MP News: पांच बार टली Collector–Commissioner कॉन्फ्रेंस, अब 21 जनवरी को मुख्य सचिव लेंगे अफसरों की कड़ी समीक्षा
मध्य प्रदेश में प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा को लेकर प्रस्तावित Collector–Commissioner कॉन्फ्रेंस की तारीख आखिरकार तय हो गई है। पांच बार स्थगित होने के बाद अब यह महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक 21 जनवरी को आयोजित होगी। मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में यह बैठक सुबह 11 बजे मंत्रालय वल्लभ भवन में शुरू होगी। इसे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जिलों और संभागों के प्रदर्शन की गहन समीक्षा की जाएगी और आगे की रणनीति तय होगी। इस समीक्षा बैठक में मंत्रालय स्तर के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि सभी 55 जिलों के Collector–Commissioner और पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों पर अब तक हुई प्रगति का आकलन करना और प्रशासनिक कसावट को और मजबूत करना है।
10 प्रमुख बिंदुओं पर जिलों की रैंकिंग
सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस कॉन्फ्रेंस के लिए व्यापक तैयारी की है। विभिन्न विभागों से प्राप्त आंकड़ों और सूचनाओं के आधार पर जिलों और संभागों की 10 प्रमुख बिंदुओं पर रैंकिंग तैयार की गई है। इस रैंकिंग में प्रत्येक बिंदु पर टॉप दो और बॉटम दो जिलों को शामिल किया गया है, ताकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को प्रोत्साहन मिले और कमजोर प्रदर्शन वाले जिलों से जवाबदेही तय की जा सके। इन प्रमुख बिंदुओं में विकास योजनाओं की प्रगति, जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, राजस्व वसूली, कानून-व्यवस्था, शिकायतों का निपटारा, ई-गवर्नेंस, और समयसीमा में कार्य पूर्ण करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। माना जा रहा है कि बैठक के दौरान कमजोर प्रदर्शन करने वाले जिलों के अधिकारियों से सीधे सवाल किए जाएंगे और उनसे सुधार की ठोस कार्ययोजना मांगी जाएगी।
पांच बार बदली गई कॉन्फ्रेंस की तारीख
इस कॉन्फ्रेंस की तारीख पहले 31 दिसंबर तय की गई थी, लेकिन ऐन वक्त पर इसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद 5 जनवरी, फिर 9 जनवरी और बाद में 15 जनवरी को बैठक प्रस्तावित हुई, लेकिन हर बार अपरिहार्य कारणों से इसे टालना पड़ा। इस तरह कुल पांच बार तारीख बदली गई, जिससे प्रशासनिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। अब 21 जनवरी को बैठक तय होने के बाद माना जा रहा है कि इस बार समीक्षा पूरी गंभीरता के साथ होगी। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के बीच यह बैठक हो रही है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही और कसावट पर विशेष जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री के निर्देशों पर फोकस
बैठक में सबसे अहम मुद्दा यह रहेगा कि मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न विभागों और जिलों को दिए गए निर्देशों पर कितना काम हुआ है। अधिकारियों से स्पष्ट रूप से पूछा जाएगा कि किन निर्देशों पर अमल हुआ और किन पर नहीं। इसके साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों से प्रगति रिपोर्ट भी तलब की गई है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव अनुराग जैन बैठक के दौरान साफ शब्दों में यह संदेश देंगे कि लापरवाही और ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
परफॉर्मेंस के आधार पर पोस्टिंग
मुख्य सचिव अनुराग जैन पहले भी कई मंचों से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अधिकारियों की पोस्टिंग उनके परफॉर्मेंस के आधार पर की जाएगी। इसी नीति के तहत आने वाले दिनों में एक और ट्रांसफर लिस्ट जारी होने की संभावना है। इस सूची में उन अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। हाल ही में कई अधिकारियों के प्रमोशन हुए हैं, जिसके चलते उन्हें सचिव स्तर पर पदोन्नत किया गया है। ऐसे में प्रशासनिक ढांचे में बदलाव तय माना जा रहा है।
कई जिलों के Collector–Commissioner बदलने की तैयारी
सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार, आने वाले समय में कई जिलों के कलेक्टर बदले जा सकते हैं। जिन अधिकारियों को हाल ही में प्रमोशन मिला है, उन्हें मंत्रालय में पोस्टिंग दी जा सकती है। इसके अलावा कुछ संभागों के Commissioner भी बदले जाने की संभावना है, क्योंकि उनका कार्यकाल वहां लंबा हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि 26 जनवरी के बाद प्रशासनिक फेरबदल की एक बड़ी सूची जारी हो सकती है। मुख्यमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद इस सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह फेरबदल पूरी तरह से परफॉर्मेंस और प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
प्रशासनिक कसावट की दिशा में बड़ा कदम
कुल मिलाकर 21 जनवरी को होने वाली Collector–Commissioner कॉन्फ्रेंस को प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए निर्णायक माना जा रहा है। यह बैठक न केवल जिलों के कामकाज की समीक्षा करेगी, बल्कि आने वाले समय में प्रशासनिक ढांचे और अधिकारियों की जिम्मेदारियों की दिशा भी तय करेगी। ऐसे में सभी की नजरें इस बैठक और इसके बाद होने वाले संभावित प्रशासनिक बदलावों पर टिकी हुई हैं।
