एमपी में कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT की शर्त पर राहत की उम्मीद, अंतिम नियमों का इंतजार
भोपाल। मध्य प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति में सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता से जुड़ा विषय फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति में इस परीक्षा को बाधा नहीं बनने देने और जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि, सीपीसीटी की बाध्यता सभी संबंधित कर्मचारियों के लिए समाप्त हो चुकी है, ऐसा स्पष्ट करने वाला नवीनतम आधिकारिक आदेश इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं है। इसलिए प्रस्तावित राहत और लागू नियमों के बीच अंतर समझना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने सकारात्मक निर्णय लेने के दिए थे निर्देश
12 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा था कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए। सीपीसीटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता उनके रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।
उन्होंने यह व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया था कि पदोन्नति मिलने के बाद केवल सीपीसीटी की वजह से कर्मचारियों को पुराने पद पर वापस भेजने की स्थिति न बने। संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश दिए गए थे। यह निर्देश कर्मचारियों को राहत देने की दिशा में कदम था; छूट का वास्तविक दायरा संबंधित आदेश से स्पष्ट होगा।सहायक ग्रेड-तीन की पदोन्नति से जुड़ा है विषय
यह मुद्दा विशेष रूप से चतुर्थ श्रेणी से सहायक ग्रेड-तीन जैसे पदों पर पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों से जुड़ा है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सीपीसीटी की अनिवार्यता के कारण कई कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। कुछ विभागों में पहले जारी पदोन्नति आदेशों को निरस्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट में कृषि और उद्योग विभाग के कुछ मामलों में कर्मचारियों को वापस चतुर्थ श्रेणी के पद पर भेजे जाने का उल्लेख है। इसी पृष्ठभूमि में कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से व्यवस्था में बदलाव का अनुरोध किया था।
कर्मचारी संगठनों ने उठाई थी छूट की मांग
कर्मचारी संगठनों ने सीपीसीटी की शर्त से प्रभावित कर्मचारियों को राहत देने की मांग की थी। नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बिना सीपीसीटी दो वर्ष की परिवीक्षा पर सहायक ग्रेड-तीन के पद पर पदोन्नति देने का अनुरोध किया था।
संगठन का कहना था कि पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के बाद परीक्षा संबंधी शर्त के कारण कर्मचारियों को परेशानी हुई। हालांकि, संगठन की मांग और शासन द्वारा लागू की गई व्यवस्था अलग विषय हैं। मांग स्वीकार होने का दायरा लिखित निर्देशों से ही स्पष्ट होगा।
क्या है सीपीसीटी परीक्षा?
सीपीसीटी का पूरा नाम ‘कंप्यूटर प्रोफिशिएंसी सर्टिफिकेशन टेस्ट’ है। मध्य प्रदेश में यह परीक्षा कंप्यूटर संचालन, की-बोर्ड दक्षता और संबंधित कौशल का आकलन करने के लिए शुरू की गई थी। इसकी आधिकारिक नियम पुस्तिका में लिपिकीय पदों, कार्यालय सहायक और डेटा एंट्री ऑपरेटर जैसे कार्यों के लिए इसका उल्लेख है।
सीपीसीटी स्कोर कार्ड संबंधित पदों पर कंप्यूटर और टाइपिंग दक्षता के मूल्यांकन में उपयोग किया जाता है। इसलिए पदोन्नति में किसी छूट की खबर को सभी सरकारी भर्तियों में परीक्षा समाप्त होने के रूप में नहीं समझना चाहिए। भर्ती और पदोन्नति की पात्रता संबंधित नियमों के अनुसार देखनी होगी। लाभार्थियों की संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
साझा की गई खबर के शीर्षक में 48 हजार कर्मचारियों का उल्लेख है, जबकि मुख्य विवरण में 15 हजार से अधिक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की बात कही गई है। दोनों आंकड़ों का आधार उपलब्ध सामग्री में स्पष्ट नहीं किया गया है।
इसलिए किसी एक संख्या को निश्चित लाभार्थी संख्या बताना उचित नहीं होगा। कितने कर्मचारियों को राहत मिलेगी, किन विभागों में व्यवस्था लागू होगी और कौन-सी पात्रता आवश्यक रहेगी, इसकी पुष्टि आधिकारिक आदेश तथा विभागीय जानकारी से होनी चाहिए।
लिखित आदेश से तय होगा राहत का दायरा
कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण जानकारी छूट की पात्रता, लागू होने की तारीख और संबंधित पदों का विवरण होगा। आदेश में उम्र, सेवा अवधि, शैक्षणिक योग्यता अथवा अन्य शर्तें होने पर उनका पालन आवश्यक होगा।
फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देशों से राहत की उम्मीद बनी है। लेकिन सभी कर्मचारियों की तत्काल पदोन्नति या सीपीसीटी की पूर्ण समाप्ति का दावा करने से पहले संबंधित शासनादेश देखना जरूरी है। पात्र कर्मचारी अपने विभाग से लागू नियमों और पदोन्नति प्रक्रिया की लिखित जानकारी प्राप्त करें।
