थितियों में राज्य सरकार के लिए चुनौती बन सकता है।

