MP में 32 हजार Electricity कनेक्शन कटने की तैयारी, नगर निगम की नई नीति से मचेगी हलचल
MP के शहरी क्षेत्रों में Electricity उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आने वाला है। नगर निगम और विद्युत वितरण कंपनी अब एक ही परिसर में लिए गए दोहरे बिजली कनेक्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में हैं। नई नीति के तहत प्रदेश में ऐसे करीब 32 हजार बिजली कनेक्शन चिन्हित किए गए हैं, जिन पर आने वाले समय में कटौती की जा सकती है।
यह कार्रवाई अचानक नहीं की जा रही है, बल्कि पिछले एक वर्ष से इस दिशा में तैयारी चल रही थी। अब नीति और कार्रवाई की विस्तृत रूपरेखा तय किए जाने के बाद इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
एक साल पहले शुरू हुई थी प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, लगभग एक वर्ष पहले इस मुद्दे पर एसीएस (अपर मुख्य सचिव) स्तर पर चर्चा हुई थी। इसके बाद शहरों में निरीक्षण भी कराया गया, जिसमें यह सामने आया कि बड़ी संख्या में एक ही परिसर में दो या उससे अधिक बिजली कनेक्शन लिए गए हैं।
जांच के बाद यह निर्णय लिया गया कि दोहरे कनेक्शनों को नियंत्रित करने के लिए नई बिजली कनेक्शन नीति तैयार की जाएगी। इसी नीति के तहत पिछले एक साल से एक ही परिसर में दूसरा बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगा दी गई थी। अब अगला कदम पहले से मौजूद दोहरे कनेक्शनों पर कार्रवाई का है।
सरकारी छूट बनी सबसे बड़ी वजह
अधिकारियों का कहना है कि एक परिसर में दो बिजली कनेक्शन लेने की समस्या की सबसे बड़ी वजह सरकारी सब्सिडी और छूट की व्यवस्था रही है। वर्तमान बिजली नीति के तहत सीमित खपत तक उपभोक्ताओं को भारी राहत दी जाती है, जिसका लाभ लेने के लिए कई उपभोक्ताओं ने एक ही मकान या परिसर में अलग-अलग कनेक्शन ले रखे हैं।
विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में मकान मालिकों द्वारा किराएदारों के लिए अलग बिजली कनेक्शन लेना आम बात रही है। लेकिन अब इस पर रोक लगने के बाद विवाद की स्थिति लगातार सामने आ रही है।
उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनी नीति
नई व्यवस्था से कई उपभोक्ता खुद को परेशान महसूस कर रहे हैं। पहले मकान मालिक किराएदारों को अलग-अलग बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा देते थे, जिससे हर परिवार का बिल अलग आता था। अब जब यह व्यवस्था समाप्त हो चुकी है, तो एक ही मीटर से बिजली उपयोग होने के कारण बिल भुगतान को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं।
इसके अलावा, एक ही मकान में विभाजन कर रह रहे भाई, परिवार के सदस्य या अन्य रिश्तेदार भी अलग बिजली कनेक्शन न मिलने से असंतुष्ट हैं। कई मामलों में सभी लोग अलग-अलग बिजली बिल भरना चाहते हैं, लेकिन नए कनेक्शन के लिए अलग रजिस्ट्री या स्वामित्व दस्तावेज की मांग की जा रही है, जो हर स्थिति में संभव नहीं है।
300 यूनिट तक छूट का खेल
शासन की बिजली सब्सिडी नीति के अनुसार, 150 यूनिट तक की खपत को छूट के दायरे में रखा गया है। मौजूदा व्यवस्था में:
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पहले 100 यूनिट पर प्रति यूनिट केवल एक रुपये का शुल्क लिया जाता है
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इसके बाद की 50 यूनिट पर निर्धारित टैरिफ लागू होता है
यदि किसी एक परिसर में दो बिजली कनेक्शन हों, तो उपभोक्ता 300 यूनिट तक बिजली खपत पर सब्सिडी का लाभ ले सकता है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोगों ने दोहरे कनेक्शन ले रखे हैं।
बिजली वितरण कंपनी को आशंका है कि इस व्यवस्था का गलत लाभ उठाया जा रहा है और इससे राजस्व को भी नुकसान हो रहा है।
इलेक्ट्रिक वाहनों से बढ़ी चिंता
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की संख्या बढ़ने के साथ बिजली खपत में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कई उपभोक्ता इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग के लिए अलग बिजली कनेक्शन लेकर अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं।
कंपनी को डर है कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में बिजली खपत और सब्सिडी का बोझ और अधिक बढ़ जाएगा। इसी कारण दोहरे कनेक्शनों पर सख्ती जरूरी मानी जा रही है।
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क्या होगी आगे की कार्रवाई?
फिलहाल अधिकारियों द्वारा दोहरे कनेक्शनों की अंतिम सूची तैयार की जा रही है। इसके बाद उपभोक्ताओं को नोटिस जारी कर स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया जाएगा। नियमों के अनुसार, यदि एक ही परिसर में नियम विरुद्ध दो कनेक्शन पाए जाते हैं, तो उनमें से एक को काटने की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि कुछ मामलों में मानवीय आधार पर समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी, खासकर वहां जहां परिवारों का वास्तविक विभाजन है।
उपभोक्ताओं में बढ़ी चिंता
नई नीति और संभावित कार्रवाई को लेकर शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बीच चिंता का माहौल है। कई लोग इसे आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ मान रहे हैं, जबकि विभाग का कहना है कि यह कदम व्यवस्था सुधार और राजस्व संरक्षण के लिए जरूरी है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कितनी लचीली नीति अपनाती हैं और 32 हजार कनेक्शनों पर कार्रवाई किस स्तर तक होती है।
