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T&CP में संविदा नियुक्ति पर रोक,CS Anurag Jain ने स्पष्ट किया – नियम पहले जरूरी

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Published On: 9 January 2026
Builders’ Lobby Faces Setback: MP CS Anurag Jain Returns Sunita Singh’s Contract Proposal
— Builders’ Lobby Faces Setback: MP CS Anurag Jain Returns Sunita Singh’s Contract Proposal

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T&CP में संविदा नियुक्ति पर रोक, CS अनुराग जैन ने स्पष्ट किया – नियम पहले जरूरी

भोपाल। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (T&CP) में ज्वाइंट डायरेक्टर पद से हाल ही में सेवानिवृत्त सुनीता सिंह की संविदा नियुक्ति को लेकर मध्य प्रदेश सरकार में एक बड़ी चर्चा छिड़ गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सुनीता सिंह को संविदा पर रखने के लिए प्रस्ताव तैयार किया था और इसे कैबिनेट में भेजने के लिए मुख्य सचिव अनुराग जैन को सौंपा गया। लेकिन मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को लौटाते हुए स्पष्ट किया कि “रिटायर होने के बाद इस संविदा नियुक्ति की आवश्यकता क्या है।”

यह कदम न केवल प्रशासनिक नियमों के पालन का उदाहरण है, बल्कि बिल्डर और नेताओं के दबावों के खिलाफ ईमानदार प्रशासनिक रवैये का प्रतीक भी माना जा रहा है।

सुनीता सिंह की संविदा नियुक्ति का प्रस्ताव और विभाग की तर्क-व्यवस्था

सुनीता सिंह, जो ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थीं, पिछले महीने सेवानिवृत्त हो गई हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने प्रशासनिक जरूरत को आधार बनाते हुए उन्हें संविदा पर नियुक्त करने का प्रस्ताव तैयार किया। विभाग का तर्क था कि भोपाल मास्टर प्लान का प्रकाशन बेहद अहम चरण में है। मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सुनीता सिंह ने ही तैयार किया है और इसे अंतिम रूप देकर डायरेक्टर को सौंपना उनका कर्तव्य माना जा रहा है।

विभाग की दलील थी कि मास्टर प्लान के अंतिम रूप में तकनीकी समझ और अनुभव की आवश्यकता है, जो सुनीता सिंह के पास उपलब्ध है। यही वजह बताकर उन्होंने संविदा नियुक्ति का प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा।

अफवाहें और बिल्डर लॉबी का दबाव

हालांकि सूत्रों के मुताबिक, इस संविदा नियुक्ति के पीछे असली वजह बिल्डर लॉबी का दबाव था। शहर के कई बिल्डर्स चाहते थे कि सुनीता सिंह विभाग में बनी रहें, क्योंकि उनका मास्टर प्लान से सीधा जुड़ाव था। उनके जाने से बिल्डरों के हित प्रभावित होने की संभावना थी। इसलिए संविदा नियुक्ति केवल औपचारिक कारण दिखाकर पेश की गई।

सुनीता सिंह गणपति बिल्डर्स के डायरेक्टर विनोद सिंह की बहन हैं। उनके एक्सटेंशन और संविदा नियुक्ति की तैयारी लंबे समय से चल रही थी, और राजनीतिक तथा अफसरशाही स्तर पर पहले से सहमति भी बन चुकी थी। दिसंबर के अंत में विभाग में हुई कुछ घटनाओं ने यह संकेत दिया कि सुनीता सिंह संविदा नियुक्ति पाने के लिए पूरी तैयारी में थीं।

मुख्य सचिव CS Anurag Jain ने संविदा नियुक्ति पर रोक क्यों लगाई?

मुख्य सचिव CS Anurag Jain ने प्रस्ताव आते ही इसे वापस लौटा दिया। उनका सवाल था कि संविदा नियुक्ति क्यों आवश्यक है, जबकि विभाग में ऐसे कई अधिकारी हैं जो मास्टर प्लान पर काम कर सकते हैं।

जैन ने यह स्पष्ट किया कि किसी रिटायर्ड अधिकारी को संविदा पर रखने के बाद उसे विभाग में टॉप लेवल के अधिकार और गोपनीय जिम्मेदारियां देना नियमों के अनुसार उचित नहीं है। उन्होंने संविदा नियुक्ति के सभी दस्तावेजों और औपचारिकताओं की पूरी जांच का आदेश दिया।

इस कदम से यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक नियमों का पालन और जवाबदेही अब सर्वोपरि हैं, चाहे इसके लिए राजनीतिक और बिल्डर लॉबी के दबाव को नजरअंदाज क्यों न करना पड़े।

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मास्टर प्लान का महत्व और संविदा नियुक्ति का संदर्भ

भोपाल मास्टर प्लान शहर के विकास की दिशा और भविष्य की योजनाओं के लिए अहम दस्तावेज है। इसे अंतिम रूप देना और सरकारी मंजूरी के लिए भेजना एक संवेदनशील कार्य है। विभाग का तर्क था कि सुनीता सिंह के अनुभव और जानकारियों के बिना यह कार्य अधूरा रह सकता है।

हालांकि, मुख्य सचिव ने इस तर्क को सीधे तौर पर स्वीकार नहीं किया। जैन के अनुसार, विभाग में ऐसे कई अफसर हैं जो मास्टर प्लान पर काम करने में सक्षम हैं और संविदा नियुक्ति की आवश्यकता नहीं है। उनका यह कदम यह भी दर्शाता है कि संविदा नियुक्ति केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं बल्कि बाहरी दबाव का परिणाम हो सकती है।

राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव

सूत्रों के अनुसार, बिल्डरों और राजनीतिक हितधारकों ने संविदा नियुक्ति को लेकर पहले से योजना बनाई थी। उन्हें विभाग में टॉप लेवल अधिकार देने और मास्टर प्लान की प्रक्रिया को अपने अनुकूल बनाने की तैयारी थी।

हालांकि, मुख्य सचिव CS Anurag Jain की ईमानदारी और नियमों के प्रति सख्ती के कारण यह योजना अब मुश्किल में दिखाई दे रही है। संविदा पर तैनात अफसरों को गोपनीय और जवाबदेही वाले काम देना पहले भी सामान्य नियमों के तहत असामान्य माना जाता है।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश सरकार में यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। रिटायर अधिकारी को संविदा पर लाना और उसे टॉप लेवल अधिकार देना केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं बल्कि बाहरी दबाव के तहत किया जा सकता है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इसे रोक कर यह संदेश दिया है कि नियमों के उल्लंघन और अनियमित दबाव के बावजूद प्रशासनिक ईमानदारी को बनाए रखा जाएगा।

सुनीता सिंह की संविदा नियुक्ति का मामला अब आगे कैबिनेट और विभागीय समीक्षा के लिए भेजा जाएगा। इस फैसले से यह स्पष्ट होगा कि मध्य प्रदेश सरकार प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन को कितनी गंभीरता से लेती है।

यह मामला न केवल बिल्डरों और राजनीतिक दबावों के खिलाफ प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण है, बल्कि राज्य में सरकारी प्रक्रिया और जवाबदेही की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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