एमपी कैबिनेट का फैसला: दमोह–कटनी के बीच 105 किमी सड़क को मंजूरी, चार सिंचाई परियोजनाओं को भी गति
दैनिक स्वराज वाणी | भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 29 सितंबर को हुई मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में सड़क और सिंचाई से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें दमोह से कटनी के बीच लगभग 105 किलोमीटर लंबे मार्ग का प्रस्ताव प्रमुख है। इस मार्ग को ‘विंध्य विकास पथ’ से जोड़ा जा रहा है। बैठक में चार सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया। इन फैसलों का असर सड़क संपर्क और खेती के लिए पानी की उपलब्धता पर पड़ सकता है, हालांकि लोगों को वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरे होने के बाद ही मिलेगा।
दमोह और कटनी के बीच संपर्क पर जोर
दमोह–कटनी मार्ग बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के बीच आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित सड़क की लंबाई करीब 105 किलोमीटर बताई गई है। सड़क विकसित होने पर दोनों जिलों के बीच यात्रा और माल परिवहन को सुविधा मिलने की उम्मीद है। आसपास के गांवों से जिला मुख्यालय, मंडियों और अन्य सेवा केंद्रों तक आने-जाने वाले लोगों के लिए भी बेहतर सड़क संपर्क उपयोगी हो सकता है।
सड़क परियोजना से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिलना पहला चरण है। इसके बाद भूमि संबंधी प्रक्रिया, निविदा, निर्माण और गुणवत्ता की निगरानी जैसे काम होंगे। इसलिए अभी सड़क शुरू होने या यात्रा समय में निश्चित कमी आने की तारीख बताना जल्दबाजी होगी।
‘विंध्य विकास पथ’ से क्या उम्मीद है?
इस मार्ग को ‘विंध्य विकास पथ’ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। दमोह और कटनी के बीच बेहतर सड़क बनने से निजी वाहन चालकों के साथ बसों और मालवाहक वाहनों को भी लाभ मिलने की संभावना है। किसान अपनी उपज को बाजार तक पहुंचाने के लिए सड़कों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में मार्ग की स्थिति सुधरने पर परिवहन अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
स्थानीय व्यापारियों के लिए भी सड़क संपर्क अहम है। माल की ढुलाई, आसपास के कस्बों से ग्राहकों की आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति सड़क की स्थिति से प्रभावित होती है। हालांकि इन संभावित लाभों का आकलन परियोजना पूरी होने और मार्ग पर यातायात शुरू होने के बाद ही किया जा सकेगा।
चार सिंचाई परियोजनाओं पर भी फैसला
कैबिनेट बैठक में सड़क के साथ चार सिंचाई परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। सिंचाई व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ी होती है। जिन क्षेत्रों में खेतों तक नियमित पानी पहुंचता है, वहां किसानों के लिए फसल की योजना बनाना आसान होता है। परियोजनाओं का काम पूरा होने पर संबंधित क्षेत्रों के किसानों को सुविधा मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
फिलहाल उपलब्ध विवरण में चारों परियोजनाओं के नाम, उनकी अलग-अलग स्वीकृत लागत, लाभान्वित होने वाले गांवों और सिंचित क्षेत्र का पूरा ब्योरा नहीं है। इन आंकड़ों के बिना यह बताना उचित नहीं होगा कि किस जिले के कितने किसानों को कब से पानी मिलने लगेगा। परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी सामने आने पर उनके क्षेत्रवार प्रभाव की तस्वीर स्पष्ट होगी।
किसानों के लिए सड़क और सिंचाई, दोनों अहम
किसानों के लिए खेत तक पानी पहुंचना और उपज को बाजार तक ले जाना, दोनों अलग लेकिन जरूरी जरूरतें हैं। सिंचाई परियोजनाएं खेती से जुड़ी पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए बनाई जाती हैं, जबकि सड़कें गांवों, कस्बों और बाजारों के बीच संपर्क का माध्यम हैं। कैबिनेट के इन फैसलों में ग्रामीण जीवन की दोनों जरूरतों पर ध्यान दिया गया है।
सड़क बनने से किसी किसान को कितना लाभ होगा, यह उसके गांव की मार्ग से दूरी और उपलब्ध संपर्क सड़कों पर निर्भर करेगा। इसी तरह सिंचाई परियोजना का फायदा उसके तय क्षेत्र, निर्माण की प्रगति और खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा। इसलिए स्वीकृति के बाद परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी नजर रहेगी।
आगे क्या होगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद संबंधित विभाग परियोजनाओं की आगे की प्रक्रियाएं पूरी करेंगे। सड़क के मामले में निर्माण शुरू होने से पहले प्रशासनिक और निविदा संबंधी कदम जरूरी होंगे। सिंचाई परियोजनाओं के लिए भी स्वीकृत कार्यों को जमीन पर उतारना होगा। आने वाले समय में विभागीय आदेशों से लागत, समयसीमा और लाभान्वित क्षेत्रों का अधिक स्पष्ट विवरण मिल सकेगा।
दमोह–कटनी मार्ग और सिंचाई परियोजनाओं पर हुए फैसले बुंदेलखंड तथा विंध्य क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब स्थानीय निवासियों और किसानों की नजर इस बात पर रहेगी कि स्वीकृत कार्य कब शुरू होते हैं, कितनी गति से आगे बढ़ते हैं और सुविधाएं उनके गांवों व खेतों तक कब पहुंचती हैं।
