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MP समाचार: मंत्री के वादे के बावजूद, Bhopal में बच्चों को टीन शेड के नीचे पढ़ना पड़ रहा है

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Published On: 29 January 2026
MP Government Fails to Deliver: Students Still Without Proper School Building in Bhopal
— MP Government Fails to Deliver: Students Still Without Proper School Building in Bhopal

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MP News: Bhopal में मंत्री के कहने के बाद भी स्कूल में लापरवाही,

MP के Bhopal शहर के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र स्थित सांदीपनी स्कूल में पिछले कुछ समय से एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिल रही है। खबर के अनुसार, बच्चों को अब भी ठंडी के मौसम में टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि सरकार और शिक्षा विभाग ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया था और जल्द समाधान का वादा किया था। लेकिन, दुर्भाग्यवश प्रशासनिक दावों और समयबद्ध योजनाओं के बावजूद बच्चों को अब भी नए भवन का इंतजार है। इस स्कूल में करीब 1100 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और उनकी शिक्षा के लिए उनके पास किसी भी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।

कड़ाके की ठंड में टीन शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई

विस्तार न्यूज़ ने सबसे पहले इस स्कूल की खस्ता हालत को प्रमुखता से उठाया था। स्कूल में ठंड के मौसम में बच्चों को एक ऐसे टीन शेड के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिसका कोई स्थायित्व नहीं है। जबकि मौसम में लगातार ठंड बढ़ती जा रही है, इन बच्चों के लिए यह स्थिति दिन-ब-दिन और भी खराब होती जा रही है। स्कूल की दीवारें टूटी हुई हैं और कई जगहों पर लोहे की टीन पड़ी हुई हैं, जो सिर्फ अस्थाई रूप से उपयोग में लाई जा सकती हैं। इन असुरक्षित और अस्वस्थ वातावरण में बच्चों का भविष्य बनाना संभव नहीं है। इसके बावजूद इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

मंत्री के दावे के बावजूद कोई हल नहीं

जब विस्तार न्यूज़ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और स्कूल की हालात को सभी के सामने रखा, तो स्कूल शिक्षा मंत्री, उदय प्रताप सिंह ने प्रतिक्रिया दी थी। मंत्री ने कहा था कि तीन दिन के अंदर बच्चों के लिए नया भवन तैयार किया जाएगा, और यह समस्या जल्द ही हल हो जाएगी। लेकिन जब विस्तार न्यूज़ ने इस विषय पर फिर से स्कूल का दौरा किया, तो देखा कि विभाग की लापरवाही अब भी जारी है। तीन दिन तो दूर की बात, एक महीना बीत जाने के बाद भी बच्चों को नया स्कूल भवन नहीं मिल पाया। ऐसा लगता है कि मंत्री के वादों और अधिकारियों की जिम्मेदारी के बावजूद, सिस्टम में कहीं न कहीं एक गहरा असफलता है।

पुराना स्कूल और नई इमारत का तैयार होना

सांदीपनी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के पास सिर्फ और सिर्फ असुविधाएं हैं। स्कूल का पुराना भवन काफी पुराना हो चुका है और उस भवन में बच्चों को पढ़ने के लिए ठंडी से बचने की कोई सुविधा नहीं है। कई जगहों पर दीवारें टूटी हुई हैं और इमारत की हालत बहुत खराब है। इसके अलावा, लोहे की टीन की छत भी बच्चों के सिर के ऊपर है, जो बच्चों के लिए किसी भी प्रकार से सुरक्षित नहीं है। हालांकि, एक नई इमारत पूरी तरह से तैयार हो चुकी है, लेकिन स्कूल के अधिकारियों की लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी के कारण बच्चों को उसका फायदा नहीं मिल पा रहा है। यह पूरी स्थिति प्रशासनिक असफलता का एक उदाहरण बन चुकी है।

ठेकेदार का भुगतान न होना

नई स्कूल इमारत के पूरा होने के बावजूद बच्चों को इसका उपयोग नहीं मिल पा रहा है, इसका मुख्य कारण यह है कि ठेकेदार का भुगतान अभी तक पूरा नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार, लगभग 4 करोड़ रुपये का भुगतान ठेकेदार का बाकी है, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग ने अभी तक पूरा नहीं किया है। इस कारण ठेकेदार ने स्कूल भवन का हैंडओवर करने से इंकार कर दिया है। इस मामले में विभाग की लापरवाही साफ नजर आ रही है, क्योंकि जब तक ठेकेदार को भुगतान नहीं किया जाता, तब तक बच्चों के लिए नया स्कूल खोलने की संभावना कम है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मुद्दे पर लगातार पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ पा रहा है।

मुख्यमंत्री का उद्घाटन और फिर भी स्कूल का खुलना न

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 25 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस नए स्कूल भवन का शुभारंभ किया था, जिसके बाद बच्चों को नए भवन में भेजने का वादा किया गया था। लेकिन, नए स्कूल भवन का उद्घाटन करने के बाद भी इस पर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की गई, जिससे बच्चों को अब भी पुराने और असुरक्षित भवन में बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह विभाग के लिए शर्मनाक स्थिति है कि वादों के बावजूद बच्चों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए कदम नहीं उठाए गए।

मंत्री का बयान और अधिकारियों की जिम्मेदारी

जब इस मुद्दे पर विस्तार न्यूज़ ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से सवाल किए, तो उन्होंने कहा कि बहुत जल्द इस मुद्दे पर कार्रवाई की जाएगी और लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब मंत्री के स्तर पर कार्रवाई की बात की जा रही है, तो अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहे हैं? बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना किसी भी प्रकार से माफ़ नहीं किया जा सकता। शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का है और यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि बच्चों को एक सुरक्षित और आरामदायक वातावरण मिले।

जिला शिक्षा अधिकारी की स्थिति

इस मुद्दे पर जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवाल से भी बात की गई। उन्होंने स्वीकार किया कि ठेकेदार का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया गया है, जिस कारण बच्चों को नया भवन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह लगातार अधिकारियों से पत्राचार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस हल नहीं निकला है। उनकी शिकायतें और प्रयास अब तक बेकार साबित हो रहे हैं, और बच्चों को सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं।

विभाग की फेलियर और बच्चों की स्थिति

यह पूरी स्थिति मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग की बड़ी असफलता को उजागर करती है। बच्चों को बेसहारा छोड़ देना और उन्हें असुरक्षित माहौल में पढ़ने के लिए मजबूर करना कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता। ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मनमानी के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।

उम्मीद और समाधान

आखिरकार, उम्मीद की जाती है कि मुख्यमंत्री और मंत्री इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें और बच्चों को उनके अधिकार के तहत बेहतर शिक्षा प्रदान करने का काम करें। इस मामले में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है ताकि बच्चों को एक सुरक्षित और उचित शिक्षा मिल सके। सरकार को ठेकेदारों के साथ सही तरीके से भुगतान के मुद्दे को हल करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए, ताकि स्कूल का हैंडओवर जल्द से जल्द हो सके।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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