MP में किसानों के लिए बड़ी राहत: अब फसल ऋण साल में एक बार ही चुकाना होगा
MP कृषकों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) से खरीफ और रबी फसलों के लिए अल्पकालीन ऋण लेने वाले किसान साल में दो बार नहीं, बल्कि एक बार ही अपना ऋण चुका सकेंगे। इस निर्णय से लाखों किसानों को ऋण चुकौती के दबाव से राहत मिलेगी और वे मई या जून में दोनों सीजन के ऋण का भुगतान कर सकेंगे।
वर्तमान में किसानों को खरीफ फसल का ऋण मार्च तक और रबी फसल का ऋण जून तक चुकाना होता है। लेकिन 2025 में गेहूं और अन्य फसलों की उपार्जन प्रक्रिया में देरी के कारण बहुत से किसान समय पर खरीफ ऋण नहीं चुका पाए। इस कारण किसानों की ओर से ऋण अदायगी की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग उठी, ताकि वे डिफॉल्टर न माने जाएँ।
एक साल में ऋण अदायगी का लाभ
नई व्यवस्था के अनुसार किसानों को ऋण चुकाने के लिए एक ही वार्षिक तिथि दी जाएगी। इससे किसानों पर ऋण के बार-बार भुगतान का दबाव नहीं रहेगा और वे वित्तीय रूप से सुरक्षित रहेंगे। यह कदम किसानों को समय पर ऋण चुकाने में सहायता करेगा और उन्हें भविष्य में ब्याज मुक्त ऋण लेने से वंचित नहीं करेगा।
MP के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने सहकारिता एवं वित्त विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसी योजना बनाई जाए, जिसमें किसान दोनों सीजन का ऋण एक ही बार में चुका सकें। अधिकारियों के अनुसार, इस साल 91 प्रतिशत किसानों ने खरीफ ऋण चुका दिया है। नए नियम से किसान मई-जून में रबी की फसल बिक्री के बाद ऋण का भुगतान कर सकेंगे।
अल्पकालीन फसल ऋण और सरकारी सहायता
खेती की लागत घटाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार किसानों को तीन लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त अल्पकालीन ऋण देती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 35 लाख किसानों को कुल 21,232 करोड़ रुपये का अल्पकालीन फसल ऋण प्रदान किया गया।
सरकार का उद्देश्य यह है कि किसान ऋण लेकर आसानी से खेती कर सकें। लेकिन जब ऋण अदायगी की समय-सीमा फसल उपार्जन या बिक्री में देरी के कारण पूरी नहीं होती, तो किसान डिफॉल्टर माने जाते हैं और भविष्य में उन्हें ब्याज मुक्त ऋण लेने में कठिनाई होती है।
अंतिम तिथि बढ़ाने में चुनौतियां
यद्यपि ऋण अदायगी की तिथि बढ़ाना आसान लगता है, लेकिन इसमें कई प्रशासनिक और वित्तीय समस्याएं हैं। सहकारी विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार सभी ऋणी किसानों को 1.5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देती है, और नियमित अदायगी करने वाले किसानों को अतिरिक्त 3 प्रतिशत प्रोत्साहन मिलता है। तिथि बढ़ाने से इन सब्सिडी की प्राप्ति 2-2.5 वर्ष तक विलंबित हो सकती है, जिससे वित्तीय बोझ बढ़ सकता है।
इसके अलावा, सहकारी समितियों का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है, जिसमें ड्यू डेट, ब्याज दर और गणना प्रणाली द्वारा ही निर्धारित होती है। अंतिम तिथि में बदलाव से ब्याज गणना में कठिनाई होगी और राज्य को अनुमानित 49 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है।
किसान कल्याण और नीति लाभ
यह नई व्यवस्था कृषक कल्याण वर्ष की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे किसानों को फसल उगाने में सुविधा होगी और ऋण चुकौती का लगातार दबाव नहीं रहेगा। दो बार ऋण भुगतान की जगह केवल एक बार भुगतान करने से किसानों का समय और संसाधन बचेगा, और वे कृषि कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
हाल ही में भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों, मंत्रियों और अधिकारियों की बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें किसानों को पर्याप्त समय मिल सके और वे मई-जून में रबी की फसल की बिक्री के बाद ऋण चुका सकें। इस योजना को जल्द ही कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा।
ऋण अदायगी का वर्तमान डेटा
आगे बताया गया कि अब तक खरीफ ऋण की अंतिम तिथि 28 मार्च थी। गेहूं, चना, मसूर और अन्य उपज का समर्थन मूल्य पर उपार्जन शुरू नहीं हुआ था, इसलिए किसानों ने समय बढ़ाने की मांग की थी। नई प्रणाली के लागू होने पर किसानों को दो बार भुगतान की बजाय एक ही बार भुगतान करने का मौका मिलेगा, जिससे डिफॉल्ट होने की संभावना समाप्त हो जाएगी।
निष्कर्ष
MP में किसानों के लिए यह कदम विशेष राहत साबित होगा। दोनों सीजन का ऋण एक ही बार में चुकाने की अनुमति से किसानों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उन्हें भविष्य में ब्याज मुक्त ऋण लेने की सुविधा बनी रहेगी।
सरकार की यह पहल किसानों के लिए एक स्थिर और सहयोगी ऋण प्रणाली सुनिश्चित करती है, जो फसल चक्र और बाजार परिस्थितियों के अनुरूप है। इसके माध्यम से खेती की लागत घटाने का उद्देश्य पूरा होगा और किसान अपने कृषि कार्यों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
