डिजिटल (E-Attendance) व्यवस्था के नाम पर शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन का नुकसान नहीं होना चाहिए : अभिषेक गौर
ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों में बढ़ा असंतोष, राज्य कर्मचारी संघ ने आदेश में संशोधन की उठाई मांग
रिपोर्ट : विजय द्विवेदी
जिला ब्यूरो, धार
मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही डिजिटल (E-Attendance) व्यवस्था को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार यदि कोई शिक्षक या कर्मचारी एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाता है, तो उसे अनुपस्थित मानते हुए वेतन प्रभावित किया जा सकता है। इस व्यवस्था का कर्मचारी संगठनों ने कड़ा विरोध किया है और इसे व्यवहारिक परिस्थितियों की अनदेखी बताते हुए आदेश में तत्काल संशोधन की मांग की है।
राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता और कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना होना चाहिए, न कि कर्मचारियों के वैध अधिकारों और वेतन को प्रभावित करना। उनका कहना है कि तकनीकी समस्याओं के कारण यदि उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती है तो इसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना न्यायसंगत नहीं है।
जून 2026 के निर्देशों के बाद बढ़ी चिंता
जानकारी के अनुसार, लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा जून 2026 में जारी निर्देशों के तहत एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर ई-अटेंडेंस को अनिवार्य बनाया गया है। निर्देशों में कहा गया है कि वेतन देयक तैयार करते समय ऑनलाइन उपस्थिति का रिकॉर्ड आधार माना जाएगा। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा संकुल प्राचार्यों को भी निर्देश जारी किए गए हैं कि वे वेतन भुगतान से पहले ई-अटेंडेंस का मिलान सुनिश्चित करें।
इन निर्देशों के बाद प्रदेशभर के शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी उपस्थिति और वेतन को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि केवल पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज न होने के आधार पर अनुपस्थित मानना कई व्यावहारिक समस्याओं को नजरअंदाज करना है।
तकनीकी समस्याएं बन रही हैं सबसे बड़ी चुनौती
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश के अनेक ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी नेटवर्क की समस्या बनी हुई है। कई विद्यालय ऐसे स्थानों पर स्थित हैं जहां मोबाइल इंटरनेट सुचारु रूप से उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में समय पर ई-अटेंडेंस दर्ज करना हमेशा संभव नहीं होता।
इसके अलावा कई बार कर्मचारी या शिक्षक किसी शासकीय बैठक, प्रशिक्षण, परीक्षा ड्यूटी, सर्वे कार्य अथवा अन्य प्रशासनिक दायित्वों में व्यस्त रहते हैं। कई बार मोबाइल फोन साथ न होना, तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन होना या एप्लिकेशन का सही तरीके से कार्य नहीं करना भी उपस्थिति दर्ज न होने का कारण बनता है। इन परिस्थितियों में कर्मचारियों को अनुपस्थित मानकर वेतन काटना उचित नहीं माना जा सकता।
वैध अवकाश होने के बावजूद वेतन कटौती पर आपत्ति
राज्य कर्मचारी संघ ने विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई है कि यदि किसी कर्मचारी के खाते में आकस्मिक अवकाश, अर्जित अवकाश, चिकित्सा अवकाश या अन्य वैध अवकाश उपलब्ध हैं, तब भी केवल ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने के आधार पर वेतन प्रभावित किया जाना नियमों की भावना के विपरीत है।
संघ का कहना है कि कई बार अवकाश आवेदन समय पर स्वीकृत नहीं हो पाते या पोर्टल पर तकनीकी कारणों से अपडेट नहीं हो पाते। ऐसी स्थिति में कर्मचारी को अनुपस्थित मानना और वेतन रोकना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
राज्य कर्मचारी संघ ने जताया कड़ा विरोध
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, जिला संगठन धार ने विभागीय आदेश का विरोध करते हुए शासन से तत्काल संशोधन की मांग की है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का स्वागत है, लेकिन इसे कर्मचारियों के अधिकारों और हितों के विपरीत लागू नहीं किया जाना चाहिए।
संघ के अनुसार ई-अटेंडेंस व्यवस्था में आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाने चाहिए तथा ऐसी परिस्थितियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी बनाई जानी चाहिए, जहां नेटवर्क, सर्वर या अन्य तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो सके।
अभिषेक गौर ने उठाई संशोधन की मांग
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व जिला सचिव अभिषेक गौर ने कहा कि शासन को इस आदेश में तत्काल संशोधन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अर्जित एवं वैध अवकाशों का सम्मान किया जाना आवश्यक है और केवल डिजिटल उपस्थिति के आधार पर वेतन कटौती नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक का उद्देश्य कर्मचारियों को सुविधा देना होना चाहिए, न कि उन्हें अनावश्यक दंड का सामना करने के लिए मजबूर करना। यदि कोई कर्मचारी नियमानुसार कार्य कर रहा है और उसके पास वैध अवकाश उपलब्ध हैं, तो उसके वेतन पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
कर्मचारियों ने व्यावहारिक समाधान की मांग की
संघ के पदाधिकारियों ने शासन से आग्रह किया है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था में तकनीकी समस्याओं, नेटवर्क बाधाओं तथा फील्ड ड्यूटी जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट और व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को विवेकाधिकार भी दिया जाए, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में कर्मचारियों के साथ अन्याय न हो।
इन पदाधिकारियों ने दर्ज कराया विरोध
इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, जिला संगठन धार के जिलाध्यक्ष प्रफुल्ल जोशी सहित ऋतु नागिया, अभिषेक गौर, प्रदीप पांडे, राकेश शर्मा, प्रजापाल सिंह चौहान, जसवंत सिंह रिगनोदिया, सूर्यभान सिंह सोलंकी, मालव राजपुरोहित, सुरेन्द्र सिंह सोलंकी, अक्षय शर्मा, कपिल परसाई, बसंत राठौड़, अनिल पाटीदार, अशोक तिवारी, ब्रजेश वाघेला तथा अमरसिंह भाभर सहित अन्य पदाधिकारियों ने आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
डिजिटल व्यवस्था बने सुविधा का माध्यम, दंड का नहीं
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे डिजिटल व्यवस्था और तकनीकी सुधारों के विरोधी नहीं हैं। उनका आग्रह केवल इतना है कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था को व्यवहारिक परिस्थितियों के अनुरूप लागू किया जाए। किसी भी स्थिति में नेटवर्क, तकनीकी खराबी या प्रशासनिक कारणों से कर्मचारियों के वेतन और वैध अधिकारों का नुकसान नहीं होना चाहिए। शासन से अपेक्षा की जा रही है कि कर्मचारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आदेश की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि डिजिटल व्यवस्था पारदर्शिता के साथ-साथ न्यायसंगत भी बन सके।
